हमारी मातृभाषा जीवित: ज्ञान होगा तो धन-दौलत दौड़कर आपके पास आएगी

हमारी मातृभाषा जीवित: ज्ञान होगा तो धन-दौलत दौड़कर आपके पास आएगी


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खंडवा5 दिन पहले

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देश पर मुगलों और अंग्रेजों ने कई वर्षों तक राज किया, फिर भी हमारी मातृभाषा जीवित है। धन से ज्यादा महत्व ज्ञान का होता है। हमें हर हाल में अपने संस्कार के साथ मातृभाषा को बचाना है, इसके लिए घरों पर ज्ञान की देवी सरस्वती की प्रतिमा रखें और संस्कृत शब्दों का उच्चारण करें। घर पर कपूर अवश्य जलाएं। कपूर जलाने से नकारात्मक विचार घर के बाहर हो जाते हैं। मनुष्य के पास ज्ञान होगा तो धन-दौलत दौड़कर अपने पास चलकर आ जाएगी। संस्कृत भाषा सबसे सरल है। ओंकार शब्द का उच्चारण करने से मन वाणी शुद्ध होती है। संत बुखार दास बाबा प्रांगण में संस्कृत भारती के विकासखंड सम्मेलन में रविवार को प्रमुख वक्ता डॉ. भारती पाराशर ने यह बात कही। गोसेवक गौरीशंकर शर्मा, प्राचार्य जेएस डोडे, गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. मधुसूदन गीते, महंत विजेंद्र राव पवार ने संस्कृत का महत्व बताया। इसके बाद खंड स्तरीय सम्मेलन में चंपालाल पटेल ने संस्कृत भारती के 1 वर्ष की अल्प गतिविधियों का वाचन किया। अध्यक्षता प्रांत प्रचार प्रमुख कौशल मेहरा ने की। संस्कृत भारती सम्मेलन के पहले गायत्री मंदिर से रैली निकाली गई। नगरवासियों ने जगह-जगह स्वागत किया। विद्यार्थियों ने मंच पर संस्कृत श्लोक की प्रस्तुति देकर संस्कृत शब्दों का हिंदी में अनुवाद किया। इस मौके पर सरस्वती शिशु मंदिर के प्राचार्य जय भगवती भावसार, देवेंद्र चंद्रवंशी, मनोज राठौर, मनोज सोनी, चेतराम नायक आदि मौजूद थे।



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