एक्सीडेंटल, टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम किन वजहों से हो सकता है कैंसिल, जानिए यहां

एक्सीडेंटल, टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम किन वजहों से हो सकता है कैंसिल, जानिए यहां


नई दिल्ली. आज के दौर में सभी लोग अपनी जरूरत के मुताबिक सेफ्टी और बुरे वक्त में सहायता के लिए कोई न कोई इंश्योरेंस जरूरत लेते हैं. लेकिन कई बार इंश्योरेंस लेने के बावजूद आपको इसका क्लेम नहीं मिलता. 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे ही मामले की सुनवाई करते हुए क्लेम की राशि न देने का फैसला सुनाया है. जिसमें पॉलिसी धारक की शराब पीने के बाद दम घुटने से मौत हुई थी. जिसे सुप्रीम कोर्ट ने एक्सीडेंटल डेथ की कैटेगरी में न मानते हुए नॉमिनी को इंश्योरेंस का क्लेम देने से इनकार कर दिया. ऐसे में यदि आपने भी एक्सीडेंटल, टर्म और लाइफ इंश्योरेंस करा रखा है तो आपके लिए ये जानना जरूरी है कि, किन परिस्थितियों में आपको इंश्योरेंस का क्लेम नहीं मिलेगा. आइए जानते हैं इसके बारे में… 

एक्सीडेंटल इंश्योरेंस में इन वजहों पर नहीं मिलता क्लेम 

नशे में ड्राइविंग करना – अगर किसी व्यक्ति ने एक्सीडेंट इंश्योरेंस करा रखा है और नशे की हालत में कहीं उसका एक्सीडेंट हो जाता है. तो इंश्योरेंस कंपनी ऐसी स्थिति में मौत होने के बावजूद इंश्योरेंस का क्लेम रद्द कर सकती हैं.

कानून को तोड़ना – अगर किसी अपराध में शामिल होने या फिर कानून तोड़ने के नतीजे के रूप में पॉलिसी होल्डर की मौत हो जाती है. तो भी इंश्योरेंस कंपनी क्लेम देने से इनकार कर सकती है.यह भी पढ़ें: पहले डेवलपमेंट बैंकों को प्राइवेट किया, अब यूटर्न लेकर सरकार क्यों बना रही नया इंफ्रा बैंक, जानें वजह

भारत के बाहर मृत्यु – अगर पॉलिसी धारक विदेश में बसने की योजना बना रहा है और उसकी मौत विदेश में हो जाती है. तो इंश्योरेंस कंपनी कैंसिल कर सकती है. लेकिन इससे बचने का एक रास्ता है. इसके लिए आपको विदेश में बसने से पहले इंश्योरेंस कंपनी को बताना होगा. जिससे पॉलिसी होल्डर को क्लेम किये गये दावों को निपटाने के लिए अपने नए रेजिडेंट कंट्री के बारे में इंश्योरेंस कंपनी बता सके. हालांकि, टर्म इंश्योरेंस प्लान में ऐसी कोई बात नहीं होती.

आतंकवादी हमला – एक्सीडेंटल इंश्योरेंस प्लान के अंदर आतंकवादी हमलों को शामिल नहीं किया जाता है. इस तरह के दावों को मानवीय आधार पर निपटाया जाता है और वो भी तब जबकि नॉमिनी इस बाबत इरडा से संपर्क करें. लेकिन ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां इस तरह की घटनाओं के लिए बीमा कवर उपलब्ध नहीं कराती हैं.

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एडवेंचर स्पोर्ट्स – अगर आपने एक्सीडेंटल इंश्योरेंस का प्लान ले रखा है और आप बंजी जम्पिंग, स्काई डाइविंग जैसे खेल में भाग लेते है और आपकी जान चली जाती है. तो इंश्योरेंस पॉलिसी में कवर नहीं होती. वहीं कार रेसिंग और बाइक रेसिंग में शामिल होने के दौरान हुई मौत के लिए भी बीमा कंपनियां कोई भुगतान नहीं करती.

प्राकृतिक आपदा – प्राकृतिक आपदा जैसे कि भूकंप, बाढ़, सुनामी की वजह से हुई मौत आमतौर पर इंश्योरेंस प्लान के अंदर नहीं आते. हालांकि, इस तरह की आपदाओं को कवर करने के लिए आप एड-ऑन प्लान चुन सकते हैं.

