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ग्वालियरएक दिन पहले
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फाइल फोटो
- 1.25 लाख परिवारों का आया 3.07 करोड़ का राशन बाजार में बेचा गया
लॉकडाउन में गरीबों के लिए भेजे गए 3.07 करोड़ रुपए के राशन को ट्रांसपोर्टर मुन्नालाल अग्रवाल और राहुल अग्रवाल ने बाजार में बेच दिया। यह राशन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत आवंटित किया गया था। शहर के तीन सेक्टर में रहने वाले 1.25 लाख परिवारों के लिए यह राशन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत जारी हुआ था, जिसका एक दाना भी जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचा।
यह खुलासा नागरिक आपूर्ति निगम के भोपाल में पदस्थ एक अफसर की जांच में हुआ। तब आनन-फानन में ट्रांसपोर्टर पर ग्वालियर के अफसरों ने एफआईआर कराई। मार्च से लेकर नवंबर तक पूरे नौ महीने ट्रांसपोर्टर बाजार में राशन बेचता रहा, लेकिन किसी को भनक नहीं लगी। गरीबों के हक के राशन की कालाबाजारी करने वाले ट्रांसपोर्टर पर अब रासुका लगाने की तैयारी है। इसे लेकर पुलिस कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह को प्रस्ताव भेजेगी। वहीं सरकारी धान को अवैध तरीके से लगाकर गड़बड़ी करने वाले ट्रांसपोर्टर कृष्णपाल सिंह कंसाना पर भी रासुका लगाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
सरकारी राशन का घोटाला करने वाले इन आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। नौ महीने तक ट्रांसपोर्टर यह घोटाला करता रहा, इससे खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों की सक्रियता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि कंट्रोल की दुकानों से पात्र लोगों को राशन पहुंच रहा है या नहीं इसकी निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य विभाग की है।
समझिए…कौन-सा राशन बाजार में बेचा गया और गरीबों को किस तरह ठगा गया
- दरअसल मार्च में लॉकडाउन लगते ही सारे काम ठप्प पड़ गए। सबसे ज्यादा परेशान गरीब थे। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को मुफ्त में राशन देने की घोषणा की। पहले मार्च से लेकर जुलाई तक का राशन देने की घोषणा हुई थी। इसके बाद इसे नवंबर तक बढ़ा दिया गया। इस तरह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत जितने पात्र परिवारों को राशन का आवंटन आता है, उतना ही आवंटन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत आया। यह पूरा आवंटन ऑफलाइन हुआ।
- ट्रांसपोर्टर मुन्नालाल अग्रवाल और राहुल अग्रवाल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आए राशन को तो कंट्रोल की दुकानों तक पहुंचा दिया। लेकिन प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत आए राशन को कंट्रोल की दुकानों तक नहीं पहुंचाया गया। जब जून में हंगामा हुआ तो कुछ दुकानों तक राशन पहुंचा दिया। फिर हर बाद अगले महीने की बात कहकर दुकानदारों को टरकाया गया।
- पात्र परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला राशन मिल रहा था, कई लोगों को तो मुफ्त राशन के बारे में जानकारी ही नहीं है। कुछ दुकानदार ट्रांसपोर्टर से मिल गए। वहीं कुछ दुकानदारों ने अधिकारियों से शिकायत करना शुरू कर दी।
ऐसे खुला मामला: जिन दुकानों तक राशन नहीं पहुंचा, उन दुकानों के संचालकों ने खाद्य विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों से शिकायत की। पहले शिकायत को दबा दिया गया। किसी ने भोपाल में नागरिक आपूर्ति निगम के अफसरों तक शिकायत पहुंचा दी। निगम के एमडी तक शिकायत पहुंची। उन्होंने जांच डिप्टी कलेक्टर हरेंद्र सिंह को सौंपी। जब उन्हाेंने जांच की तो खुलासा हुआ कि ट्रांसपोर्टर ने 3.07 करोड़ रुपए का राशन बाजार में बेच दिया।
सबका हिस्सा तय
ट्रांसपोर्टर: नागरिक आपूर्ति निगम के गोदाम से राशन उठाकर दुकानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी होती है। इसी में से राशन चोरी कर ट्रांसपोर्टर बाजार में बेचता है। वह गेहूं 1400 रुपए प्रति क्विंटल तक बाजार में बेचता है। जिन ट्रांसपोर्टर पर कार्रवाई हुई, उन पर तीन सेक्टर हैं।
दुकानदार: दुकानदार और ट्रांसपोर्टर के बीच जितने में सौदा तय हो जाता है, उस हिसाब से राशन का भुगतान दुकानदार को मिलता है। औसतन 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलता है।
खाद्य विभाग: दुकानों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी खाद्य विभाग के अफसरों की है। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बिना अफसरों की मौन स्वीकृति से ट्रांसपोर्टर माल बेच ही नहीं सकता।
रासुका के लिए प्रस्ताव भेजेंगे
गरीबों के लिए आए राशन को बाजार में बेचने वाले ट्रांसपोर्टर और सरकारी धान अवैध तरीके से निकालने वालों पर रासुका के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। घोटाले में जो भी शामिल हैं, उन्हें सामने लाएंगे। इसकी बारीकी से जांच कराई जा रही है। -अमित सांघी, एसपी
सारे दस्तावेज मंगवाए हैं
राशन घोटाला करने वाले ट्रांसपोर्टर के मामले की पूरी जानकारी पुलिस से लूंगा। सारे दस्तावेज मैंने मंगवाए हैं। इसके बाद रासुका को लेकर निर्णय किया जाएगा।
-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर