कैसी थी वो जीत. भारत ने टेस्ट क्रिकेट में 1932 में आगाज किया था. इस जीत के लिए उसे 20 सालों तक इंतजार करना पड़ा था. ऐसे में ये जीत हमेशा हमेशा के लिए भारतीय क्रिकेट में यादगार हो चुकी है और उसी के साथ चेन्नई का मैदान भी. वैसे आमतौर पर ये जगह भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत लकी भाग्यशाली रहा है. इस टेस्ट मैच में हार से पहले यहां इंग्लैंड पर भारत का पलड़ा भारी रहता आया था. जानते हैं भारत की उस पहली टेस्ट जीत के बारे में, जिसकी 69वीं वर्षगांठ 10 फरवरी को मनाई जाएगी.
उस भारतीय टीम की अगुवाई विजय हजारे कर रहे थे. मैदान था चेन्नई का चेपक स्टेडियम. तब भारतीय टीम को एक मैच के बमुश्किल 250 रुपए मिला करते थे. अब तो भारतीय क्रिकेटर एक टेस्ट मैच खेलने की एवज में 15 लाख रुपए तक पाता है लेकिन वो जमाना एकदम अलग था.
विजय हजारे ने उस मैच में गजब की कप्तानी की थी.उस मैच में भारत की ओर से दो शतक लगे थे लेकिन जीत के असली हीरो विनोद मांकड़ थे, जिन्होंने अपनी उम्दा गेंदबाजी से धाक जमा दी थी. सही मायनों में वो पहले स्टार आलराउंडर थे, जो उन दिनों पीक पर थे.
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इस टीम में लाला अमरनाथ भी थे, जो जबरदस्त आलराउंडर थे. दत्तू फडकर भी आलराउंडर क्रिकेटर के तौर पर टीम में शामिल थे. विजय हजारे उस जमाने के बेहतरीन बल्लेबाज माने जाते थे. युवा पॉली उमरीगर ने खुद को गजब के ऑफ स्पिनर के तौर पर टीम में स्थापित कर लिया था. जो अक्सर बॉलिंग की शुरुआत भी करते थे.
भारत को टेस्ट का दर्जा 1932 में मिला था लेकिन पहली टेस्ट जीत के लिए उसको 20 सालों तक इंतजार करना पड़ा.
कैसी थी ये टीम
वो भारतीय टीम युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का परफेक्ट मिक्सचर थी. पंकज राय, मुश्ताक अली टीम में थे. हालांकि 1952 में इंग्लैंड की जो टीम भारत आई, उसे कमोवेश कमजोर टीम माना गया, क्योंकि उस टीम में उनके कई जाने माने क्रिकेटर नहीं आए थे, जिसमें लेन हटन, सिरील वाशब्रुक, डेनिस काम्पटन, बिल एल्ड्रिच, एलेक बेडसर और जिम लेकर जैसे क्रिकेटर शामिल थे.
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भारतीय सीरीज में पीछे थी
मद्रास टेस्ट में आखिरी मैच था. उस मैच में डोनाल्ड कार ने कप्तानी की, क्योंकि टीम के नियमित कप्तान नाइगल हावर्ड चोटिल हो गए थे. इंग्लैंड उस सीरीज में 1-0 से आगे था. कानपुर में इंग्लैंड को 09 विकेट से जबरदस्त जीत मिली थी.
तब भारतीय टीम के सदस्यों को एक मैच खेलने के 250 रुपए मिलते थे. आमतौर पर होटल का खर्च बचाने के लिए टीम प्राइवेट घरों में टिका करती थी.
इंग्लैंड ने टास जीतकर पहले बैटिंग शुरू की
टास इंग्लैंड के कप्तान कार ने जीता और बैटिंग शुरू की. विकेट आमतौर पर बॉलर्स के लिए मददगार नहीं था. इंग्लैंड टीम आराम से रन बना रही थी. इसके बाद भी मांकड की कसी हुई गेंदबाजी के चलते पहले दिन के खेल के बाद इंग्लैंड का स्कोर था 05 विकेट पर 224 रन. दूसरे दिन ही किंग जार्ज पंचम के निधन के चलते खेल नहीं हुआ, उसे रेस्ट डे घोषित कर दिया गया. तब टेस्ट मैचों में एक दिन रेस्ट का भी होता था. ये परंपरा 70 के दशक तक चली. 80 के दशक में ही रेस्ट डे को खत्म किया गया.
मांकड़ के आगे इंग्लैंड का लोअर आर्डर भरभरा गया
खैर जब मैच दोबारा शुरू हुआ तो मांकड की शानदार गेंदबाजी से इंग्लैंड टीम का लोअर आर्डर एकदम उखड़ गया. आखिरी 05 विकेट महज 42 रन पर धराशाई हो गए. मांकड़ ने उस पारी में 55 रन देकर आठ विकेट लिए. उनकी गेंदें खतरनाक तरीके से आफ स्टंप पर आ रही थीं. अब ये देखना था कि भारतीय बल्लेबाज आगे क्या करते हैं. हालांकि वीनू मांकड़ को दाद देनी चाहिए कि उन्होंने बैटिंग को सपोर्ट करने वाले विकेट पर इतनी सटीक गेंदबाजी की.
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चेपक को अंदाज था कुछ खास होने वाला है
चेपक पर शायद दर्शकों को भी अंदाज था कि अब कुछ खास होने वाला है. वो 25000 दर्शकों के साथ भरा हुआ था. भारतीय क्रिकेट प्रेमियों को इंतजार था भारतीय टीम की पहली जीत का, जो 20 सालों के बाद भी उसके खाते में नहीं आ पाई थी. ये तभी हासिल होती अगर बल्लेबाज यहां पर कुछ करके दिखाते.