टर्म इंश्योरेंस में इन वजहों से नहीं मिलता क्लेम

सबसे पहले जानना जरूरी है कि  टर्म इंश्योरेंस होता क्या है. केनरा HSBC ओबीसी लाइफ इंश्योरेंस के सीनियर रिलेशनशिप ऑफिसर आशय सारस्वत ने बताया कि,  इस तरह के इंश्योरेंस में लोग अपने परिवार को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए टर्म प्लान लेते हैं. जो सीमित अवधि के लिए निश्चित भुगतान दर पर कवरेज प्रदान करती है. यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु लाभ राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है. वहीं टर्म इंश्योरेंस में अभी तक मैच्योरिटी नहीं मिलती थी. लेकिन कुछ बीमा कंपनियों ने मैच्योरिटी देना शुरू कर दिया है.  

पॉलिसीधारक की हत्या
टर्म प्लान के क्लेम को बीमा कंपनी उस स्थिति में देने से मना कर सकती है अगर पॉलिसीधारक की हत्या हो जाए और उसमें नॉमिनी का हाथ होने की भूमिका सामने आए या उस पर हत्या का आरोप हो.

नशे की वजह से हो जाए मृत्यु
अगर टर्म पॉलिसी लेने वाला शराब के नशे में ड्राइव कर रहा हो या उसने ड्रग्स लिया हो तो इस स्थिति में मृत्यु होने की स्थिति में बीमा कंपनी टर्म प्लान की क्लेम राशि देने से इंकार कर सकती है.

किसी पुरानी बीमारी की वजह से मृत्यु
अगर टर्म पॉलिसी लेने से पहले से व्यक्ति को कोई बीमारी है और उसने पॉलिसी लेते हुए बीमा कंपनी को इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दी तो उक्त बीमारी से मौत होने पर बीमा कंपनी टर्म प्लान का क्लेम रिजेक्ट कर सकती है.

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आत्महत्या
इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने जीवन बीमा के तहत आत्महत्या के क्लॉज में 1 जनवरी 2014 से बदलाव किए हैं. इसलिए 1 जनवरी 2014 से पहले जारी हुई पॉलिसी में आत्महत्या के पुराने क्लॉज रहेंगे, जबकि बाद की नई पॉलिसीज में नए आत्महत्या क्लॉज को लागू किया जाएगा. हालांकि कुछ बीमा कंपनियां आत्महत्या के मामले में कवरेज देती हैं कुछ नहीं देती हैं.

हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम इन वजहों से हो सकता है कैंसिल

बीमारी छुपाने पर क्लेम हो सकता है रद्द- अगर आपको कोई पुरानी बीमारी है और आप हेल्थ इंश्योरेंस लेते है. जिसके बाद बीमा कंपनी को आपकी पुरानी बीमारी की जानकारी होती है. तो आपका हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम रद्द हो सकता है.

जान लें वेटिंग पीरियड के बारे में – बीमा कंपनियां जब पॉलिसी देती हैं तो उसमें कुछ बीमारियों का कवर तुरंत मिलना शुरू हो जाता है. जबकि कुछ बीमारियों के लिए इंतजार अवधि (वेटिंग पीरियड) होती है. इंतजार अवधि का मतलब होता है कि बीमा पॉलिसी लेने के बाद आपको कोई बीमारी होती है तो उसका कवर कितने दिन बाद मिलेगा.

 पॉलिसी से पहले स्वास्थ्य जांच जरूर कराएं – पॉलिसी खरीदने के बाद आप किसी बीमारी का इलाज कराते हैं और जांच में पता चलता है कि वह बीमारी काफी पुरानी और पॉलिसी लेने के पहले की है तो कंपनियां पुरानी बीमारी की शर्त का हवाला देकर क्लेम देने से मना सकती हैं. वह तर्क देती हैं कि पॉलिसी लेते समय उपभोक्ता ने बीमारी को छुपाया था और इस आधार पर क्लेम से इनकार कर सकती हैं. ऐसी स्थिति उपभोक्ता के लिए परेशानी का सबब बन जाती है.





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