भोपाल से दिव्यांगों की आवाज: भोपाल की दिव्यांग मोटीवेशन स्पीकर श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा खुला खत, पूछा कि आपके आत्मनिर्भर भारत अभियान में दिव्यांग कहां?

भोपाल से दिव्यांगों की आवाज: भोपाल की दिव्यांग मोटीवेशन स्पीकर श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा खुला खत, पूछा कि आपके आत्मनिर्भर भारत अभियान में दिव्यांग कहां?


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भोपाल20 मिनट पहलेलेखक: राजेश गाबा

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पूनम श्रोती को देश की 100 लोकप्रिय महिलाओं की लिस्ट में शुमार होने पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित किया था। फाइल फोटो

  • देश की सौ प्रभावशाली महिलाओं में शामिल है पूनम श्रोति
  • पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से हो चुकी हैं सम्मानित

कहते हैं कि जब मुश्किलें सामने हों, तो डरना नहीं चाहिए, उनका मुकाबला करना चाहिए। जो मुकाबला करता है, वो जीत जाता है। कुछ ऐसा ही भोपाल की पूनम श्रोती ने भी किया। ऑस्टियोजेनिसिस बीमारी से पीड़ित पूनम की उम्र 32 साल है और गंभीर रोग से जूझ रही हैं, लेकिन पूनम पूनम ग्रामीण विकास के अलावा, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग लोगों को उच्च शिक्षा देने के साथ साथ उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। वो अपनी शारीरिक कमजोरी को कमजोरी न मानकर उसे छोटी सी परेशानी समझकर आगे बढ़ रही हैं और लोगों को प्रेरणा दे रही हैं। देश की सौ प्रभावशाली महिलाओं में शामिल होकर पूनम पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से सम्मान भी ले चुकी हैं। दिव्यांग की समस्या के लिए मुखर रहने वाली पूनम ने अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिव्यांग जनों कि मुख्य समस्या को समझने के लिए खुला खत लिखा है।

दिव्यांगों की समस्या की ओर भी ध्यान दें तभी सही मायने में बनेगा भारत आत्मनिर्भर

पूनम श्रोती ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि हाल ही मे 12 नवंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी मे स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा का अवलोकन करते हुए जनता को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण बातें कही थीं। जिसमे आत्मनिर्भर भारत के लिए हर वर्ग के लोगों को शामिल किया गया, परंतु दिव्यांग लोगों की कोई बात नहीं की गई। आज स्वच्छ भारत के अंतर्गत शहरों और गांवों की रैंकिंग की जाती है, परंतु सुगम भारत मे ऐसा कुछ नहीं किया जाता । अगर ऐसा किया जाए तो सभी राज्य, शहर और ग्राम ना केवल स्वच्छता की ओर ध्यान देंगे और दिव्यांग जनों की परेशानियों को कम करने का प्रयास भी करेंगें। उनको मेनस्ट्रीम मे लाने के लिए उचित कदम भी उठायेंगे। भारत को आत्मनिर्भर तभी बनाया जा सकता है। जब भारत देश का प्रत्येक नागरिक बिना किसी भेदभाव के हर एक जगह खुद आगे बढ़ पाए। जरूरी है कि दिव्यांग लोगों को भी आत्मनिर्भर भारत मे महत्व दिया जाए।इन्हीं सब मुद्दों को लेकर मैंने देश के प्रधानमंत्री को खुला खत लिखा है ताकि वे हम दिव्यांगों की समस्याएं समझ सकें और सुगम भारत अभियान को वास्तव में सार्थक बना सकें।

यह उसी खत की कापी है जो पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है।

यह उसी खत की कापी है जो पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है।

यह उसी खत की कापी है जो पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है।

यह उसी खत की कापी है जो पूनम श्रोती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है।

