जैन समाज के विश्व शांति महायज्ञ का समापन: विश्वशांति के लिए 432 श्रद्घालुओं ने 108 हवन कुंडों में 1 घंटे तक दीं आहुति

जैन समाज के विश्व शांति महायज्ञ का समापन: विश्वशांति के लिए 432 श्रद्घालुओं ने 108 हवन कुंडों में 1 घंटे तक दीं आहुति


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भिंड2 घंटे पहले

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बद्री प्रसाद बगिया में विश्वशांति के लिए सकल जैन समाज द्वारा आयोजित महामृत्युंजय जनकल्याण मंत्रानुष्ठान एवं विश्व शांति महायज्ञ का सोमवार को108 कुंडीय महायज्ञ के साथ समापन हुआ। महायज्ञ में 432 श्रद्घालुओं ने एक घंटे तक हवन कुंडों में भगवान को आहुतियां दी, साथ ही उन्होंने भगवान आदिनाथ स्वामी से विश्वशांति के लिए प्रार्थना की।
गौरतलब है कि बद्री प्रसाद बगिया में 108 कुंडीय महायज्ञ आयोजन के लिए 108 हवन कुंड बनाए गए थे। सोमवार सुबह 9.35 पर हवन शुरू हुआ। इस दौरान एक हवन कुंड पर चार-चार श्रद्घालु बैठक हुए थे। वहीं वेद मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्घालुओं ने सुबह10.35 तक भगवान आदिनाथ को आहुतियां दी। मंत्रोच्चारण की गूंज से पूरा वातावरण धर्म मय हो गया।
णमोकार मंत्र से संकट दूर होते हैंः आचार्य सौभाग्य सागर
धार्मिम कार्यक्रम के दौरान आयोजित धर्मसभा में आचार्य सौभाग्य सागर महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति करने वाले भक्त के सारे काम स्वतः ही बन जाते हैं। णमोकार मंत्र की आराधना से जहां सभी संकट दूर होते हैं। वहीं भक्तामर के स्मरण से संकट के सभी ताले टूट सकते हैं।

आचार्यश्री ने श्रीपाल और मैना सुंदरी की कहानी सुनाते हुए बताया कि श्रीपाल को कुष्ठ रोग था मैना सुंदरी ने उसके निवारण का उपाय जैन मुनिराज से पूछा था। मथुरा नगर में महामारी से बचने का उपाय जैन मुनिराज से पूछा था। अंजना ने वन में भटकने का कारण मुनिराज से पूछा था। जैन संत सदैव मनुष्य को सही मार्ग दिखाने का काम करते हैं।

शांतिधारा अभिषेक किया

महायज्ञ समापन के बाद श्रद्घालुओं ने कार्यक्रम स्थल पर भगवान आदिनाथ को शांतिधारा अभिषेक सुबह 11 से 11.30 बजे तक किया। इस दौरान मौजूद श्रद्घालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।

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