केन-बेतवा लिंक परियोजना: MP-UP पानी बंटवारे को लेकर बैठक, शिवराज ने मजूबती से रखा MP का पक्ष, शेखावत बोले- जल्दी शुभ समाचार देंगे

केन-बेतवा लिंक परियोजना: MP-UP पानी बंटवारे को लेकर बैठक, शिवराज ने मजूबती से रखा MP का पक्ष, शेखावत बोले- जल्दी शुभ समाचार देंगे


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भोपाल15 मिनट पहले

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केन-बेतवा लिंक परियोजना से मप्र और यूपी के बीच पानी के बंटवारे को लेकर मंत्रालय में बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अलावा मप्र के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट व अफसर मौजूद रहे।

  • 15 साल से चले आ रहे विवाद पर सहमति बनाने अब एमपी-यूपी के CM के साथ बैठक करेंगे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री

केन-बेतवा लिंक परियोजना से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच पानी के बंटवारे को लेकर 15साल से चल रहे विवाद का पटाक्षेप जल्दी ही होने के आसार हैं। दोनों राज्यों में सहमति बनाने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक की। जिसमें मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश का पक्ष मजूबती से रखा। मुख्यमंत्री ने बताया कि गत वर्ष 29 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हुई थी। इस वर्ष 31लाख हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों राज्यों के साथ बैठक कर आपसी सहमति के बाद शीघ्रता से इस कार्य को प्रारंभ किया जाएगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट भी मौजूद रहे।
मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि बैठक में मप्र को यूपी को रबी के सीजन में 930 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) देने के लिए तकनीकी पहलुओं पर सहमति बन गई है, लेकिन कितना पानी इस परियोजना से मप्र देगा, इसको लेकर 2005 और 2017 में लिए गए निर्णय के आधार पर होने पर होने के संकेत मिले हैं। बैठक के बाद शेखावत ने कहा कि हम समझौते के स्तर पर तक पहुंच गए हैं। केंद्र सरकार दोनों राज्यों को समान नजरिया रखकर और किसानों के हित में निर्णय करेगी। जल्दी ही शुभ समाचार देंगे। बता दें कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक पानी की ज़रूरत के हिसाब से बंटवारे को लेकर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार करेगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार मार्च-अप्रेल में इस परियोजना को शुरु करने की तैयारी कर चुकी है। परियोजना से पानी के बंटवारे को लेकर पिछले 15 साल से वार्ताएं चल रही हैं, लेकिन नतीजे तक नहीं पहुंचा जा सका। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक दौर की बैठक हो चुकी है, लेकिन अब दोनों राज्यों के साथ जल्दी ही बैठक करेंगे। इस परियोजना को लेकर वाइल्ड लाइफ की सभी अनुमतियां प्राप्त हो चुकी है। जब उनसे पूछा गया कि यूपी 930 एमसीएम पानी की मांग कर रहा है, इस पर क्या निर्णय हुआ? इस पर उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि फिलहाल में कुछ नहीं कह सकता।
विवाद की जड़
वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश को रबी फसल के लिए 547 एमसीएम और खरीफ फसल के लिए 1153 एमसीएम पानी देना तय हो गया था। लेकिन वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश की मांग पर रबी फसल के लिए 700 एमसीएम पानी देने पर सहमति बन गई थी। केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश को 788 एमसीएम पानी देना तय कर दिया था। लेकिन यूपी सरकार ने जुलाई 2019 में 930 एमसीएम पानी मांग लिया था। जिसे मध्य प्रदेश ने इंकार कर दिया था।
मध्य प्रदेश का तर्क
सूत्रों का कहना है कि मध्य प्रदेश जल संसाधन विभाग ने पानी की जरूरत की योजना में साफ उल्लेख किया है कि रबी के सीजन में उत्तर प्रदेश को रबी 700 एमसीएम और खरीफ में 1000 एमसीएम पानी ही दिया जा सकेगा। इससे ज्यादा पानी देने पर मध्य प्रदेश में 4.47 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की मुश्किलें आएंगी। विभाग का कहना है कि परियोजना में जंगल, जमीन और वन्यप्राणियों के लिए रहवास क्षेत्र का नुकसान मध्य प्रदेश को वहन करना है, ऐसे में पानी पर ज्‍यादा हक उसका है।

पार्वती- कालीसिंध परियोजना पर आफिसर लेबल पर होगी बात
पार्वती-कालीसिंध परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार के बीच आफिसर लेबल पर बात होगी। बैठक में इस परियोजना को लेकर भी बात हुई। हालांकि यह परियोजना प्रारंभिक स्तर पर है। इसके तहत कूनो नदी पर ग्वालियर के निकट डेम बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने सर्वे का काम शुरु कर दिया है। इसको लेकर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि अगले 15 दिन में दोनों राज्यों के अफसर बैठक कर इस परियोजना को आगे बढ़ाएंगे। बता दे कि राजस्थान पार्वती- कालीसिंध नदी पर ईस्टर्न सिंचाई परियोजना पर काम कर रहा है। यह परियोजना फिलहाल केंद्र सरकार में लंबित है। मप्र की चंबल नदी इन नदियों में मिलती है। ऐसे में मप्र भी रिवर लिंकिंग प्रोजेक्ट बनने पर विचार कर रहा है।



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