आपके लिए इसका मतलबः क्या रीवा के ‘व्हाइट टाइगर’ जैसे खरे उतरेंगे विंध्य के ये शेर?

आपके लिए इसका मतलबः क्या रीवा के ‘व्हाइट टाइगर’ जैसे खरे उतरेंगे विंध्य के ये शेर?


Bhopal News: मप्र विधानसभा में विंध्य क्षेत्र के नेता को स्पीकर बनाने की चर्चाओं से ‘व्हाइट टाइगर’ कहे जाने वाले श्रीनिवास तिवारी की यादें ताजा हो गईं. (फाइल फोटो)

श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) के बारे में कहा जाता था कि विंध्य अंचल को लेकर कोई भी नीति, निर्णय या नियुक्ति न तो इस ‘व्हाइट टाइगर’ की मुहर के बिना होती थी और न ही राजनीति का कोई कदम तय होता था. वर्तमान में जिन नेताओं का नाम स्पीकर पद के रूप में लिया जा रहा है, उनमें से वैसी काबलियत रखने वाला नहीं दिखता.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    January 25, 2021, 8:06 PM IST

भोपाल. मध्य प्रदेश के सियासी और मीडिया के गलियारों में यह खबर तेजी से चल रही है कि इस बार राज्य विधानसभा (MP Assembly) का अध्यक्ष विंध्य क्षेत्र से होगा. भाजपा के वरिष्ठ विधायक गिरीश गौतम या केदारनाथ शुक्ला में से किसी एक को यह कुर्सी मिलने वाली है. जल्द ही नाम पर मुहर लगा दी जाएगी. इन खबरों के सुर्खियों में आने के साथ बरबस ही याद आ गई सूबे की राजनीति में ‘सफेद शेर’ (White Tiger) के नाम से विख्यात रहे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी (Shrinivas Tiwari) की. वह सन् 1993 से 2003 की अवधि में पूरे 10 साल तक विधानसभा अध्यक्ष रहे और एक सर्वशक्तिमान नेता के रूप में प्रतिष्ठित रहे.

एक ऐसे नेता, जिनके बारे में कहा जाता था कि पूरे मध्य प्रदेश के बारे में तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार चाहे जो फैसला करे, लेकिन विंध्य अंचल को लेकर कोई भी नीति, नियुक्ति या निर्णय न तो इस ‘व्हाइट टाइगर’ की मुहर के होती थी और न ही राजनीति के बारे में कोई कदम तय होता था. वर्तमान में जिन नेताओं का नाम इस पद के लिए लिया जा रहा है, उनमें से किसी में से उन जैसी दृढ़ता और काबलियत नहीं दिखती.

मध्य प्रदेश की पहली विधानसभा के अध्यक्ष पं. कुंजीलाल दुबे के सबसे लंबे 20 साल के कार्यकाल के बाद इस पद पर सबसे लंबा 10 साल का समय बिताने वाले दो ही नेता हुए हैं. एक श्रीनिवास तिवारी और दूसरे भाजपा के ईश्वर दास रोहाणी. तिवारी विंध्य क्षेत्र से इकलौते ऐसे नेता रहे, जो 10 साल तक इस पद पर रहे. अब पूरे 17 साल बाद विंध्य के किसी नेता को इस गरिमामयी पद को सुशोभित करने का मौका मिलने वाला है, तो मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इनमें से किसी में भी श्रीतिवारी जितनी सत्ता में पकड़ है या सबको साधने, साथ लेकर चलने की राजनैतिक प्रतिभा है?

सफेद शेर की शख्सियत ही कुछ ऐसी थी

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