स्कूल खुले पर रौनक गायब: पदमाराजे कन्या विद्यालय में 939 छात्राओं में से सिर्फ 139 स्कूल पहुंचीं, पूरे जिले का यही हाल

स्कूल खुले पर रौनक गायब: पदमाराजे कन्या विद्यालय में 939 छात्राओं में से सिर्फ 139 स्कूल पहुंचीं, पूरे जिले का यही हाल


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ग्वालियर37 मिनट पहले

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स्कूल गेट से अंदर आते ही थर्मल गन से बच्चों का तापमान जांचा गया।

  • 10वीं और 12वीं की कक्षा में 15 से 20 फीसदी छात्र पहले दिन स्कूल आए
  • साथ आए माता-पिता, देखी कोरोना से बचाव की व्यवस्था

जिले के सबसे बड़े कन्या विद्यालय में सिर्फ 15 फीसदी बच्चे ही शुक्रवार को स्कूल के पहले दिन पहुंचे। यही हाल पूरे जिले के स्कूलों में रहा है। कहीं भी 20 फीसदी से अधिक विद्यार्थी नहीं पहुंचे। स्कूल तो खुल गए हैं, लेकिन पहले की तरह रौनक नहीं दिखी। सभी स्कूलों में गेट पर ही सैनिटाइजर की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मास्क और सोशल डिस्टेंस का भी ख्याल रख जा रहा है। अभिभावक भी इंतजाम देखने स्कूल पहुंचे थे, पर शिक्षा विभाग को आशा है कि आने वाले दिनों में यह संख्या बढ़ेगी और अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजेंगे।

क्लास में सोशल डिस्टेंस के साथ पढ़ाई करतीं छात्राएं।

क्लास में सोशल डिस्टेंस के साथ पढ़ाई करतीं छात्राएं।

पहले दिन 15 से 20 फीसदी ही छात्र स्कूल पहुंचे

प्रदेश सरकार के निर्देश के बाद 10वीं और 12वीं की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार से स्कूल खुले हैं। पहला दिन होने के कारण बच्चे कम ही स्कूल पहुंचे। शहर के कुछ बड़े स्कूलों की चर्चा करें, तो सबसे बड़ा कन्या विद्यालय, पदमाराजे में 10वीं और 12वीं क्लास में कुल 939 छात्राएं हैं, लेकिन शुक्रवार को दोनों ही क्लास में छात्राओं की संख्य सिर्फ 139 दर्ज की गई। यह कुल छात्रों की संख्या का महज 15 फीसदी है। इनमें 10वीं में 63 और 12वीं में 76 बच्चे स्कूल आए। यही हाल गोरखी स्कूल का भी रहा। यहां 11 बजे स्कूल का समय था, लेकिन 12 बजे तक कई क्लास में 10 से 15 बच्चे ही बैठे नजर आए। करीब 9 माह बाद कोविड के संकट से उबरते हुए सरकार ने स्कूल खोलने का निर्णय तो लिया, लेकिन अभी अभिभावकों का विश्वास नहीं जीत पाए हैं। पहले दिन हुई पैरेंट्स टीचर मीटिंग में अभिभावकों को टीचरों ने कहा कि बिना घबराए बच्चों को स्कूल भेजें, पर अभिभावक डरे नजर आए।

सैनिटाइजर से लेकर मास्क तक पूरे इंतजाम

स्कूलों में गेट पर ही हाथों को सैनिटाइज किया जा रहा था। इसके अलावा क्लास में बेंच से लेकर कुर्सियाें तक को सैनिटाइज किया गया था। बिना मास्क स्कूल में प्रवेश नहीं था। जो बच्चे बिना मास्क आए उनको स्कूल प्रबंधन ने मास्क दिए। साथ ही, सोशल डिस्टेंस के लिए गोले बनाए गए थे। इसके अलावा गेट पर ही तापमान चेक करने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था।



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