अपने इम्तिहान के विरोध में गुरुजी: शिक्षक बोले- मरीज की मौत पर डाॅक्टर और पुल टूटने पर इंजीनियर की परीक्षा नहीं तो बच्चे फेल होने पर हमारी क्यों?

अपने इम्तिहान के विरोध में गुरुजी: शिक्षक बोले- मरीज की मौत पर डाॅक्टर और पुल टूटने पर इंजीनियर की परीक्षा नहीं तो बच्चे फेल होने पर हमारी क्यों?


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भिंड37 मिनट पहले

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  • शिक्षकों ने बैठक कर बनाई दक्षता परीक्षा के बहिष्कार की रणनीति
  • तारीख आगे बढ़ी, अब 3 और 4 जनवरी को होगी दक्षता परीक्षा

जिले के शिक्षक दक्षता परीक्षा के विरोध लामबंद हो गए हैं। इन शिक्षकाें का का कहना है कि काेराेना काल में जब स्कूलाें में नियमित कक्षाएं ही नहीं लग पाईं तो फिर शिक्षकों की परीक्षा क्याें ली जा रही है? यह परीक्षा भी निरस्त होना चाहिए। शुक्रवार को गौरी सरोवर के किनारे पार्क में आयोजित बैठक में शिक्षकों ने दक्षता परीक्षा लेने के शासन के निर्णय के खिलाफ रणनीति पर चर्चा की।

बैठक में शिक्षकों ने यह भी कहा कि शिक्षकों का कहना है कि सरकार दक्षता परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों का अपमान कर रही है। जब मरीज के मरने पर डाॅक्टर या पुल टूटने पर इंजीनियर की परीक्षा नहीं ली जाती तो कुछ बच्चों के फेल होने पर शिक्षकों की परीक्षा क्यों ली जा रही है।

दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं में 40 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले स्कूलों के विषय शिक्षक और कैचमेंट के माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों की दक्षता परीक्षा ली जा रही है। इसी परीक्षा का शिक्षक विरोध कर रहे हैं। सत्र 2019-20 में 12वीं का भिंड जिले का रिजल्ट प्रदेश में सबसे कम महज 37.45 प्रतिशत रहा था।

ऐसे में रिजल्ट सुधारने के उद्देश्य से इन स्कूलों के शिक्षकों की दक्षता परीक्षा ली जा रही है। यह परीक्षा बीते वर्ष भी हुई थी, तब पूरे प्रदेश में 16 शिक्षकों को पास न होने पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। इस बार शिक्षक इस परीक्षा का विरोध कर रहे हैं, जिसके चलते गुरुवार को शिक्षकों ने बैठक कर इस परीक्षा का बहिष्कार करने की रणनीति बनाई।

परीक्षा की तारीख 6 दिन आगे बढ़ी
दक्षता परीक्षा को लेकर एक ओर जहां शिक्षक विरोध कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर लोक शिक्षण संचालनालय ने दक्षता परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। पहले यह परीक्षा 27 और 28 दिसंबर को होनी थी, लेकिन अब यह 3 और 4 जनवरी को आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के लिए जिले के 526 शिक्षक चिह्नित किए गए हैं। इनकी संख्या अभी और बढ़ने की संभावना है।

पहले सरकार विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति करे, तब सुधरेगा रिजल्ट
सरकार को यदि रिजल्ट सुधारना है तो पहले विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति करे। एक शाला एक परिसर होने से प्राइमरी के शिक्षक हाईस्कूल के बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में अच्छे रिजल्ट की उम्मीद कहां से की जा सकती है। बैठक में शैलेंद्र त्रिपाठी, इंद्रपाल सिंह कुशवाह, अशोक चौहान, राजीव शर्मा, गगन शर्मा, प्रवेंद्र शर्मा, अश्वनी तिवारी, आभा दीक्षित, ऊषा दीक्षित, दीपचंद्र जैन, जेपी शर्मा, मनीष मिश्रा, संतोष यादव, धीरज शुक्ला, महिपत सिंह आदि शिक्षक मौजूद रहे।

2018-19 में 12 स्कूलों का खराब रिजल्ट, प्राचार्यों को नोटिस दिए गए थे, फिर भी इस बार दो और बढ़ गए
जिले में 176 शासकीय हायर सेकंडरी और हाईस्कूल हैं। इनमें वर्ष 2018-19 की परीक्षा में 76 हायर सेकंडरी स्कूलों में से 12 स्कूलों का रिजल्ट 30 प्रतिशत से कम था। इसी प्रकार 106 में से 23 हाईस्कूल का परिणाम 0 से 30 प्रतिशत तक रहा था। पिछले वर्ष भी खराब परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूल के 35 प्राचार्यों को नोटिस जारी किए गए थे। साथ ही इन सभी से शिक्षा अधिकारियों ने वन टू वन चर्चा भी की थी। बावजूद इसके इस बार इन स्कूलों की संख्या घटने के बजाय बढ़ गई।

पिछले वर्ष 30 प्रतिशत से कम वाले लिए थे शिक्षक, इस बार पैमाना किया 40 फीसदी किया
बैठक में मौजूद शिक्षकों का कहना था कि पिछले साल 30 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले विद्यालयों के शिक्षकों की दक्षता परीक्षा ली गई थी, लेकिन इस बार पैमाना बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया, जो गलत है। इसी प्रकार इस बार हाईस्कूल में जिस विषय का परीक्षा परिणाम अच्छा रहा है, उस विषय के माध्यमिक शिक्षकों की दक्षता परीक्षा ली जा रही है। बैठक में आजाद अध्यापक संघ, न्यू मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन संघ के तमाम लोग मौजूद रहे।

इसलिए सता रहा डर

शिक्षकों को दक्षता परीक्षा का डर इसलिए ज्यादा सता रहा है क्यांेकि परीक्षा में फेल होने वाले शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की बात कही जा रही है, उन्हें डर है कि कहीं फेल हो गए तो रिटायर होना पड़ेगा।



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