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भोपाल3 मिनट पहले
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भोपाल संभाग में लव जिहाद के लिए बनाए गए नए कानून के तहत 8वां केस दर्ज किया गया। – प्रतीकात्मक फोटो
- नाम बदलकर आरोपी ने पीड़िता से लव मैरिज की थी
भोपाल में एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है। आरोपी ने दहेज प्रताड़ना के मामले में पेशी के दौरान पत्नी को धमकाते हुए कहा कि अगर धर्म परिवर्तन नहीं किया, तो जान से मार देंगे। एमपी नगर पुलिस ने महिला की शिकायत पर शादी के करीब चार साल बाद आरोपी के खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश की धारा 3/5 में FIR की। तीन दिन पहले आरोपी ने यह धमकी दी थी।
TI सूर्यकांत अवस्थी ने बताया कि 27 साल की पीड़िता इंद्रपुरी की रहने वाली है। उसने वर्ष 2016 में विदिशा में रहने वाले इमरान खान उर्फ राज प्रजापति से प्रेम विवाह किया था। उसने बताया कि शादी के बाद उसे पता चला कि उसका राज प्रजापति नहीं बल्कि इमरान खान है।
उसके बाद वह उस पर धर्म परिवर्तन करने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। इसी के कारण दो साल पहले उसने महिला थाने में इमरान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना समेत अन्य धाराओं में FIR कराई थी। महिला ने बताया कि वह गत 15 फरवरी को उसी मामले की कोर्ट में पेशी थी।
वह दोपहर में पेशी पर पहुंची। इस दौरान इमरान ने उससे मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी दी और धर्म परिवर्तन करने के लिए कहा। पीड़िता ने घटना की शिकायत एमपी नगर पुलिस से की। पुलिस ने मारपीट, जान से मारने की धमकी सहित धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश की धारा 3/5 की धारा में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दो दिन बाद शिकायत की
इधर घटना की सूचना पीड़िता ने तत्काल सूचना नहीं दी। उसने दो दिन बाद एमपी नगर में थाने में इसकी शिकायत की। पुलिस ने नए कानून के तहत मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। इधर मामले की जानकारी लगने के बाद हिंदू संगठन भी एमपी नगर थाने पहुंच गए।
भोपाल में आठवां मामला
नए कानून के तहत जनवरी में ही 23 मामले दर्ज किए जा चुके थे। इसमें सबसे ज्यादा भोपाल संभाग में 7 हुए थे। नया मामला दर्ज होने के बाद यह संख्या 8 पहुंच गई है। जनवरी में 23 दिन के अंदर इंदौर में 5, जबलपुर व रीवा संभाग में 4-4 और ग्वालियर संभाग में 3 अपराध दर्ज किए जा चुके थे।
प्रदेश में 9 जनवरी को लागू हुआ
मध्यप्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2020 का अध्यादेश 9 जनवरी शाम 5 बजे से यह प्रदेश में लागू हो गया। सरकार द्वारा इसका नोटिफिकेशन जारी कर उसकी प्रति प्रदेश के सभी कलेक्टर को भेज जा चुकी है। हालांकि इसे 6 महीने में विधानसभा से पास कराना होगा। इससे पहले यह कानून उत्तर प्रदेश में भी अधिनियम के माध्यम से लागू किया जा चुका है।