मध्य प्रदेश में शराबबंदी के लिए मनुहार की नहीं, सीधे प्रहार की जरूरत

मध्य प्रदेश में शराबबंदी के लिए मनुहार की नहीं, सीधे प्रहार की जरूरत


मुरैना कांड के बाद एमपी में शराबबंदी की लगातार उठ रही है मांग.
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

Liquor Ban: भोपाल में शराबी पति के पत्नी के हाथ-पैर काटकर जिस्म से अलग कर देने की घटना सूबे की सरकार को जगाने, सिस्टम को हिलाने और बताने के लिए काफी है कि प्रदेश में शराबबंदी क्यों जरूरी है. शराबबंदी के लिए मनुहार की नहीं, सीधे प्रहार और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है.

भोपाल. शराब किस तरह से महिलाओं की जिंदगी पर किस तरह कहर बनकर टूटती है, तबाह करती है, इसकी जिंदा मिसाल भोपाल के निशातपुरा थाना क्षेत्र में मंगलवार रात को हुई वो बर्बर घटना है, जिसमें शराब के नशे में डूबे एक पति ने फरसे से अपनी पत्नी के हाथ-पैर काट कर जिस्म से अलग कर दिए. पत्नी जिंदगी के लिए अस्पताल में मौत से जंग लड़ रही है. यह इकलौती दिलदहला देने वाली घटना सूबे की सरकार को जगाने, सिस्टम को हिलाने और बताने के लिए काफी है कि प्रदेश में शराबबंदी क्यों जरूरी है. शराबबंदी के लिए मनुहार की नहीं, सीधे प्रहार और मजबूत इच्छाशक्ति की जरूरत है. प्रदेश रोज मां-बहन-बेटियों के साथ हो रही इस तरह की घटनाओं से दो-चार हो रहा है.

सरकार भी यह मानती है कि शराब का नशा सबसे बड़ी सामाजिक बुराई है. शऱाबखोरी चोरी, बलात्कार, घरेलू हिंसा जैसे अपराधों की एक बड़ी वजह है. सरकार शराब के नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान पर तो करोड़ों रुपए खर्च करती है, लेकिन सारे अपराधों की जड़ इस शराब पर रोक याने शराबबंदी लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती. वजह साफ है कि शराब की बिक्री से होने वाली कमाई सरकार को ऐसा करने से रोकती है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने निशातपुरा की घटना के एक दिन पहले ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भोपाल में महिलाओं की सबसे बड़ी सभा में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर बड़ी-बड़ी बातें और घोषणाएं की थीं. वह एक अन्य कार्यक्रम में मंच से दहाड़ते भी सुनाई दिए. उनके हर वाक्य पर तालियां बज रहीं थीं. वह कह रहे थे कि ‘मैंने कहा था टाइगर अभी जिंदा है, टाइगर अब शिकार पर निकला है, शिकार नशे के कारोबारियों के खिलाफ, शिकार मां-बहन-बेटियों की जिंदगी बदतर बनाने वालों के खिलाफ.’ लेकिन निशातपुरा की घटना मुख्यमंत्री के दावे पर सवाल तो खड़े करती है.

उमा भारती भी शराबबंदी के पक्ष में, जनता भी सड़क पर

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