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पेट्राेल में हर दिन बच रहे 3.5 लाख रुपये
नेशनल ऑटाेमाेटिव बाेर्ड (NAB) के अनुसार, देशभर में इस वक्त कुल 50,577 इलेक्ट्रिक वाहन है, जिसमें दाे, तीन और चार पहिया वाहन शामिल हैं. इनके इस्तेमाल से ही हर दिन 43,316 लीटर पेट्राेल-डीजल की बचत हाे रही है. वहीं, अब तक 1 कराेड़ 44 लाख 12 हजार 700 लीटर पेट्राेल-डीजल की बचत हुई है. यदि पेट्राेल-डीजल का प्रति लीटर औसत मूल्य 80 रुपये भी मान लिया जाए ताे इस लिहाज से हर दिन 3 लाख 46 हजार 5280 रुपये की बचत हाे रही है. अब तक लाेगाें को इन 50577 वाहनाें से 1 अरब 44 लाख 12 हजार 700 रुपए की बचत पेट्राेल-डीजल नहीं भरवाने से हुई है.
पर्यावरण काे हुआ सबसे ज्यादा फायदा
देशभर में चल रहे 50577 इलेक्ट्रिक वाहनाें से आम लाेगाें पर पेट्राेल-डीजल में लगने वाला पैसा ताे बच ही रहा है, सबसे ज्यादा फायदा पर्यावरण काे हाे रहा है. नेशनल आटाेमाेटिव बाेर्ड (NAB) के अनुसार इन इलेक्ट्रिक वाहनाें के इस्तेमाल से हर दिन करीब 99 हजार किलाे कार्बनडायऑक्साइड (Co2) के उत्सर्जन काे राेका जा रहा है वही अब तक 3 कराेड़ 28 लाख किलाे से ज्यादा Co2 उत्सर्जन रूका जिसका मलतब यह है कि पर्यावरण काे इससे सबसे ज्यादा फायदा पहुंचा. साेचिए देशभर में जब सिर्फ पचास हजार इलेक्ट्रिक वाहनाें से इतना फर्क आ सकता है जाे जैसे-जैसे इनकी संख्या बढ़ती जाएगी तब हम वातावरण काे कितना स्वच्छ कर देंगे.
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देश में कर्नाटक सबसे आगे
इलेक्ट्रिक वाहनाें काे लेकर जागरूकता कह लिजिए या फिर पैसा और पर्यावरण दाेनाें काे बचाने में अपना याेगदान में पूरे भारत में जाे राज्य सबसे आगे है वाे है कर्नाटक. यहां सबसे ज्यादा 12,512 इलेक्ट्रिक वाहन है जिसमें 12 हजार टू व्हीलर, 387 कारें और 250 के करीब थ्री व्हीलर है. इसके बाद नंबर है तमिलनाडू का जहां कुल 7266 इलेक्ट्रिक वाहन है, तीसरे नंबर पर है महाराष्ट्र जहां 5911, चाैथे पर उत्तर प्रदेश 4124 और पांचवे पर दिल्ली है जहां इस वक्त 3808 इलेक्ट्रिक वाहन है. मालूम हाे इस वक्त भारत में पेट्राेल और डीजल के कुल 25 कराेड़ 30 लाख से ज्यादा वाहन है. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत में करीब 30 प्रतिशत आबादी इलेक्ट्रिक वाहन करने की है.