ड्रग का दलदल: फार्मा कारोबारी वेदप्रकाश शहर के युवाओं को नशे का आदी बना रहा, अपने बेटे को शिकागो में पढ़ा रहा

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इंदौर5 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक फोटो

  • क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम 20 दिन से कर रही थी निगरानी, तब पकड़ में आया रैकेट

शहर में 70 करोड़ की जो एमडी एमए ड्रग्स पकड़ाई है। उसके पांचों आरोपी संगठित गिरोह के अब तक के सबसे बड़े तस्कर निकले हैं। एडीजी योगेश देशमुख ने बताया कि काफी समय से दिनेश अग्रवाल को लेकर सूचना मिल रही थी कि वह एमडी एमए ड्रग्स का कारोबार कर रहा है। इस पर 20 दिन से क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम निगरानी कर रही थी। इस दौरान उसके गरोठ (मंदसौर) में एक कनेक्शन की बात पता चली। एक-एक कड़ियां जोड़ीं तो खुलासा हुआ कि ये हैदराबाद की फार्मा कंपनी में एमडी एमए (सिंथेटिक ड्रग्स) तैयार करवाकर सड़क और रेलवे कार्गो के माध्यम से इंदौर, आगर-मालवा, निमाड़ अंचल और राजस्थान में सप्लाय कर रहे हैं।

हैदराबाद में इसे वेदप्रकाश व्यास से तैयार करवाया। पुलिस ने दिनेश, अक्षय और चिमन को निगरानी में ले लिया। इनसे पूछताछ की तो पता चला कि ड्रग्स हैदाराबाद से वेदप्रकाश सप्लाय करता है। पुलिस ने उनसे माल बुलवाने को कहा तो वे बोले कि हमारा माल आने ही वाला है। उधर, वेदप्रकाश हैदराबाद से सियाज कार से ड्राइवर मांगी को लेकर निकला। ड्रग्स बोरियों में भरकर डिक्की में रखी। वह मंगलवार सुबह 8.30 बजे जैसे ही सनावदिया पहुंचा, पुलिस टीम ने दबिश देकर पांचों को गिरफ्तार कर लिया।

ड्रग्स को लेकर देश में अब तक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई
एमआर रहते शुरू कर दी थी ड्रग्स सप्लाय लालच में टेंट कारोबारी भी इससे जुड़ गए

वेदप्रकाश ने मंदसौर में एमआर रहते हुए एमडी ड्रग्स की तस्करी शुरू कर दी थी। इसमें काफी रुपए मिलने पर चिमन और दिनेश अग्रवाल भी इससे जुड़ गए थे। बाद में उसने एक नामी फार्मा कंपनी में भी नौकरी की। फिर वह हैदराबाद शिफ्ट हुआ और यहां खुद की फार्मा कंपनी एरिस्टॉन फार्मा नोवाटेक प्राइवेट लिमिटेड खोल ली। इसी की आड़ में वह एमडी ड्रग्स तैयार करने लगा। इतनी बड़ी मात्रा में एमडी ड्रग्स सप्लाय करने वाले हैदराबाद का फार्मा कारोबारी आरोपी वेदप्रकाश व्यास इंदौर के युवाओं को ड्रग्स का आदी बनाकर कर उन्हें बर्बाद कर रहा था। वहीं वह अपने बेटे की पढ़ाई अमेरिका के शिकागो में करा रहा है। बेटा सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। पुलिस उसके परिवार के अन्य सदस्यों की जानकारी भी जुटा रही है।

एमडी एमए ड्रग्स 80 % डेंसिटी की क्वालिटी वाली
आईजी मिश्र ने बताया कि पकड़ाई एमडी एमए ड्रग्स 80 प्रतिशत डेंसिटी की क्वालिटी वाली है। इसे एक लैब में टेस्ट करवाया है। ड्रग्स पैडलर्स व तस्कर इसे कई ग्रामों में खरीदकर उसे दोगुना एमडी मिलावट कर बना लेते हैं और उससे भी मुनाफा कमाते हैं।

अब तक देश में मुंबई पुलिस ने 2018 में सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 से 20 किलो के बीच एमडी एमए ड्रग्स पकड़ी थी। अब पुलिस का दावा है कि इंदौर में उससे भी बड़ी कार्रवाई हुई है।

चेकिंग होती तो मेडिकल कार्ड दिखाकर कर देता था गुमराह
आरोपी वेदप्रकाश ने अपने मेडिकल करियर में कई बड़े पदों पर रहने के बाद खुद को मेडिकल एक्सपर्ट के रूप में दर्शाकर मेडिकल कार्ड बनवा रखे थे। दिनेश अग्रवाल के आर्डर पर ही ये अपनी फैक्ट्री में एमडी एम ड्रग्स की इतनी बड़ी खेप तैयार कर अपनी ही कार(टीए 08 एफई 5312) से ड्राइवर मांगी व्यंकटेश को लेकर इंदौर आ गया था। कई बार चेकिंग में कोई रोकता भी था तो वह मेडिसिन बताकर उनसे अपने कार्ड से ही गुमराह कर देता था। इसकी कंपनी का टर्नओवर भी 60 करोड़ से ऊपर का बताया जा रहा है। आरोपियों को रिमांड पर लेकर आगे की कार्रवाई पुलिस जांच कर रही है।

ड्रग पैडलर्स की लिंक में बंद बार के संचालकों ने कहा-महिला होने के कारण जांच नहीं की
इंदौर |
ड्रग पैडलर्स से लिंक मिलने पर आबकारी विभाग ने कुछ बार को बंद कराते हुए 4 जनवरी तक जवाब देने का समय दिया था। सभी संचालकों ने जवाब दिया है कि कुछ महिलाएं आती थीं और महिला होने के नाते हमने इनकी जांच नहीं की। सहायक आयुक्त आबकारी राजनारायण सोनी ने कहा कि बार संचालकों के जवाब आ गए हैं। इनका परीक्षण किया जा रहा है।

पुलिस से मिली जानकारी और संचालकों के जवाब को देखते हुए आगे कलेक्टर द्वारा इस पर फैसला लिया जाएगा। उधर बार, पब संचालकों को नई समस्या आ रही है कि आबकारी विभाग की टीम लगातार इन जगहों पर जाकर जांच कर रही है और मौके के वीडियो बना रही है। ऐसे में वहां बैठे ग्राहकों द्वारा इस पर आपत्ति ली जा रही है और कई बार तो वह बिना भोजन किए ही वहां से चले जाते हैं। संचालकों ने इस संबंध में भी गाइडलाइन बनाने की मांग की है।



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