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उज्जैनएक दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो
- सस्ती दरों में ठेका ले लेते हैं लेकिन न तो समर्थन मूल्य का गेहूं समय रहते गोडाउन पर पहुंचाते हैं न कंट्रोल दुकानों का राशन
रंग्गा-बिल्ला के नाम से चर्चित ठेकेदार से जुड़ी परिवहन की दो एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड करने के दो प्रस्ताव प्रशासन ने शासन को पहुंचाए हैं। ये एजेंसियां सस्ती दरों में ठेका तो ले लेती है लेकिन न तो समय रहते समर्थन मूल्य पर खरीदे गेहूं का परिवहन कर पाती है न पीडीएस व्यवस्था के तहत कंट्रोल दुकानों तक राशन पहुंचाने का काम।
ऐसे में जब व्यवस्थाएं बिगड़ने लगती है तो प्रशासनिक मशीनरी को खासी परेशानी व आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। एजेंसियों की इन हरकतों से तंग आकर दोनों प्रस्ताव कलेक्टर के हस्ताक्षर से शासन को भेजे गए हैं। मप्र राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित के प्रबंध संचालक को शुक्रवार को भेजे गए प्रस्ताव का मजमून यह है कि वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर खरीदे जाने वाले गेहूं के परिवहन का ठेका परिवहनकर्ता मेसर्स दीपेश कुमार एंड संस जिला उज्जैन एवं परिवहनकर्ता मेसर्स शारदा रोड लाइंस जिला उज्जैन को दिया गया था।
लेकिन इन्होंने परिवहन कार्य में लापरवाही बरतना शुरू कर दी। इन्हें जिला विपणन अधिकारी व कलेक्टर ने नोटिस दिए। बावजूद सुधार नहीं किया तो 24 मई 2020 को दोनों पर क्रमश: पांच-पांच लाख रुपए की पेनल्टी लगाई गई। फिर भी इनके काम में गति नहीं आई। नतीजा ये रहा था कि कुल खरीदी का 50 फीसदी गेहूं खरीदी केंद्रों में खुले पड़ा था।
इस बीच 1 जून 2020 को असमय हुई बारिश से गेहूं भीगा और उसकी क्वालिटी प्रभावित हुई थी। तब प्रशासन को ताबड़तोड़ अपने स्तर पर अंतर जिला रेलवे व सड़क परिवहन से गेहूं का उठाव करवाना पड़ा था। इसमें करोड़ों रुपए खर्च हुए। तब भी चेतावनी देने पर भी इन अनुबंधित एजेंसियों ने अपने परिवहन कार्य में सुधार नहीं किया। ऐसे में उक्त दाेनों एजेंसियों पर 28 जुलाई 2020 को पुन: करीब पांच करोड़ रुपए अर्थदंड किया गया। साथ ही इन्हें ये भी स्पष्ट किया गया था इनकी इन लापरवाहियों से 13500 मीट्रिक टन गेहूं खराब हुआ है। जिसकी जवाबदारी परिवहनकर्ताओं की ही रहेगी। इन तमाम लापरवाहियों व परिस्थितियों को ध्यान में रखते निविदा दस्तावेज की कंडिका 38.2 के तहत उक्त दोनों परिवहन एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड करने की जिला उपार्जन समिति ने अनुशंसा की। इस प्रस्ताव को कलेक्टर के हस्ताक्षर से शासन को भेजा गया।
इधर जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाल से जुड़ी कंट्रोल दुकानों पर राशन पहुंचाने का परिवहन का वर्ष 2019 से 2021 तक ठेका मेसर्स दीपेश कुमार एंड संस के पास ही है। इस फर्म ने इधर भी वैसी ही लापरवाही बरती। शिकायतें बढ़ने लगी थी। तब नान के अधिकारियों की अनुशंसा पर कलेक्टर ने एक अन्य प्रस्ताव उक्त एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड करने के लिए करीब दस दिन पहले भी शासन को भेजा है। ऐसे में माना जा रहा है कि परिवहन से जुड़ी उक्त एजेंसियों को शासन ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई करेगा।