पिता ने पटक-पटक कर मासूम की हालत दयनीय बना दी है. (प्रतीकात्मक फोटो)
एम्स में सागर की बच्ची का इलाज हो रहा है. बात जब तक इलाज की थी, तब तक ठीक था. लेकिन, पता चला कि उसके पिता ने उसे इतना टॉर्चर किया है कि वह मन से भी घायल हो गई है. चाइल्ड लाइन ने मामला अपने हाथ में ले लिया है.
- News18Hindi
- Last Updated:
December 24, 2020, 11:21 AM IST
चाइल्ड लाइन को कुछ दिनों पहले जानकारी मिली कि एक बच्ची दर्दभरी हालत में इलाज कराने आई है. जांच में पता चला कि चार माह की मासूम बच्ची को इंजेक्शन का टीका लगता था तो वो रोती थी. इस बात पर उसका पिता इतना नाराज हो जाता था कि उसे बिस्तर पर जोर से पटकता था. बच्ची के हाथ-पैर और नाक सहित कई जगह फ्रैक्चर हैं. एक पैर में ऐसा जख्म है जैसे किसी ने चाकू से काटा हो. एम्स के मुताबिक, बच्ची की हड्डियां अलग-अलग समय पर टूटी हैं. सर्वाइकल कंडीशन ठीक है. हड्डियां अपने आप जुड़ रही हैं. बड़े होने पर हाथ पैर विकृत होने की आशंका
बरगलाता रहा पिता, भटकाता रहा जांच
जांच के दौरान किए गए सवालों पर युवक ने चाइल्ड लाइन को बरगलाने की जमकर कोशिश की. चाइल्ड लाइन के मुताबिक, जिस दंपति की बच्ची है, वह सागर के हैं. दोनों अलग-अलग धर्म के हैं. पिता ने बताया कि बच्ची को पहला टीका प्राइवेट हॉस्पिटल में लगवाया, जिससे बच्ची को दिक्कत नहीं हुई. दूसरा और तीसरा डीपीटी का टीका सरकारी हॉस्पिटल में लगवाया, जिससे व चीख-चीख कर रोती थी. इस दौरान एक बार उसके हाथ से बच्ची बिस्तर पर गिर गई थी. उसे समझ ही नहीं आया कि टीके से बच्ची को रिएक्शन हुआ. उसके पैर में सूजन रहने लगी. पिता का कहना है कि एक दिन जब वह बच्ची का पैर हिला रहा था अचानक उसका पैर फट गया और खून निकलने लगा. इसके बाद सागर के हॉस्पिटल से एम्स भोपाल रिफर किया गया. एम्स के डॉक्टर ने बताया कि पैर का घाव चमड़ी फटकर ब्लड निकलने के कारण नहीं बना, बल्कि उसे कट लगा है.उचित धाराएं लगाकर कार्यवाही की अपील
चाइल्ड लाइन डायरेक्टर अर्चना सहाय ने बताया कि बच्ची के पिता ने उसे बिस्तर पर पटकने की बात स्वीकार की है. इसके आधार पर उचित धाराएं लगाकर कार्यवाही के लिए कहा है. वहीं. सीडब्ल्यूसी के सदस्य डॉ. कृपाशंकर चौबे ने कहा है कि बच्ची का स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता है. लगातार डॉक्टर्स से संपर्क कर जानकारी लेते रहेंगे. मामले में पुलिस को जांच करके प्रतिवेदन देने के लिए कहा है.