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रमेश राजपूत | रानी बड़ाैद/शाजापुर10 मिनट पहले
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ये तस्वीर आपको विचलित कर सकती है, लेकिन घटना की गंभीरता और माता-पिता की अमानवीय हरकत को सामने लाने के लिए प्रकाशन जरूरी है
- दुपट्टे में लगी आग से 60% झुलसी 10 साल की बच्ची
जिले के रानी बड़ाैद गांव में देशी इलाज के चक्कर में पड़े माता-पिता की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया। 22 दिनों पहले चूल्हे के पास खड़ी 10 वर्षीय बच्ची के दुपट्टे में आग लगने से उसका 60 प्रतिशत हिस्सा जल गया। इसके बाद भी माता-पिता उसे इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले गए।
शरीर के जले हुए अंगों के घाव से निकलता मवाद बदबू देने लगा तो पड़ाेसियों ने पुलिस को सूचना दी। अकोदिया थाना टीआई ए.के. शेषा ने तुरंत मौके पर पहुंचकर घायल बच्ची को भोपाल रैफर कर इलाज शुरू करवाया। दरअसल गांव के जागरूक युवाओं को जब पता चला कि 26 नवंबर को बच्ची जल गई थी और उसका इलाज घर पर ही किया जा रहा है। युवाओं की टोली पुलिस को सूचना देकर बच्ची के घर पहुंच गए। यहां एक कमरे में लगे पलंग पर जली हुई पड़ी 10 वर्षीय बच्ची दर्द से चीख भी नहीं पा रही थी, 60 प्रतिशत जले हुए शरीर के अंगों से आ रही बदबू भी असहनीय थी। इसके बाद भी माता-पिता ने बच्ची का इलाज कराने अस्पताल नहीं भेजा। टीआई शेषा के अनुसार गांव के ताराचंद धनगर को समझाइश दी गई और एम्बुलेंस 108 से बालिका को लेकर शुजालपुर पहुंची, जहां से उसे भोपाल रैफर किया गया।
रुपए खर्च न हो, इसलिए घर में ही पटक रखा
बच्ची के दर्द की कहानी सामने आने के बाद एक ओर चाैंकाने वाली बात यह सामने आई कि ताराचंद धनगर सक्षम परिवार से है। इसके पास लगभग 15 से 20 बीघा सिंचित जमीन है, उसने आग से जल चुकी अपनी बेटी को 22 दिन तक पैसे खर्च न करने के चक्कर में घर में ही पटककर रखा। गांव के कुछ लोग जब उनकी बालिका को देखने पहुंचे तो उन्होंने अस्पताल में इलाज नहीं कराने के लिए तर्क दिया कि शासकीय अस्पताल में ऐसे ही पटककर रखते हैं। प्राइवेट हॉस्पिटल में 10 हजार रुपए रोज का खर्च में कहां से लाऊं, मैं देशी दवाई लाया हूं और उससे मेरी बालिका ठीक हो जाएगी।