Explainer: बढ़ेंगे जानवर, लेकिन काटेंगे जंगल तो इंसानों से टकराव बढ़ेगा ही!

Explainer: बढ़ेंगे जानवर, लेकिन काटेंगे जंगल तो इंसानों से टकराव बढ़ेगा ही!


मध्य प्रदेश में कटते जंगलों के बीच वन्यप्राणियों की बढ़ती संख्या से इंसानों से जानवरों के टकराव की घटनाएं बढ़ रही हैं.

Human And Animal Conflict: बाघ, तेंदुए, हाथी हों या कोई और वन्यप्राणी, जब इनके रहवास के लिए जगह नहीं होगी, तो यह इंसानी बस्तियों में ही घुसेंगे. MP के अभ्यारण्यों से लगे इलाकों में ऐसा हो रहा है. रोज कहीं न कहीं से जानवरों के हमलों या जानवरों पर हमलों की खबरें आ रही हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 25, 2021, 12:50 PM IST

भोपाल. मध्य प्रदेश में मानव और वन्यप्राणियों के बीच संघर्ष का खतरा बढ़ता जा रहा है. इसका ताजा उदाहरण सीधी के संजय डुबरी पार्क के पास हैंकी गांव में सोमवार देर रात 23 फरवरी को हुई वो घटना है, जिसमें उत्पात पर उतारू 7 हाथियों (Elephants) के हिंसक झुंड ने दादा और उसके दो पोतों को कुचल डाला. घटना के बाद आक्रोशित लोगों की भीड़ ने रात में ही हाथियों को खदेड़े जाने की मांग को लेकर सड़क पर जाम कर दिया. यह कोई पहली घटना नहीं है. पहले भी अनूपपुर के मझौली गांव में खेत में काम करते हुए तीन मजदूरों हाथी रौंद चुके हैं और सुई डांड गांव में खेत में सो रहे किसान को सूंड से उठाकर चट्टान पर फेंक चुके हैं. अभी तक शहडोल, अनूपपुर, उमरिया में एक दर्जन से ज्यादा लोग की जान यह हाथियों के हिंसक झुंड ले चुके हैं और पिछले तीन साल से फसलें तबाह कर रहे हैं, घरों को रौंद रहे हैं.

समस्या ये है कि मप्र सरकार (MP Government) के पास छत्तीसगढ़, झारखंड से आए इन हिंसक हाथियों को वापस भेजने की कोई योजना नहीं है. वन विभाग की बेबसी यह है कि हाथियों के लिए उसके पास कोई फंड नहीं है. एलिफेंट प्रोजेक्ट (Elephant Project) फाइलों में अटका है. विशेषज्ञ कहते हैं कि इन हाथियों को यहां रहते लंबा अरसा हो चुका है, इसलिए इनकी वापसी बेहद मुश्किल है. इन हालातों में संकट से जूझ रहे लोगों और हाथियों के बीच संघर्ष छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है.

बढ़ते वन्यजीव, घटते जंगल

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