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सागर9 मिनट पहले
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घर में कैद बुजुर्ग दंपती।
- चारों ओर तार फेंसिंग कर तैनात कर दिया चौकीदार, आने जाने को लेनी पड़ती है अनुमति
32 वर्ष पहले शासन से मिली जमीन पर बगिया लगाकर रह रहे बुजुर्ग दंपती को वन विभाग ने खाली करने का फरमान जारी कर दिया है। वन विभाग ने उसकी जमीन के इर्द गिर्द तार फैंसिंग कर चौकीदार तैनात कर रखा है। ऐसे में बुजुर्ग दंपती कैदियों सी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। छतरपुर के लवकुशनगर तहसील के ग्राम बम्हौरी पुरवा में 70 वर्षीय बुजुर्ग बच्चीलाल कुशवाहा और उनकी वृद्ध पत्नी जगिया खेत एवं बगिया पर कच्चा घर बनाकर गुजर बसर कर रहे हैं।
बच्चीलाल को 1978 में बम्हौरी पुरवा मौजा में खसरा नंबर 1135/ 43 में कृषि भूमि राजस्व एवं वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान की गई थी। उन्हें 2 हेक्टेयर भूमि दी गई थी। इस ऊबड़ खाबड़, अनुपजाऊ जमीन को बच्चीलाल ने अपनी मेहनत से उपजाऊ बनाया। वहीं पर अपना कच्चा घर बनाकर परिवार के साथ रहने लगा। बच्ची लाल के दो बेटे हैं, वह दोनों दिल्ली में मजदूरी करते हैं। इसके बाद राजस्व विभाग ने 6 जनवरी 91 को न्यायालय अधीक्षक भू-अभिलेख छतरपुर सीलिंग प्रभारी अलॉटमेंट अधिकारी, वन व्यवस्थापन योजना के साथ बच्चीलाल को भूमि स्वामी का पट्टा प्रदान किया था।
बच्चीलाल ने शासन से ऋण लेकर इस जमीन पर कुआं खोदा, डीजल पंप लेकर यहां एक बगीचा लगाया। कुछ मवेशी भी उन्होंने यहां पाल रखे हैं। बच्ची लाल का परिवार गुजर बसर कर रहा था। यह जमीन बच्चीलाल के नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज है।
बीते वर्ष 2019 में बम्हौरी पुरवा क्षेत्र में वन विभाग ने 60 हेक्टेयर में बांस पौधरोपण करवाया। इस 60 हेक्टेयर के बीच बच्चीलाल की जमीन भी फंस गई। वन अमले ने कार्य के दौरान बुजुर्ग बच्चीलाल को जमीन वन विभाग की होने पर खाली करने को कहा। वन विभाग का बांस पौधरोपण जारी है, पौधे तैयार है और तार फेंसिंग करके गेट भी लगा दिया गया है।
वन विभाग ने गेट पर एक चौकीदार तैनात कर रखा है। बुजुर्ग दंपती इस चार दीवारी के अंदर कैदी की तरह रह रहे हैं। उनका कोई रिश्तेदार आता है तो बड़ी मुश्किल से अंदर जाने को मिलता है। वहीं रात में चौकीदार गेट पर ताला डालकर चला जाता है, जिससे बुजुर्ग दंपती बाहर नहीं निकल सकते। न ही वह देर रात इसके अंदर आ सकते हैं।
कोर्ट के फैसले पर टिकी बूढ़ी नजरें
पीड़ित बच्चीलाल ने अधिकारियों को अपनी समस्या सुनाई, लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। जब अधिकारियों ने नहीं सुनी तो बच्चीलाल ने व्यवहार न्यायालय लवकुशनगर में मामला दर्ज कराया। जहां मामला विचाराधीन है। अब इस बुजुर्ग दंपत्ति को न्यायालय के फैसले का इंतजार है, लेकिन तब तक यह कैदियों की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। छतरपुर एसडीएम प्रेम सिंह चौहान ने मामले को संज्ञान में लिया है, उनका कहना है कि अधिकारियों से बात करके बुजुर्ग दंपती को आने-जाने के लिए रास्ता दिलवाने प्रयास करेंगे।