पकंज राय ने शतक लगाया
बंगाल के पंकज राय के साथ ओपनिंग करने मुश्ताक अली आए. पंकज तो उम्दा बैटिंग कर रहे थे लेकिन मुश्ताक बहुत ज्यादा रन नहीं बना सके. यही हाल उसके बाद आने वाले विजय हजारे, मांकड़ और लाल अमरनाथ का हुआ. ये सभी बल्लेबाज 20 और 30 के आसपास रन बनाकर आउट हो गए. हालांकि उस दिन पंकज ने 15 चौकों के साथ 111 रन बनाए. वो उस सीरीज में पहले भी एक शतक जड़ चुके थे.
बाद में बल्लेबाजों ने निराश किया
जब टेटरशैल ने पंकज राय को कैच किया तब भारत का स्कोर था 04 विकेट पर 191. लाला अमरनाथ जब पांचवें विकेट के रूप में लौटे तब तक भारत के खाते में 216 आ गए थे. कहा जाना चाहिए कि भारतीय बल्लेबाजों को जो बढ़त लेनी चाहिए थी, वैसा वो कर नहीं पाए. अब मैच करीब करीब बराबरी का नजर आने लगा था.
मध्यक्रम पर उमरीगर ने जमा दिया खेल
ऐसे में युवा उमरीगर और दत्तू फडकर ने खेल संभाला, इन दोनों ने मध्यक्रम में उस दिन अपनी बेहतरीन पारी खेली. दोनों ने छठे विकेट के लिए 104 रनों की भागीदारी की. इसके बाद उमरीगर ने स्थानीय क्रिकेटर गोपीनाथ के साथ 93 रनों की उम्दा पार्टनरशिप और करके मैच को इंग्लैंड के कंट्रोल से परे कर दिया. तीसरे दिन जब मैच खत्म हुआ तो उमरीगर 130 रनों पर खेल रहे थे और भारत 191 रनों की बढ़त चुका था.
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इंग्लैंड के लिए अवसर खत्म हो चुके थे
अभी दो दिनों का खेल बाकी था. हालांकि इस मैच में इंग्लैंड के लिए अवसर खत्म हो गए थे. फडकर और नई गेंद से उनके पार्टनर रमेशा दिवेचा ने अगर आते ही इंग्लैंड के ओपनर बल्लेबाजों को वापस लौटा दिया तो आगे का काम मांकड़ और गुलाम अहमद की सधी फिरकी गेंदबाजी ने किया, जिन्होंने 04-04 विकेट बांटे. अगर कोई बल्लेबाज विकेट पर टिकने की कोशिश कर पा रहा था तो वो राबर्टसन और एलन वाटकिंस थे.
कैसे गिरा आखिरी विकेट और मिली ऐतिहासिक जीत
आखिरी विकेट और जीत का परचम मांकड़ की गेंद के साथ लहराया. उन्होंने तीन कदमों का रनअप लिया. गेंद हवा में गई और जब नीचे उतरी तो ऑफ स्टंप के पास गिरती हुई ये गेंद कुछ स्लोअर थी. हिल्टन गच्चा खा गए, वो गेंद को खेलने के लिए आगे बढ़े और फिर उन्होंने खुद को विकेटकीपर सेन के जरिए स्टंप करते हुए देखा.
ये भारतीय क्रिकेट की पहली और ऐतिहासिक जीत थी. दर्शक वाकई खुशी से झूम उठे. दो दशक के इंतजार के बाद भारतीय टीम ने एक पारी और 08 रनों से जीत हासिल की थी. वीनू मांकड़ ने मैच में कुल मिलाकर 12 विकेट लिये. उस सीरीज में वो किस कदर सफल थे, इसका अंदाज इससे मिल सकता है कि उन्होंने कुछ 34 विकेट पाए थे. इस जीत ने भारतीय क्रिकेट में नया आत्मविश्वास पैदा करने का काम किया.
तब खिलाड़ी होटलों में नहीं रुकते थे
भारतीय क्रिकेट में उस जीत के बाद ड्रेसिंग रूम तो चहक रहा था लेकिन उन दिनों जीत का जश्न शैंपेन से नहीं मनता था. कोई ये सोच भी नहीं सकता था. बीसीसीआई ने शायद खिलाड़ियों को जीत पर कुछ हल्की फुल्की रकम जरूर दी होगी. ये वो दिन थे जब खिलाड़ी होटलों में नहीं बल्कि होटल का खर्च बचाने के लिए प्राइवेट घरों में रुकते थे. लिहाजा कहना चाहिए कि ये वो 11 खिलाड़ी थे, जिन्होंने भारतीय क्रिकेट में जीत की पटकथा की शुरुआत की.
ब्रीफ स्कोर –
इंग्लैंड 266 (डिक स्पूनर 66, टाम ग्रेवनी 39, जैक राबर्टसन 77, डोनाल्ड कार 40, वीनू मांकड़ 55 रन देकर 08 विकेट) and 183 ( जैक राबर्टसन 56, एलन वाटकिंस 48, वीनू मांकड़ 53 रन पर 04 विकेट, गुलाम अहमद 77 रन देकर 04 विकेट)
भारत – 09 विकेट पर 457 घोषित (पंकज राय 111, दत्तू फडकर 61, पॉली उमरीगर नाबाद 130, सीडी गोपीनाथ 35).
परिणाम – भारत एक पारी और 08 रनों से जीताअ.