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चेन्नई4 मिनट पहले
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ऑस्ट्रेलिया को उसके घर में हराने वाली टीम इंडिया होम कंडीशंस में इंग्लैंड के खिलाफ भी जीत की दावेदार मानी जा रही थी। लेकिन, चेन्नई में खेले गए पहले टेस्ट में इंग्लैंड ने सरप्राइज दे दिया। 227 रन से जीत हासिल कर अंग्रेज चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गए हैं। 22 साल बाद भारत को चेपक स्टेडियम में हार झेलनी पड़ी है।
अब भारत के सामने सीरीज में वापसी करने का कठिन चैलेंज है। साथ ही आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में एंट्री भी खतरे में आ गई है। गलत टीम सिलेक्शन, बड़े सितारों के कमजोर खेल सहित सात ऐसे फैक्टर रहे जिनकी वजह से टीम इंडिया गाबा के अर्श से चेपक के फर्श पर आ गई है।
1. टॉस गंवाना भारी पड़ा: पहले दो दिन बैटिंग के लिए बेस्ट थी पिच
इस पिच पर पांच दिन तक मैच चला और स्पष्ट रिजल्ट भी सामने आया। इस लिहाज से यह अच्छी और स्पोर्टिंग पिच कही जाएगी। लेकिन, साथ ही यह ऐसी पिच साबित हुई जहां टॉस ही बॉस बना। यहां पहले दो दिन बैटिंग आसान थी। इंग्लैंड ने इसका पूरा फायदा उठाया और पहली पारी में 190.1 ओवर बैटिंग कर भारत को मुकाबले से बाहर कर दिया।
2. दिग्गजों की खराब बैटिंग: विराट, रहाणे, रोहित और पुजारा मिलकर भी जो रूट से पीछे
रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली और अजिंक्य रहाणे टीम इंडिया के चार सबसे सीनियर बैट्समैन हैं। ये चारों मिलकर इस टेस्ट में सिर्फ 190 रन बना सके। रोहित ने दो पारियों में 18 रन बनाए। रहाणे ने दो पारियों में 1 रन बनाया। पुजारा ने दो पारियों में 88 रन और विराट ने दो पारियों में 83 रन बनाए। इसके उलट इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने इस मैच की पहली पारी में अकेले 218 रन बना दिए थे।
3. गलत टीम सिलेक्शन: अश्विन को नहीं मिला दूसरे और तीसरे स्पिनर का साथ
उम्मीद थी कि टीम इंडिया इस मैच में अश्विन के साथ-साथ लेफ्ट आर्म रिस्ट स्पिनर कुलदीप यादव को प्लेइंग-11 में मौका देगी। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। टीम मैनेजमेंट ने शाहबाज नदीम और सुंदर को तरजीह दी। अश्विन ने मैच में 207 रन देकर नौ विकेट लिए। लेकिन, नदीम और सुंदर ने मिलकर 362 रन देकर सिर्फ चार विकेट लिए। कुलदीप की उपस्थिति में स्थिति बेहतर हो सकती थी।
4. नाम का होम एडवांटेज: बाउंसी पिचों के मुताबिक ढल गया खेल
भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज से पहले तीन महीने ऑस्ट्रेलिया में बिताकर आई है। इस कारण टीम के ज्यादातर गेंदबाज और बल्लेबाजों का खेल बाउंसी पिचों के अनुकूल ढल गया। भारत टीम ने भारत में आखिरी मैच एक साल पहले खेला था। वहीं, इंग्लैंड की टीम करीब एक महीने से उपमहाद्वीप में है। गॉल में चेन्नई जैसी पिचों पर उसे दो टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला।
5. इंग्लैंड के स्पिनर्स को अंडरएस्टीमेट करना
डॉम बेस और जैक लीच को भारत में पहली बार टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला। दोनों को अनुभवहीन स्पिनर मानकर भारतीय बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ कई रैश शॉट खेले गए और विकेट गंवाए। इन दोनों ने मिलकर मैच में 11 विकेट ले लिए।
6. खराब फील्डिंग और विकेटकीपिंग
इंग्लैंड की पहली पारी में भारतीय फील्डरों ने करीब आधा दर्जन मौके गंवाए। विकेट के पीछे ऋषभ पंत का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। इसका फायदा उठाकर इंग्लैंड 550 रन के पार चला गया और यह आखिरकार यह ऐसा एवरेस्ट साबित हुआ जिसे टीम इंडिया पार नहीं कर सकी।
7. थकान: सितंबर से लगातार खेल रहे भारतीय खिलाड़ी
भारतीय टीम के अधिकांश खिलाड़ी सितंबर से लगातार ऊंचे स्तर की क्रिकेट खेल रहे हैं। सितंबर-अक्टूबर में आईपीएल खेलने के बाद टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया के कठिन दौरे पर गई। वहां वनडे, टी-20 के बाद चार टेस्ट मैचों की सीरीज भी हुई। इस सीरीज की थकान उतरी नहीं कि इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज शुरू हो गई।