ये लिखा है ओपन लैटर में-

आदरणीय प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी सादर नमस्कार ,

माननीय महोदय,

सारी दुनिया आपके यशस्वी नेतृत्व की प्रशंसा करती है और हम भारतवासी भी यह मानते हैं कि आप एक बेहद सक्षम राजनेता हैं। आपने अपने शासनकाल मे कई ऐसे कार्य किए हैं। जो बेहद प्रशंसनीय हैं एवं देश की तरक्की मे सहयोगी हुए हैं। आपने 3 दिसम्बर 2015, को अंतरराष्ट्रीय विकलांगता दिवस के उपलक्ष्य में सुगम भारत अभियान की शुरुआत की थी। यह अभियान विकलांगता के सामाजिक मॉडल के इस सिद्धांत पर आधारित है कि किसी व्यक्ति की सीमाओं और अक्षमताओं के कारण नही बल्कि सामाजिक व्यवस्था के तरीके के कारण विकलांगता है। इस अभियान का उद्देश्य देशभर में दिव्यांग जनों के लिए बाधा रहित और सुखद/अनुकूल वातावरण तैयार करना है। अभियान का दृष्टिकोण समावेशी समाज की परिकल्पना है जिसमें दिव्यांग व्यक्तियों की प्रगति और विकास के लिए समान अवसर उपलब्ध हों ताकि वे उत्पादक, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जी सकें। भारत विकलांग व्यक्ति के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UN Convention on the Rights of Persons with Disabilities-UNCRPD) का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है। UNCRPD का अनुच्छेद 9, सभी हस्ताक्षकर्ता सरकारों को विकलांग व्यक्तियों को अन्य व्यक्तियों की तरह ही समान आधार पर, भौतिक वातावरण, परिवहन, सूचना तथा संचार में समुचित उपाय सुनिश्चितकरने का दायित्व सौंपता है। ये उपाय जिनमें, सुगम्यता के लिए अवरोधों और बाधाओं की पहचान एवं उन्मूलन शामिल हैं, अन्य बातों के साथ-साथ निम्न पर लागू होंगे-

1. स्कूलों, आवासों, चिकित्सा सुविधाओं तथा कार्यस्थलों सहित, भवनों, सड़कों, परिवहन और अन्य आंतरिक तथा बाहरी सुविधाएं ।

2. इलेक्ट्रानिक्स सेवाओं तथा आकस्मिक सेवाओं सहित, सूचना, संचार तथा अन्य सेवाएं ।

2 अक्टूबर 2014 को देशभर में एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई। जिसे आपके द्वारा ही चालू किया गया था । यह अभियान आज देश के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों मे पूरी गति के साथ निरंतर बढ़ रहा है परंतु सुगम भारत अभियान की कहीं कोई चर्चा तक नहीं होती।

हाल ही मे, 12 नवंबर 2020 को आपने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी मे स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा का अवलोकन किया था और उस अवसर पर भी आपने जनता को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण बातें कही थीं। जिसमे आत्मनिर्भर भारत के लिए हर वर्ग के लोगों को शामिल किया गया परंतु दिव्यांग लोगों की कोई बात नहीं की गई। आज स्वच्छ भारत के अंतर्गत शहरों और गांवों की रैंकिंग की जाती है, परंतु सुगम भारत मे ऐसा कुछ नहीं किया जाता । अगर ऐसा किया जाए तो सभी राज्य, शहर और ग्राम ना केवल स्वच्छता की ओर ध्यान देंगे। परंतु दिव्यांग जनों की परेशानियों को कम करने का प्रयास भी करेंगें। उनको मेनस्ट्रीम मे लाने के लिए उचित कदम भी उठायेंगे। भारत को आत्मनिर्भर तभी बनाया जा सकता है। जब भारत देश का प्रत्येक नागरिक बिना किसी भेदभाव के हर एक जगह खुद आगे बढ़ पाए । जरूरी है कि दिव्यांग लोगों को भी आत्मनिर्भर भारत मे महत्व दिया जाए । आज भी कई दिव्यांग बच्चे अपने स्कूल जाने का भी सपना पूरा नहीं कर पाते, स्कूल तक पहुंचना भी एक बड़ी चुनौती है। ना तो उचित साधन हैं और ना ही सड़कों, वाहनों, या भवनों मे उचित व्यवस्था । ऐसे मे भारत आत्मनिर्भर भारत का सपना कैसे देख सकता है। दिव्यांग जनों मे भी प्रतिभा है और वह सक्षम भी हैं। अपने देश का नाम गौरवान्वित करने के लिए, परंतु वे परिस्थिति एवं साधनों के अभाव मे कुछ करने मेअसमर्थ है।

अतः आपसे अनुरोध है कि पुनः सुगम भारत अभियान को अधिक से अधिक महत्व देते हुए दिव्यांग जनों हेतु सभी समाज मे उस व्यवहार को लाने का प्रयास करें। जो भारत की तस्वीर बदलने मे सहयोगी बने। सब मिलकर अपने देश को आत्मनिर्भर बनाए ।

इस पत्र के माध्‍यम से यही कहना चाहती हूं

– न किसी की दया और न ही वरदान चाहिए,

हम दिव्यांगों को अपना सही स्‍थान चाहिए।

राह बनाने का जज्‍़बा हमारे दिलों में बसा है,

हमें अपना आत्‍मनिर्भर हिन्दुस्‍तान चाहिए।।

आपके आत्‍मनिर्भर भारत की बेटी

पूनम श्रोती (दिव्यांग) संस्थापक

उद्दीप सोशल वेलफेयर सोसायटी



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