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सागर7 मिनट पहले
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- 2 अप्रैल को शुभ संयोग… रंगपंचमी, गुड फ्राइडे और जुमा एकसाथ
रंगपंचमी सामाजिक समरसता, गुड फ्राइडे त्याग व बलिदान और जुमा दीन-ईमान पर कायम रहने का संदेश देता है। आगामी 2 अप्रैल का दिन इन तीनों संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने वाला दिन होगा। इसकी वजह यह है कि इसी दिन रंगपंचमी, गुड फ्राइडे और जुमा एक साथ होंगे। जुमा व रंगपंचमी तो कई बार एक ही दिन मन चुके हैं, पर गुड फ्राइडे का रंगपंचमी के साथ होना संभवत: पहला मौका है।
धर्मगुरुओं राष्ट्रीय संत विपिन विहारी, शहर मुफ्ती मोहम्मद जावेद रजा कादरी मिस्वाही और फादर जयंत मेथ्यू का कहना है कि सभी धर्मों का सार मानवता की रक्षा व सामाजिक समरसता बनाए रखना है, जिसका पालन करने की याद दिलाने ही तीज-त्योहार और महापुरुषों की जयंती और बलिदान दिवस मनाए जाते हैं, जो नई पीढ़ी के लोगों के लिए प्रेरणादायी होंगे। कोरोना के चलते त्योहारों पर मास्क और दो गज दूरी के नियमों का ध्यान रखें। रंगपंचमी, गुड फ्राइडे और जुमा के एक ही दिन होने से शहर में एक बार फिर साम्प्रदायिक सौहार्द के नजारे दिखाई देंगे।
नई पीढ़ी के लोगों के लिए प्रेरणादायी होते हैं त्योहार, जयंती और बलिदान दिवस
हम उत्सव मनाएं पर प्रेम और कर्म के कर्तव्य के साथ : राष्ट्रीय संत
राष्ट्रीय संत पं. विपिन विहारी साथी का कहना है कि होली और रंगपंचमी पर जब लोग एक-दूसरे को गुलाल लगाने के साथ गले मिलते है, तो न उसकी जाति देखते हैं और न धर्म। इसीलिए होली उत्सव के समापन दिवस को रंग पंचमी कहते है, जो सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला पर्व है। दूसरी ओर राधा-कृष्ण की होली की तर्ज पर ही लोग यह पर्व मनाते हैं। राधा-कृष्ण का मतलब एक प्रेम है, तो दूसरा कर्मयोग। हम उत्सव मनाए पर प्रेम और कर्म के कर्तव्य के साथ। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने धूलि वंदन किया था। आशय ये है कि उस युग में विष्णु ने तेजोमय रंगों से अवतार कार्य का आरंभ किया।
जुमे का दिन अल्लाह के दरबार में रहम का दिन मानते हैं: मुफ्ती
सदर मुफ्ती मोहम्मद जावेद रजा कादरी मिस्वाही ने कहा कि जुमे का दिन इस्लाम में काफी अहम होता है। इसकी वजह यह है कि इस दिन को अल्लाह के दरबार में रहम का दिन माना जाता है। इस पूरे दिन में एक कोई वक्त ऐसा भी आता है, जिसमें की गई दुआ कुबूल होती है। इस दिन नमाज पढ़ने वालों के गुनाह भी अल्लाह माफ करते हैं। मान्यता है कि जुमे के दिन ही अल्लाह ने आदम को बनाया था। इसी दिन आदम की पृथ्वी पर पैदाइश हुई थी। जुमे के दिन दोपहर की नमाज के वक्त जोहर की नमाज की बजाए जुमा की नमाज होती है। आम दिनों से अधिक लोग जुमे की नमाज में शामिल होते हैं।
मानवता की रक्षा के लिए शुभ शुक्रवार को प्रभु ने दिया बलिदान : फादर
फादर जयंत मेथ्यू का कहना है कि प्रभु यीशु ने शुभ शुक्रवार के दिन ही मानवता की रक्षा, उद्धार और प्रेम के लिए बलिदान दिया था। उन्हीं की याद में इसाई समाज के लोग गुड फ्राइडे (शुभ शुक्रवार) मनाते हैं। यह दिन प्रभु ईसू के त्याग और बलिदान का स्मरण कराता है। ईसा मसीह परमेश्वर के बेटे थे, लेकिन उन्हें मृत्युदंड दिया गया, क्योंकि वह मनुष्य को पाप से मुक्ति दिलाना चाहते थे। यातनाओं को सहन करने के बावजूद उन्होंने हत्यारों की उपेक्षा करने के बजाए प्रार्थना करते हुए कहा था, ‘हे ईश्वर! इन्हें क्षमा कर दें।