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- Before The Accident, The Driver Was Talking On The Mobile, Held The Steering With One Hand, Could Not Handle The Bus On The Breaker.
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सीधी9 मिनट पहलेलेखक: संतोष सिंह
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हादसे से पहले इसी टूटे हुए ब्रेकर पर उछली थी बस। फिर नहर में समा गई थी।
- सदरा-पटना गांव के पूर्व सरपंच का दावा- तेज रफ्तार के चलते ब्रेकर पर उछल गई थी बस
- सीधी बस हादसे में 54 लोगों की हुई मौत, छह को स्थानीय लोगों ने बचाया, पांच दिन चला रेस्क्यू अभियान
सीधी बस हादसे को लेकर प्रशासनिक जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। चश्मदीदों ने कहा कि जब हादसा हुआ, उससे पहले ड्राइवर माेबाइल बात करते हुए तेज गाड़ी चल रहा था। उसने एक हाथ से स्टेयरिंग पकड़ी थी। जैसे ही स्पीड ब्रेकर पर बस का पहिया आया तो वह अनबेलेंस हो गई। इसके बाद बस सीधे नहर के पानी में समा गई। दैनिक भास्कर से चर्चा में चश्मदीद बस यात्री और ग्रामीणों ने यह खुलासा किया है।
सीधी जिले के सदरा-पटना के पास नहर में हुए बस हादसे ने अपने पीछे कई सवाल छोड़ रखे हैं। हादसे की जांच के लिए एडीएम की अगुवाई में कमेटी गठित हुई है, इसी बीच यह नया खुलासा हुआ है। एक्सीडेंट से पहले बस ड्राइवर के मोबाइल पर कॉल आया था। उसने एक हाथ में मोबाइल तो दूसरी हाथ में हाथ से स्टेयरिंग पकड़ रखी थी। तभी ब्रेकर पर बस उछली और अनियंत्रित होकर सीधे नहर में समा गई। इस हृदय विदारक हादसे में जहां 54 लोगों को जान गंवानी पड़ी। वहीं 6 की जिंदगी स्थानीय लोगों ने बचा ली।

साइड में लगे पत्थरों को तोड़ते हुए बस नहर में समा गई थी।
यात्री ने कहा- बस रफ्तार में थी इसलिए एक हाथ से स्टेयरिंग नहीं संभला
रामपुर नैकिन गांव निवासी एवं बिजलीकर्मी सुरेश गुप्ता भी बहू पिंकी व पोते अथर्व के साथ इसमें सवार हुए थे। हादसे में सुरेश को स्थानीय निवासी शिवरानी ने बचा लिया था जबकि पिंकी व अथर्व की मौत हो गई। सुरेश गुप्ता के मुताबिक बस ड्राइवर तेज रफ्तार में बस चला रहा था। हादसे से पहले उसके मोबाइल पर कॉल आया था। वह बात कर रहा था कि ये हादसा हो गया। इसके बाद फिर चारों तरफ चीख-पुकार और तबाही के मंजर दिखा।

कुर्ता-पायजामे में सुरेश गुप्ता के मुताबिक ड्राइवर मोबाइल पर बात कर रहा था। तभी ये हादसा हुआ।
ब्रेकर पर बस उछली और नहर में समा गई
वहीं हादसे के दूसरे प्रत्यक्षदर्शी सदरा-पटना गांव के पूर्व सरपंच सुखीनंद विश्वकर्मा हैं। वह हादसे के समय थोड़ी ही दूरी पर मवेशियों के साथ मौजूद थे। सुखीनंद के मुताबिक बस तेज रफ्तार में थी। घटनास्थल से पहले नहर रोड पर हल्का सा ब्रेकर है। इस पर खटाक की आवाज के साथ बस उछली और फिर साइड पत्थर को तोड़ते हुए नहर में समा गई। आसपास के लोगों ने छह लोगों को बचा लिया।

सदरा-पटना के पूर्व सरपंच हादसे के समय पास में ही मवेशी चरा रहे थे।
जाम के चलते पुलिस ने रूट किया था डायवर्ट
छुहिया घाटी पर चार दिन से लगे जाम के चलते पिपरांव चौकी की पुलिस ने ही नहर मार्ग से वाहनों को डायवर्ट किया था। यात्री बसों के अलावा दो पहिया और चार पहिया वाहनों को इसी रास्ते से पुलिस निकलवा रही थी। पर हादसे के बाद पुलिस वाले वहां से हट गए थे। बाद में वे घटनास्थल पर पहुंचे थे।

पांच दिन 65 घंटे के लगभग रेस्क्यू कर 54 शव निकाले गए।
पांच दिन 65 घंटे चला रेस्क्यू
16 फरवरी को हादसे की सूचना पर सुबह 10 बजे जबलपुर एनडीआरएफ और सीधी एसडीआरएफ की टीम पहुंची थी। एनडीआरएफ में 24 जवान तो सीधी एसडीआरएफ के 12 जवानों ने पांच दिन तक चले इस रेस्क्यू में 60 घंटे से अधिक समय पानी में सर्चिंग में लगाया। इस दौरान टीम छुहिया घाटी के नीचे बने नहर के टनल में भी चार बार गई। आज आखिरी शव मिलने के बाद रेस्क्यू दोपहर एक बजे बंद हुआ।