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- Neither The Mayor, Nor The Councilor, Used To Hear Public Hearing In The Public Hearing That Too Was Closed
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जबलपुर17 घंटे पहले
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- पिछले साल मार्च में आखिरी बार सुनी गई लाेगों की पीड़ा
आम जनता को यदि नगर निगम सम्बंधी कोई शिकायत है तो वह किसके पास जाए अब यह समस्या पैदा हो गई है, क्याेंकि इन दिनों न तो महापौर हैं और न ही पार्षद। ऐसे में एक सहारा जनसुनवाई का था, लेकिन पिछले साल मार्च माह में जनसुनवाई जो बंद हुई तो उसके बाद उसे दोबारा चालू करने के बारे में किसी ने सोचा ही नहीं। अब हर मंगलवार को आम नागरिक अपनी समस्याएँ लेकर आते हैं, लेकिन मायूस होकर लौट जाते हैं।
सड़क, पानी, सफाई और जन्म से लेकर मृत्यु तक हर मामले में नगर निगम ही लोगाें की एकमात्र उम्मीद होती है। कोई भी समस्या होने पर लोग सीधे पार्षदों के पास दौड़ते हैं, लेकिन इन दिनों पार्षद पूर्व हो गए हैं और निगम में प्रशासक राज लागू है। प्रशासक नगर निगम में कभी बैठते नहीं हैं। िनगमायुक्त का अधिकांश समय स्मार्ट सिटी के कार्यालय में बीतता है, अब जनता जाए तो कहाँ जाए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बोलते नहीं थकते कि जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए, लेकिन परेशानी हल भी तो नहीं हो रही। प्रत्येक मंगलवार को निगम में जनसुनवाई होती थी तो 25 से लेकर 50 िशकायतें तक आती थीं।
बिजली कंपनी -बोर्ड लगाया और भूल गए
राज्य शासन द्वारा सभी शासकीय विभागों में जनता की समस्या के निराकरण के लिए प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, मगर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में इस निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है। जबलपुर संभाग के मिशन कम्पाउंड स्थित एसई सिटी के कार्यालय के बाहर जनसुनवाई आयोजित करने का साइन बोर्ड जरूर लगाया गया है, मगर जनसुनवाई नहीं होती है जिसके चलते बिजली संबंधी शिकायतों के साथ ही बढ़ी राशि के बिलों का निराकरण कराने उपभाेक्ताओं को भटकना पड़ता है।
5 बार दिया आवेदन फिर भी नहीं हुआ निराकरण
जनता की समस्या सुनने और उसका निराकरण करने जनसुनवाई शुरू की गई है कलेक्ट्रेट में हर सप्ताह आवेदन लिए जाते हैं और संबंधित विभाग तक पहुँचा दिए जाते हैं इसके बाद भी लोगों को कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। बरेला के पड़वार से पहुँची महिला कंचन सोनी का कहना था कि पति की मृत्यु के बाद संबल योजना का लाभ मिल जाएगा लेकिन 5 बार आवेदन देने के बाद भी भटकना पड़ रहा है। अधिकारी यही कहते हैं कि यह मामला सामान्य मृत्यु का नहीं है हालाँकि उनके पास पूरे कागज हैं फिर भी मदद नहीं मिल पा रही है। कलेक्ट्रेट में डेढ़ सौ से ज्यादा आवेदन पहुँचे।
कलेक्ट्रेट कार्यालय में जनसुनवाई का समय पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक है। मंगलवार को डिप्टी कलेक्टर मेघा पवार और सृष्टि प्रजापति ने लोगों की समस्याएँ सुनीं। हालाँकि इसके बाद भी ज्यादातर लोग कलेक्टर को शिकायत सौंपने बैठे रहे। दोपहर बाद जब कलेक्टर कर्मवीर शर्मा पहुँचे तो उन्हें आवेदन देने लोगों की कतार लग गई। हर आवेदक की समस्या सुनने के बाद उन्होंने शिकायत संबंधित विभाग के अधिकारियों को जल्द निराकरण करने के निर्देश दिये।