गावस्कर ने बताया- गैरी सोबर्स ने 50 साल पहले कैसे की थी टीम में बने रहने में उनकी मदद

गावस्कर ने बताया- गैरी सोबर्स ने 50 साल पहले कैसे की थी टीम में बने रहने में उनकी मदद


सुनील गावस्कर ने 1971 में पहला टेस्ट मैच खेला था. (PTI)

सुनील गावस्कर ने कहा कि उनका करियर इतना लंबा नहीं खिंचता अगर सर गारफील्ड सोबर्स ने उन्हें उनके शुरुआती मैचों में दो जीवनदान नहीं दिए होते. गावस्कर ने 6 मार्च 1971 को वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था.

नवी मुंबई. भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने बुधवार को कहा कि उनका करियर इतना लंबा नहीं खिंचता अगर सर गारफील्ड सोबर्स (Gary Sobers) ने उन्हें उनके शुरुआती मैचों में दो जीवनदान नहीं दिए होते. इस दिग्गज बल्लेबाज ने छह मार्च 1971 को वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था. इसके बाद वे टेस्ट में 10,000 रन पूरे करने वाले पहले बल्लेबाज बने. उन्हें हाल ही में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण के 50 साल पूरे करने पर सम्मानित किया गया था.

सुनील गावस्कर ने यहां ‘जीवन का उपहार’ नामक कार्यक्रम में कहा, ‘मैं अपने पहले टेस्ट 12 रन पर खेल रहा था. मैंने ऑफ स्टंप से बाहर जाती गेंद पर ड्राइव किया और महानतम क्रिकेटर गारफील्ड सोबर्स के पास कैच गया. सीधा कैच उनके पास गया था जो उनके हाथ से छिटक गया।. मैं तब केवल 12 रन पर था और तब मुझे क्रिकेटिया जीवन का उपहार मिला था.’ उन्होंने कहा, ‘इससे मुझे अर्धशतक जमाने और अगले टेस्ट मैच के लिए टीम में जगह बनाए रखने का मौका मिला.’ भारत ने वह सीरीज जीती थी.

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सुनील गावस्कर ने कहा, ‘अगले टेस्ट मैच में मैं जब छह रन पर खेल रहा था तो मैंने आफ स्टंप से बाहर जाती गेंद स्लैश की जो तेजी से सर गारफील्ड सोबर्स के पास पहुंची. वह उसे नहीं देख पाए और जब तक वह संभल पाते गेंद उनकी छाती पर लगी और नीचे गिर गई. मैंने तब अपना पहला टेस्ट शतक लगाया था.’ अपने करियर में 125 टेस्ट मैचों में 10,122 रन बनाने वाले गावस्कर ने कहा, ‘इससे मुझे भारतीय टीम में अपना स्थान 16-17 साल तक बनाए रखने में मदद मिली. अगर वे दो जीवनदान नहीं मिलते तो मैं वहां तक नहीं पहुंच पाता.’








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