हमीदिया की रिपोर्ट में झूठ पर झूठ: जांच टीम ने मृतक को डायबिटीज बताई, बेटे बोले-पिता ने कभी शुगर की दवा नहीं ली

हमीदिया की रिपोर्ट में झूठ पर झूठ: जांच टीम ने मृतक को डायबिटीज बताई, बेटे बोले-पिता ने कभी शुगर की दवा नहीं ली


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भोपाल19 मिनट पहले

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घटना के बाद हमीदिया के कोविड वार्ड में भर्ती कुछ मरीजों के परिजनों ने उन्हें यहां से अन्य निजी अस्पताल में शिफ्ट कर लिया।

  • बिजली गुल मामले में जान गंवाने वाले अब्दुल के बेटों ने सरकारी जांच को झूठा बताया
  • रेलवे अस्पताल में कभी नहीं दी गई डायबिटीज की दवाइयां

हमीदिया में शुक्रवार को बिजली गुल होने के बाद हुई तीन मौतों की जांच रिपोर्ट में कई झूठ उजागर हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट में 70 साल के अब्दुल रहीम को हार्ट डिसीज के अलावा डायबिटीज का रोगी भी बताया गया है, लेकिन उनके बेटों ने सरकारी जांच रिपोर्ट को झूठी बताया है। उनका दावा है कि उनके पिता की रेलवे अस्पताल में हर महीने जांच होती थी, उन्हें डॉक्टरों ने कभी डायबिटीज की दवा नहीं दी। 30 नवंबर को उन्हें रेलवे अस्पताल ले गए थे लेकिन उन्होंने 15 मिनट के भीतर हमीदिया रैफर किया, तब भी डॉक्टरों ने जो पर्चा दिया, उसमें डायबिटीज की कोई दवा नहीं लिखी।

मृतक अब्दुल रहीम के बेटों लतीफ और याकूब ने बताया कि 10 और 11 तारीख को उनकी फोन पर अपने पिता से बात हुई थी। डॉक्टरों ने भी बताया था कि उनकी तबीयत सुधर रही है। अगले तीन चार दिनों में उन्हें छुट्टी मिल जाएगी। लतीफ ने बताया कि जिस दिन बिजली गुल हुई, वे अस्पताल के बाहर ही थे। वहां अफरा-तफरी मची थी।

अस्पताल से फोन आया कि अब्दुल रहीम की तबीयत ज्यादा बिगड़ने के कारण उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट करना पड़ेगा। लतीफ का कहना है कि उसी दौरान पिताजी की सांसे उखड़ गई थी लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इसे दबाने के लिए हमसे झूठ बोला था। हमें रात में 2 बजे बताया गया कि उनकी मौत हो गई है।

पीडब्ल्यूडी को बड़ी सर्जरी की जरूरत सारे मैदानी काम प्रभारियों के भरोसे
हमीदिया अस्पताल में बिजली गुल और उसके बाद जनरेटर सेट चालू नहीं होने से पीडब्ल्यूडी में चल रही प्रशासनिक लापरवाही उजागर कर दी है। भोपाल में हर डिविजन में सब इंजीनियरों को एसडीओ का काम दे रखा है। यह प्रभार देने में सीनियॉरिटी का भी ध्यान नहीं रखा गया है। यदि हमीदिया अस्पताल की ही बात की जाए तो यहां एसडीओ जतनलाल अहिरवार 2016 में सब इंजीनियर बने और अगले साल 2017 में उन्हें एसडीओ का प्रभार दे दिया। आईटीआई गोविंदपुरा भी अहिरवार के अधीन है, लेकिन वहां कोई सब इंजीनियर नहीं है। अहिरवार प्रोफेसर्स कॉलोनी में भी सब इंजीनियर हैं। हमीदिया अस्पताल के जिन एसई राकेश बर्वे को निलंबित किया है वे 9 साल से यहां हैं।

पांच जनरेटर के ऑपरेशन के लिए एक ही मैकेनिक
शुक्रवार की रात जो जनरेटर चालू नहीं हुआ, वह इस साल जून में ही स्थापित हुआ है। एक साल से कम की अवधि होने से इस जनरेटर सेट के मैंटेनेंस का जिम्मा तो स्थापित करने वाली कंपनी के पास ही होना चाहिए। लेकिन इस जनरेटर सेट सहित हमीदिया में स्थापित कुल पांच जनरेटर को ऑपरेट करने के लिए केवल एक ही मैकेनिक था। नियमानुसार हर जनरेटर सेट पर 24 घंटे अलग-अलग ऑपरेटर होना चाहिए। जिस कांट्रेक्टर के पास इनका मैंटेनेंस है वह एक ही कर्मचारी से सबका ऑपरेशन करा रहा है।

शहर में अन्य डिविजन में भी यही हाल… 74 बंगले में 2009 बैच के सब इंजीनियर राकेश बरगले एसडीओ बने हुए हैं। 74 बंगले के साथ तुलसी नगर के मकानों का मेंटेनेंस भी बरगले के पास है। इनके अलावा शहर में कम से कम 12 सब इंजीनियरों के पास एसडीओ का प्रभार है। शहर के सभी ईई मूल रूप से एसडीओ हैं।

सीधी बात- अरुणा कुमार, डीन, जीएमसी
जांच रिपोर्ट एक्सपर्ट डॉक्टर्स ने दी है उस पर कमेंट नहीं कर सकती

परिजनों का कहना है कि अब्दुल रहीम को कभी डायबिटीज नहीं रही, फिर जांच रिपोर्ट में कैसे डायबिटीज लिख दिया?
ये एक्सपर्ट डॉक्टर्स की रिपोर्ट है। मुझे देखना पड़ेगा। डॉ. शिखा मल्होत्रा, डॉ. लोकेंद्र दवे और सिमी दुबे तीनों ने ओपिनियन दी थी।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी डायबिटीज की दवा नहीं ली, फिर ऐसा कैसे हुआ? मैं चेक कराउंगी। रिपोर्ट एक्सपर्ट ने दी थी, हम उस पर तो अलग से कमेंट नहीं कर सकते।



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