प्रेरक पहल: रद्दी को रिसाइकिल करके बचा रहे पेड़, बना रहे नई स्टेशनरी

प्रेरक पहल: रद्दी को रिसाइकिल करके बचा रहे पेड़, बना रहे नई स्टेशनरी


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भोपाल11 मिनट पहलेलेखक: भीम सिंह मीणा

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रिसाइकिल रद्दी से बनाया जाता है यह सामान।

  • अब पर्यावरण परिसर के दफ्तरों को नहीं करनी पड़ती है फाइल, नोटपेड और विजिटिंग पेपर की खरीदारी

पर्यावरण परिसर में छोटी सी जगह में लगाई पेपर रिसाइकिल मशीन न केवल कचरा प्रबंधन कर रही है, बल्कि इससे एप्को को आर्थिक लाभ भी मिल रहा है। यह मशीन इनवायरोमेंटल प्लानिंग एंड काे-ऑर्डिनेशन ऑर्गनाइजेशन (एप्को) द्वारा 2006 में 13 लाख (वर्तमान कीमत 30 लाख) की लागत से लगाई गई थी।

मकसद था- एप्को से निकलने वाली कई टन रद्दी को रिसाइकिल करके दोबारा उपयोग किया जा सके। इस काम को एक डेमो की तरह शुरू किया गया था, ताकि लोग आए और देखें कि पेपर कैसे रिसाइकिल करते हैं। लेकिन अब यही मशीन पर्यावरण परिसर के सभी दफ्तरों में निकलने वाली भारी-भरकम रद्दी को रिसाइकिल करने में काम आ रही है।

एप्को में हर साल करीब 6 लाख की स्टेशनरी खरीदी जाती थी, लेकिन अब 98% स्टेशनरी रद्दी से बनकर तैयार होती है। दूसरे विभागों से आने वाली रद्दी को रिसाइकिल करके जो उत्पाद तैयार किए जाते हैं, उससे मशीन मेंटनेंस और लेबर खर्च निकल आता है। परिसर में मौजूद लगभग सभी दफ्तर अपनी रद्दी काे रिसाइकिल करके वापस स्टेशनरी खरीद लेते हैं। हालांकि इसके लिए कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन यह मार्केट की स्टेशनरी से कम होती है।

इस मशीन को देखकर कार्मल कान्वेंट स्कूल ने भी एक मशीन लगा ली है और वे उनके यहां निकलने वाली रद्दी को वही रिसाइकिल करेंगे। राजभवन भी अब खुद की मशीन लगाने की तैयारी कर रहा है। इसके दो फायदे होंगे। एक तो राजभवन की रद्दी रिसाइकिल हो जाएगी और महत्वपूर्ण दस्तावेज को लंबे समय तक रखने का झंझट भी कम हो जाएगा।
रिसाइकिल रद्दी से बनाया जाता है यह सामान
फाइल फोल्डर, विजिटिंग कार्ड फोल्डर, गेस्ट पर्ची, लिफाफे, नोटपेड और डायरी बनाई जाती है। ऑर्डर पर निमंत्रण पत्र और सूचना पत्र भी बनाए जाते हैं।

ग्राहक

  • एप्को
  • पीसीबी
  • रीजनल कॉलेज
  • स्टेट इलेक्ट्रानिक डेवलपमेंट कार्पोरेशन
  • विक्रम विवि
  • सिंहस्थ
  • एप्को में पेपर रिसाइकिल मशीन को हमने डेमाे के लिए बनाया था। लेकिन धीरे-धीरे यह जरूरत बन गई। अब हम पेपर रिसाइकिल करके दूसरे विभागों को बेच देते हैं। इसे देखकर अब दूसरे विभाग और संस्थाएं भी ऐसी ही मशीनें लगा रही हैं। कुछ कॉलाेनियों में भी बात चल रही है। इससे पर्यावरण को बहुत फायदा है। – अनूप श्रीवास्तव, चीफ इंजीनियर, एप्को

ऐसे करते हैं रिसाइकिल

एप्को के पीछे 1000 वर्गफीट जगह में रिसाइकिल प्लांट लगा है। यहां एकत्रित की गई रद्दी को छांट लिया जाता है। फाइलों में से तार निकालकर कागज अलग कर लिया जाता है। इसके बाद उसे दूसरी मशीन में मिक्स किया जाता है। फिर टब में पानी के भीतर पटक दिया जाता है। पानी से निकालकर तीसरी मशीन के अंदर ले जाकर इन्हें दबाकर निचोड़ दिया जाता है। फिर सूखने के लिए पेपर को अलग रख दिया जाता है।

सूखने के बाद पेपर को एक ही साइज में काटा जाता है और फिर इसकी पुताई की जाती है। प्रतिदिन 50 किलोग्राम कागज रिसाइकिल करने की क्षमता इस मशीन में है। इस काम के लिए चार कर्मचारी आउट सोर्स के जरिए रखे गए हैं। इनके वेतन पर खर्च होने वाले 50 हजार रुपए स्टेशनरी बेचकर निकल आते हैं।

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