राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘पिछले कुछ वर्षों में नफरत को इस कदर सामान्य कर दिया गया है कि हमारा प्रिय खेल भी इसकी चपेट में आ गया. भारत हम सभी का है. उन्हें हमारी एकता भंग मत करने दीजिए.’ जाफर को पूर्व भारतीय कप्तान और कोच अनिल कुंबले का समर्थन मिला है जो अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की क्रिकेट समिति के प्रमुख भी हैं. इसके अलावा पूर्व भारतीय खिलाड़ियों इरफान पठान, मनोज तिवारी और मुंबई के पूर्व बल्लेबाज शिशिर हट्टनगढ़ी ने भी जाफर का समर्थन किया है.
क्या है पूरा विवाद
उत्तराखंड क्रिकेट संघ के सचिव माहिम वर्मा ने कहा था कि जाफर ने मजहब के आधार पर चयन करने की कोशिश की. भारत के लिए 31 टेस्ट खेल चुके जाफर ने इस आरोपों को बेतुका बताया है. उन्होंने कहा कि टीम में मुस्लिम खिलाड़ियों को तरजीह देने के वर्मा के आरोपों से उन्हें काफी तकलीफ पहुंची है. जाफर ने वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘जो कम्युनल एंगल लगाया, वह बहुत दुखद है. उन्होंने आरोप लगाया कि मैं इकबाल अब्दुल्ला का समर्थन करता हूं और उसे कप्तान बनाना चाहता था जो सरासर गलत है.’’
उन्होंने कहा, ‘मैं जय बिस्टा को कप्तान बनाने वाला था लेकिन रिजवान शमशाद और अन्य चयनकर्ताओं ने मुझे सुझाव दिया कि इकबाल को कप्तान बनाये. वह सीनियर खिलाड़ी है, आईपीएल खेल चुका है और उम्र में भी बड़ा है. मैंने उनका सुझाव मान लिया.’
मौलवियों को मैंने नहीं बुलाया-जाफर
रणजी ट्रॉफी में सर्वाधिक रन बना चुके जाफर ने इन आरोपों को भी खारिज किया कि टीम के अभ्यास सत्र में वह मौलवियों को लेकर आये थे. उन्होंने कहा, ‘माहिम वर्मा कहा कि बायो बबल में मौलवी आये और हमने नमाज पढ़ी. मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन जुमे को आये, उन्हें मैने नहीं बुलाया था.’
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जाफर ने कहा, ‘इकबाल अब्दुल्ला ने मेरी और मैनेजर की अनुमति जुमे की नमाज के लिये मांगी थी. हम रोज कमरे में ही नमाज पढ़ते थे लेकिन जुमे की नमाज मिलकर पढ़ते थे तो लगा कि कोई इसके लिये आयेगा तो अच्छा रहेगा. हमने नेट अभ्यास के बाद पांच मिनट ड्रेसिंग रूम में नमाज पढ़ी. यदि यह सांप्रदायिक है तो मैं नमाज के वक्त के हिसाब से अभ्यास का समय बदल सकता था लेकिन मैं ऐसा नहीं हूं.’ (भाषा इनपुट के साथ)