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उज्जैन16 घंटे पहले
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- दान राशि का उपयोग शिप्रा के लिए होगा
रामघाट पर जल योद्धा पंकज की शहादत से शिप्रा शुद्धिकरण न्यास के सदस्य भी आहत हैं। उनका कहना है कि घाट पर व्यावहारिक जरूरतों की पूर्ति के लिए 22 साल पहले न्यास का गठन किया गया था लेकिन इसके उद्देश्य सक्रियता के अभाव में अधूरे रह गए। सदस्य मिल-जुलकर फिर से जुटेंगे। घाट पर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए कार्ययोजना बनाएंगे।
शिप्रा शुद्धिकरण न्यास का गठन प्रवचनकार पं. कमलकिशोर नागर की पहल पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की मौजूदगी में किया गया था। न्यास में अध्यक्ष पदेन संभागायुक्त और सचिव पदेन निगमायुक्त हैं। न्यास में कोष के लिए 11 हजार रुपए की राशि से (प्रति) आजीवन सदस्य बनाए गए थे।
यह भी तय हुआ था कि रामघाट और महाकालेश्वर मंदिर में दानपेटियां लगाई जाएंगी। यह राशि शिप्रा की सफाई, घाटों के सौंदर्यीकरण और यात्रियों की सुविधा पर खर्च होगी। न्यास के सदस्य घाटों पर प्रशासन का सहयोग करेंगे। गठन के बाद कुछ समय तक सक्रियता नजर आई लेकिन इसके बाद न्यास गुमनामी में चला गया। नियमानुसार तो न्यास की नियमित बैठक होना चाहिए लेकिन यह नहीं हो रही।
न्यास के सदस्यों की यह जिम्मेदारी
आजीवन निधि देकर सदस्य बने समाजसेवी, व्यापारी, उद्यमी सदस्यों ने जिम्मेदारी ली थी कि वे साल में एक दिन रामघाट पर पूरे परिवार, मित्रों व परिचितों के साथ बिताएंगे। इस दौरान में घाट पर सफाई, सौंदर्यीकरण, पर्यावरण संरक्षण के कामों के साथ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा में भी भागीदारी करेंगे। न्यास में ऐसे पूरे साल के लिए 365 सदस्य बनाए जाना थे।
महाकाल में दानपेटी, कोष का उपयोग नहीं
न्यास को कोष में आजीवन सदस्यता निधि के अलावा महाकाल मंदिर में लगी दानपेटी का पैसा भी आता है। पिछली बैठक में महाकाल मंदिर की दानपेटी से 53.81 लाख रुपए आने की जानकारी दी गई थी। इसमें से 12.64 लाख रुपए खर्च बताया गया था। जिसमें 4.63 लाख रुपए से बिजली बिल चुकाना भी शामिल था। शेष राशि में से 40 लाख रुपए शिप्रा किनारे पौधारोपण के लिए मंजूर किए गए थे।
शिप्रा हमारी, हम ही संभालेंगे
न्यास के आजीवन सदस्य गोविंद खंडेलवाल कहते हैं शिप्रा हमारी है, हम ही संभालेंगे। जल्दी ही न्यास सदस्य जुटेंगे और नई कार्ययोजना बनाएंगे। पदाधिकारियों को इस संबंध में पत्र देकर आमंत्रित करेंगे। सुरेंद्रसिंह अरोरा कहते हैं- न्यास के कोष का उपयोग शिप्रा के लिए नहीं हो रहा तो यह जिम्मेदारी पदाधिकारियों की है। यह पैसा घाट पर सुविधाओं के लिए खर्च होना चािहए।
न्यास की जानकारी लेकर काम शुरू करेंगे
संभागायुक्त व न्यास अध्यक्ष संदीप यादव के अनुसार न्यास की जानकारी लेकर इसे सक्रिय करेंगे। यह शिप्रा और यात्रियों की सेवा में जनभागीदारी का अच्छा प्रयास है। इसके माध्यम से नागरिकों को शिप्रा के रखरखाव व यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रेरित किया जाएगा।