प्रदेश में वायु प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है. (सांकेतिक चित्र)
वायु प्रदूषण कितना खतरनाक हो सकता है इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि पिछले साल इससे एक लाख से ज्यादा मौतें प्रदेश में हुईं, वह भी असमय. मेडिकल रिसर्च जनरल लैसेंट में प्रकाशित आईसीएमआर की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.
- News18Hindi
- Last Updated:
December 26, 2020, 7:22 AM IST
मेडिकल रिसर्च जनरल लैसेंट में प्रकाशित आईसीएमआर की डेथ बर्डन रिपोर्ट 2019 सामने आई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि वायु प्रदूषण के कारण राज्यों की अर्थव्यवस्था कितनी चरमराई है, साथ ही लोगों के स्वास्थ्य को कितना नुकसान हुआ है. इसमें बताया गया है कि लोगों की अचानक और बेवक्त हुई मौतों पर राज्य सरकार ने जो खर्च किया है उससे ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीएसडीपी) को कितना नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश की जीएसडीपी को 1449 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है.
दावा- घर का प्रदूषण बाहर से ज्यादा खतरनाक
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमारे घर का प्रदूषण बाहर के प्रदूषण से ज्यादा खतरनाक है. कच्चे मकान, झुग्गी बस्ती, बिना वेंटिलेशन वाले खराब इंफ्रास्ट्रक्चर के मकानों में पैदा होने वाला वायु प्रदूषण उसमें रहने वालों को पूरी तरह बीमार कर देता है. प्रदेश में काफी बड़े इलाके में अब भी ठोस ईंधन जैसे कोयला, लकड़ी, गोबर के कंडे, चारकोल, फसलों की नरवाई जलाने से हाउसहोल्ड प्रदूषण पैदा होता है.वायु प्रदूषण से कैंसर, हार्ट, डायबिटीज का खतरा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरमेंटल हेल्थ (निरेह) भोपाल के डॉ. योगेश साबदे आईसीएमआर की स्टडी में शामिल थे. उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण से लोअर रेस्पिरेटरी इंन्फेक्शन, फेंफड़ों का कैंसर, हार्ट डिसीज, स्ट्रोक और टाइप-2 डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमरियां होती हैं. प्रदेश में एम्बिएंट एयर पॉल्युशन लगातार बढ़ रहा है.