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श्योपुर8 घंटे पहले
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चंबल नदी किनारे घड़ियाल।
- 14 डॉल्फिन व 176 मगरमच्छ बढ़े, अब कुल 82 डॉल्फिन और 886 मगरमच्छ
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य की चंबल और पार्वती नदी में घड़ियालों सहित जलीय जीवों की वार्षिक गणना अब पूरी हो चुकी है। 14 दिनों तक चंबल और पार्वती नदी के 495 किमी लंबे दायरे में 44 घाटों पर की गई गणना में घड़ियालों के कुनबे में 317 घड़ियालों की बढ़ोत्तरी हुई है। इससे पहले चंबल अभयारण्य में वर्ष 2018 में रिकाॅर्ड 417 घड़ियालों की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी। इस बार अच्छी खबर यह भी है कि घड़ियालों के साथ-साथ डॉल्फिन का कुनबा भी बढ़ा है जबकि 177 मगरमच्छों की बढ़ोत्तरी भी दर्ज की गई है।
जानकारों के अनुसार, पूरे भारत, बांग्लादेश और नेपाल की नदियों में घड़ियाल की प्रजातियां पाईं जातीं हैं। इसमें सबसे ज्यादा 2176 घड़ियाल चंबल नदी में पाए गए हैं। यह संख्या विश्वभर में कुल घड़ियालों का 85 फीसदी है। दरअसल घड़ियालों को अति संकट ग्रस्त प्राणियों में गिना जाता है। ऐसे घड़ियालों के संरक्षण के लिए वर्ष 1984 में घड़ियालों का कुनबा जानने के लिए घड़ियालों की गिनती शुरू की गई थी।
वर्ष 2016 तक चंबल नदी में ही घड़ियालों की गिनती होती थी लेकिन इसी साल से पार्वती नदी के 60 किमी के दायरे में भी यह गिनती शुरू की गई। यह पूरा सर्वे वनरक्षक ज्योति दंडोतिया के नेतृत्व में 2 फरवरी से शुरू हुआ, जिसमें पार्वती नदी से लेकर चंबल नदी के पाली घाट और भिंड के अटार घाट तक सर्वे किया गया। इसमें प्रोजेक्ट मैनेजर आमिर खान और प्रवीण खान के साथ विशेषज्ञों की टीम भी मौजूद रही। खास बात यह है कि वर्ष 2014 से लेकर 2021 तक सात सालों में घड़ियालों के कुनबे में 1 हजार घड़ियालों की वृद्धि हुई है।
चंबल के अलावा इन नदियों में भी पाए जाते हैं घड़ियाल
यूं तो घड़ियालों की प्रजाति हर उस नदी में पाई जाती है जो गंगा में जाकर मिलती है लेकिन चंबल नदी में घड़ियालाें की सबसे ज्यादा प्रजाति पाई जाती हैं। देश में सबसे अधिक घड़ियाल चंबल नदी में हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर बिहार की गंडक नदी आती है जिसमें घड़ियाल पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश की गिरवा नदी, उत्तराखंड में राम गंगा नदी, नेपाल में नारायणी व राप्ती नदी में भी घड़ियालों की प्रजाति पाई जाती है। इसके अलावा देश में सोन घड़ियाल संरक्षण अभयारण्य और केन घड़ियाल संरक्षण अभयारण्य में भी घड़ियाल पाए जाते हैं। जानकारी के मुताबिक इन नदियों में अभी घड़ियालों का सर्वे किया जा रहा है। श्योपुर जिले की कूनो नदी में भी घड़ियालों का कुनबा छोड़ा गया है।
ऐस होती है घड़ियालों की गिनती
चंबल घड़ियाल सेंचुरी द्वारा हर साल फरवरी माह में ही घड़ियालों की गिनती की जाती है। गणना टीम का नेतृत्व कर रही ज्योति दंडौतिया के मुताबिक, सरीसृप यानी पानी में रहने के साथ धरती पर रेंगने वाले जानवरों को भोजन के अलावा अपनी बॉडी का टेंपरेचर भी मेंटेन करना होता है। फरवरी एक मात्र ऐसा महीना होता है जिसमें तापमान न तो ज्यादा गर्म होता है न ही ठंडा, जब यह बाहर निकलते हैं। तभी घड़ियालों और मगरमच्छों की गिनती आसानी से हो जाती है।
देश के 85% घड़ियाल
जलीय जीवों के सर्वे में घड़ियालों की संख्या 317 बढ़ी है। हमारे यहां अब 2176 घड़ियाल हो गए हैं। यह संख्या पूरी देश में पाए जाने वाले घड़ियालों की संख्या का 85 फीसदी है। यह हमारे लिए खुशी की बात है।
आरआर अटल, एसडीओ, घड़ियाल रेंज सबलगढ़
जानिए… साल दर साल कैसे बढ़ा घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन का कुनबा

देश और विदेश की नदियों में वर्ष 2020 में घड़ियालों की संख्या

(नोट: राम गंगा नदी छोड़कर अन्य क्षेत्रों के आंकड़े 2020 के हैं।)
देश के 85% घड़ियाल
जलीय जीवों के सर्वे में घड़ियालों की संख्या 317 बढ़ी है। हमारे यहां अब 2176 घड़ियाल हो गए हैं। यह संख्या पूरी देश में पाए जाने वाले घड़ियालों की संख्या का 85 फीसदी है। यह हमारे लिए खुशी की बात है।
आरआर अटल, एसडीओ, घड़ियाल रेंज सबलगढ़
वर्ष 2020 में कम हो गई थी डॉल्फिन और घड़ियालों की संख्या
वर्ष 2020 में चंबल नदी के 435 किमी दायरे में की गई गणना में घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या में गिरावट दर्ज की गई थी। वर्ष 2019 में 1876 घड़ियाल पाए गए थे, जबकि 2020 में यह संख्या 1859 रह गई थी। इससे पहले वर्ष 2018 की गणना के अनुसार चंबल नदी में 74 डॉल्फिन मिलीं थीं। वर्ष 2019 में सर्वे नहीं होने के बाद वर्ष 2020 में इनका एक बार फिर सर्वे किया गया तो संख्या घटकर 68 रह गई थी।