भास्कर EXPLAINER: फेंसिंग में ‘टच’ की स्कोरिंग आपरेटस मशीन से; तीन फाॅर्मेट, तीनों की तलवार भी अलग

भास्कर EXPLAINER: फेंसिंग में ‘टच’ की स्कोरिंग आपरेटस मशीन से; तीन फाॅर्मेट, तीनों की तलवार भी अलग


  • Hindi News
  • Sports
  • ‘Dainik Bhaskar EXPLAINER Fencing Update Touch’ Scoring Operatus Machine In Fencing; Three Formats, Sword Of Three Is Also Different

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फेंसर भवानी ने हाल ही में ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया। वह पहली भारतीय तलवारबाज हैं, जो ओलिंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

भारतीय तलवारबाज भवानी देवी ने हाल ही में टोक्यो ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई किया था।वे ओलिंपिक के लिए क्वालिफाई करने वाली भारत की पहली फेंसर हैं। फेंसिंग यानी तलवारबाजी सबसे पुराने खेलों में शुमार है। यह पहले ओलिंपिक (1896) से गेम्स में शामिल है और कभी ओलिंपिक से बाहर नहीं हुआ। इसमें खुद काे प्रतिद्वंद्वी के प्रहार से बचाते हुए टच (पाॅइंट) हासिल करने होते हैं। विस्तार से फेंसिंग के बारे में जानते हैं…

इसके तीन इवेंट हैं- ईपी, फाॅइल और सेबर। तीनों को वेपंस, टारगेट एरिया, इक्विपमेंट और नियम अलग करते हैं।

ईपी
वेपन की लंबाई 110 सेमी, वजन 750 ग्राम है। ब्लेड की नोक पर पिन प्वाइंट होती है। इसको 750 ग्राम के फोर्स से प्रेस करना होता है। टारगेट एरिया पूरा शरीर होता है।

फॉइल
वेपन की लंबाई 110 सेमी, वजन 500 ग्राम होता है। टारगेट एरिया धड़ (कमर से ऊपर, हाथ अाैर चेहरा छाेड़कर) है। विरोधी की जैकेट के फ्रंट में टच कराना हाेता है।

सेबर
​​​​​​​वेपन की लंबाई 105 सेमी और वजन 500 ग्राम होता है। इसकी फ्लेक्सिबिलिटी 4 सेमी होती है। टारगेट एरिया अपर बॉडी। कहीं भी प्रेस, कटिंग या थ्रस्टिंग कर सकते हैं।

जहां खेला जाता है, उसे पिस्ट कहते हैं:
पिस्ट एक फ्लोर या पट्‌टी है, जिस पर खेलते हैं। यदि खिलाड़ी बचने के लिए बाहर जाता है ताे पहले वार्निंग फिर प्रतिद्वंद्वी को अंक दिए जाते हैं। इसके बाहर का टच काउंट नहीं होता।

आपरेटस मशीन से स्कोरिंग
आपरेटस मशीन जैकेट, पिस्ट, वेपन से वायर से जुड़ी होती है। जैकेट-ब्लेड पर बारीक सर्किट वायर होते हैं। जैसे ही ब्लेड और जैकेट टच होते हैं वैसे ही करेंट से स्काेरिंग मशीन में लैंप जलते हैं।

गलती पर खिलाड़ी को कार्ड
​​​​​​​मैच के दाैरान रेफरी खिलाड़ी काे उसके व्यवहार पर तीन कार्ड दिखा सकता है। यलाे- चेतावनी, रेड- पेनल्टी और ब्लैक- डिस्क्वालिफाई (खिलाड़ी द्वारा गलत व्यवहार करने की स्थिति में)।

इंडिविजुअल और टीम इवेंट की अलग-अलग स्कोरिंग में 3 मिनट की बाउट होती है। इसमें पहले पांच टच हासिल करने वाला जीतता है। समय समाप्त होने पर ज्यादा अंक हासिल करने वाला विजेता होता है।

टीम
हर टीम में 4 सदस्य होते हैं। हर मेंबर को प्रतिद्वंद्वी टीम के तीनों फेंसर से खेलना होता है। इस तरह एक मैच में नौ बाउट होती हैं। मैच फर्स्ट 45 टच पर खेला जाता है।

ड्राॅ होने पर
​​​​​​​इंडिविजुअल या टीम इवेंट का मैच ड्रा होने पर रेफरी के द्वारा एक-एक मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है। इसमें किए गए टच मैच के स्कोर में जुड़ते हैं।

खबरें और भी हैं…



Source link