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- Digvijay, Sitting On The Ground Listening To The Speeches Of Others For Nearly Two Hours, Said The Farmer Leader Now Be Ready For Delhi
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रतलाम6 मिनट पहले
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जमीन पर किसानों के बीच बैठकर भाषण सुनते दिग्विजय सिंह।
2017 में रतलाम के जिस डेलनपुर गांव से किसान आंदोलन में हिंसा की शुरुआत हुई थी, उसी गांव से गुरुवार को किसान महापंचायत की शुरुआत हुई। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की मौजूदगी में यह आयोजन हुआ, लेकिन इस बार वे मंच पर नहीं बल्कि, जमीन पर बैठे थे। लंबे भाषण देने वाले नेताजी, दो घंटे तक दूसरों का ही भाषण सुनते रहे। यूं तो यह आयोजन गैर-राजनीतिक था, लेकिन किसान नेता भी मंच से भाजपा के नेताओं को कोसते रहे, कोई भाजपा का नाम लेने से बचा तो किसी ने खुलकर कोसा। पंचायत के लिए ट्रैक्टर ट्राॅली को मंच बनाया था, ट्राॅली पर हल भी रखा था।
राजनीतिक चर्चा से भी दिग्विजय सिंह का इनकार, किसान आंदोलन के लिए एक मुट्ठी अनाज मांगा
एक मुट्ठी अनाज और 5 रु. से शुरुआत
महापंचायत की शुरुआत एक मुट्ठी अनाज और 5 रुपए लेकर की गई। एक मुट्ठी अनाज दिल्ली में बैठे किसानों के लिए वहीं, 5 रुपए राम मंदिर के लिए मांगे गए। महापंचायत में कांतिलाल भूरिया, विक्रांत भूरिया, हर्ष विजय गेहलोत, शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र कटारिया, जिलाध्यक्ष राजेश भरावा, मयंक जाट, यास्मीन शेरानी मौजूद थीं। संचालन डीपी धाकड़ व राजेश पुरोहित ने किया। इधर, दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों के सवालों के जवाब भी नहीं दिए।
किसान आत्महत्या कर रहा, पूंजीपति नहीं…
दिल्ली से आए किसान नेता सरदार गुरनाम सिंह ने कहा कि शुद्ध मुनाफा कम होता जा रहा है। आज किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहा है, कोई पूंजीपति नहीं, जबकि पूंजीपति हजाराें करोड़ों रुपए का कर्ज लेकर बैठे हैं। सिर्फ काले कानून को ही नहीं, पूरी व्यवस्था को बदलने की जरूरत है। बीजेपी वालाें का इलाज करना ही होगा। अंबानी, अडानी, बाबा रामदेव के सामान का बहिष्कार कर दीजिए।
कंधा मिलाकर आगे बढ़ना है – भारतीय कृषक समाज के प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव ने कहा कि लड़ाई लंबी है, दिल्ली में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना है। डॉ. अजय मलेरा ने कहा कोरोना का झूठा डर दिखाया गया।
कोरोना को बताया झूठा डर – आयोजन में नेताओं ने भी ना तो मास्क पहना था, ना ही सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा। जबकि दिल्ली से आए नेताओं ने तो मंच से कोरोना को झूठा डर बताया। उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुट सकी।