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- First Church Of Bhopal: Begum Sikandar Jahan Granted Permission, Princess Isabel Got The Construction Done
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भोपालएक घंटा पहलेलेखक: राजेश गाबा
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भोपाल का पहला चर्च जहांगीराबाद का सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च।
- 1875 में बना था भोपाल के जहांगीराबाद का सेंट फ्रांसिस असिसि कैथड्रल चर्च
- चर्च को आर्च डायसिस का दर्जा, क्रिसमस के लिए खूबसूरती से सजाया गया
राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद के जिंसी चौराहा के पास है भोपाल का सबसे पुराना चर्च। सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च 145 साल पहले 1875 में बना था। चर्च बनाने की अनुमति रियासत भोपाल की आठवीं शासिका सिकंदरजहां बेगम ने दी। राजकुमारी इसाबेला ने इसे बनवाया।
चर्च के संस्थापक बरबन परिवार के वर्तमान मुखिया बल्थजर बरबन ने बताया पूर्वज 1700 में अकबर के शासनकाल के समय दिल्ली आए। 1800 में उनके परिवार के लोग ग्वालियर और फिर भोपाल आए। तत्कालीन नवाबी रियासत के दौर में विभिन्न बड़े पदों पर रहे। जहांगीराबाद क्षेत्र में उनके पूर्वजों ने जिनमें राजकुमारी इसाबेला ने नवाब परिवार की बेगम से भूमि क्रय कर चर्च का निर्माण शुरू कराया। नवाब काल में ब्रिटिश सैन्य छावनी सीहोर में थी और वहां से ब्रिटिश अफसर प्रार्थना करने आते थे। इमारत में ऑल्टर के ठीक सामने राजकुमारी इसाबेला की कब्र है।
जहांगीराबाद में जिंसी चौराहे के पास एक बड़ा सा प्रवेश द्वार प्रभु यीशु के जीवन की झलकियां दिखाता है। अगर आप अध्यात्म पसंद व्यक्तित्व के हैं, तो आपको एक सुकून की अनुभूति होगी। कुछ ऐसी ही आभा है सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च की। भोपाल शहर में कैथोलिक ईसाई समुदाय का यह पहला चर्च है। इसे पोप जॉन पॉल चतुर्थ ने आर्च डायसिस का दर्जा प्रदान किया है। 145 वर्ष पुराना यह चर्च आज भी अपनी ऐतिहासिक गौरव गाथा को बयां करता है। जितना अद्भुत यह चर्च है, इसका इतिहास भी उतना ही अनूठा है। 1875 में बने इस चर्च को शहर के सबसे पुराने चर्च का दर्जा प्राप्त है।
चर्च का निर्माण
सिकंदरजहां बेगम ने दी थी जमीन
कहते हैं कि नवाब शासन काल के दौरान इसे बनाया गया था। कहा तो ये भी जाता है कि बोरबोन परिवार से इस चर्च का पुराना नाता है। बोरबोन परिवार के पूर्वज मूल रूप से फ्रांस के निवासी थे। इस चर्च को बनाने की अनुमति रियासत भोपाल की 8वीं शासिका सिकंदरजहां बेगम द्वारा दी गई थी। राजकुमारी इसाबेला ने 4 अक्टूबर 1873 को चर्च बनाने का काम शुरू करवाया था। इसके लिए उन्होंने जमीन दान में दी थी। पहले 10 बीघा जमीन में से 3 बीघा और उसके बाद 7 बिश्वा में से 1 बिश्वा हिस्सा दिया था। भोपाल नवाब नजीर उल्हा मोहम्मद खान के दरबार में शाहजाद मसीह प्रधानमंत्री थे।
शाहजाद का असली नाम बाल्थाजार बोरबोन है। इनकी पत्नी का नाम इसाबेला एलिजाबेथ बोरबोन था। इन्हें दुल्हन साहिबा के नाम से भी जाना जाता है। 1875 में यह बनकर तैयार हो पाया था। 24 अक्टूबर 1875 को आगरा के विकार ऐपेस्टोलिक, डॉ. पॉल जोसी ओएफएम, फादर रफेल, फादर नोबर्ट, तत्कालीन बेगम और बोरबोन परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में चर्च का उद्घाटन हुआ था।

चर्च के अंदर मौजूद है राजकुमारी इसाबेला की कब्र।
इसाबेला की कब्र भी मौजूद
चर्च की इमारत के अंदर ऑल्टर के ठीक सामने राजकुमारी इसाबेला की कब्र है। इसके अलावा बोरबोन परिवार के कुछ और सदस्यों की कब्र भी यहां पर मौजूद है 1963 में चर्च का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद इसे कैथेड्रल (महा चर्च) का दर्जा दिया गया।
अफसर भी आते थे प्रार्थना करने
कहा जाता है कि नवाब काल में ब्रिटिश सैन्य छावनी सीहोर में थी। ऐसे में वहां के कई अफसर भी इस चर्च में प्रार्थना करने आते थे।

सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च में वह स्थान जहां प्रेयर होती है।
सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च की खास बातें
- इस चर्च के निर्माण की अनुमति रियासत भोपाल की 8वीं बेगम सिकंदरजहां द्वारा दी गई थी।
- राजकुमारी इसाबेला ने 4 अक्टूबर 1873 को चर्च बनाने का काम शुरू करवाया था।
- वर्ष 1875 में चर्च बनकर तैयार हो गया।
- 1963 में चर्च का जीर्णोद्धार किया गया। इसके बाद इसे कैथेड्रल (महा चर्च) का दर्जा दिया गया।
- नवाब काल में ब्रिटिश सैन्य छावनी सीहोर में थी। वहां के कई अफसर भी इस चर्च में प्रार्थना करने आते थे।
सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च की विशेषताएं
- खिड़कियां और रोशनदान इस तरह बनाए गए हैं कि सूर्य की रोशनी इसमें हर तरफ से आती है।
- यहां एक बार में लगभग 500 लोग प्रार्थना सभा में शामिल हो सकते हैं। उनके बैठने के लिए लकड़ी की बैंच रखी गई हैं। चर्च के परिसर में एक छोटा-सा फव्वारा लगा है।
- वर्ष 2012-13 इस चर्च के आर्च डायसिस बनने का गोल्डन जुबली ईयर था। इसमें शामिल होने कई जगह से बिशप, प्रीस्ट, सिस्टर्स और ईसाई धर्मावलंबी आए थे।