कामयाबी की ओर प्रयोग: इस फाल्गुन जिले में अफ्रीकन केसर की रंगत, अगले हफ्ते नीमच मंडी में बिकेगी

कामयाबी की ओर प्रयोग: इस फाल्गुन जिले में अफ्रीकन केसर की रंगत, अगले हफ्ते नीमच मंडी में बिकेगी


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रतलाम31 मिनट पहले

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भारत में केसर की खेती से जेहन में जम्मू के किश्तवाड़ और कश्मीर के पंपोर का नाम आता है लेकिन यह तस्वीर रतलाम जिले के ग्राम रोजाना की है। यहां किसान मुकेश पाटीदार ने अफ्रीकन केसर की खेती शुरू की है। मुकेश बताते हैं कि पास के गांव गोंदीधर्मसी में आइसक्रीम का व्यवसाय करने वाले गोपाल पाटीदार ने दो साल पहले केसर के पौधे लगाए थे। उनसे जानकारी लेकर मैंने भी नीमच मंडी से केसर के 30 बीज खरीदे और खेत में लगाए। अब ये फूलों से लद गए हैं। सप्ताहभर में इन फूलों को डिब्बी पैकिंग में नीमच मंडी में बेचेंगे। सामान्यत: अफ्रीकन केसर के पौधे सितंबर में लगाते हैं और चार महीने में तैयार हो जाते हैं। हमने अफीम फसल के साथ नवंबर में लगाए थे इसलिए अब फूल आए हैं। मार्केट में केसर के रेट 75 हजार से डेढ़ लाख रुपए प्रतिकिलो हैं। उत्पादन 2.5 से 3 किलो प्रति हेक्टेयर होता है।

पानी का भराव नहीं हो
केसर की खेती के लिए रेतीली चिकनी बलुई और दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त माना जाता है. लेकिन वर्तमान में उचित देखरेख कर इसकी खेती राजस्थान जैसे शुष्क प्रदेशों में भी की जा रही है. इसकी खेती के लिए जमीन में पानी का भराव नही होना चाहिए। क्योंकि पानी भराव की वजह से इसके बीज सड़कर नष्ट हो जाते हैं।

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