कोरोना से 8 साल के बच्चे की मौत: 5 दिन झाबुआ में इलाज चला, 5 दिन पहले इंदौर में भर्ती किया, 23 मार्च की रात रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन तब तक संक्रमण बहुत फैल चुका था

कोरोना से 8 साल के बच्चे की मौत: 5 दिन झाबुआ में इलाज चला, 5 दिन पहले इंदौर में भर्ती किया, 23 मार्च की रात रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन तब तक संक्रमण बहुत फैल चुका था


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इंदौर/झाबुआ18 मिनट पहले

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गुरुवार शाम को बच्चे ने चोइथराम अस्पताल में आखिरी सांस ली।

  • पिता बोले, डॉक्टर सबसे पहले टेस्ट कराएं, परिजन थोड़ी भी शंका होने पर टेस्ट के लिए कहें, ताकि आगे से कोई अपना बच्चा न खो दें

कोरोना वायरस की चपेट में आने से एक 8 साल के बच्चे की मौत हो गई। बच्चा झाबुआ जिले के गोपाल कॉलोनी का रहने वाला था। 16 मार्च को उसे बुखार आया था, जिसके बाद डॉक्टरों को दिखाया। बच्चे की हालत देख परिजन इंदौर लेकर आए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यहां पर कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पाॅजिटिव आई, लेकिन डॉक्टरों को इतना समय नहीं मिल पाया कि उसे बचा सकते। झाबुआ ही नहीं इंदौर जिले में भी पहली बार इतनी कम उम्र के किसी मरीज की कोरोना से मौत हुई है। इसके पहले 14 से 15 साल के बच्चे की जरूर इस वायरस से मौत हो चुकी है।

मिली जानकारी अनुसार बच्चे की तबीयत 16 मार्च को खराब हुई थी। उसे बुखार हुआ तो परिजन ने स्थानीय डॉक्टर को दिखाया। 20 मार्च तक यहीं उपचार चला। तबीयत बिगड़ती देख परिजन 21 को इंदौर ले आए। झाबुआ में डाॅक्टरों ने कोरोना टेस्ट नहीं कराया था। इंदौर में निजी अस्पताल में बच्चे को भर्ती करने के बाद तत्काल उसके कोरोना सैंपल टेस्ट के लिए भेज दिए गए। 23 मार्च को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिसके बाद तत्काल उसे टी चोइथराम अस्पताल के कोविड वार्ड में शिफ्ट किया गया। हालांकि इतने दिन से बीमार बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन लेवल कम होता गया और जरूरी अंगों की क्षमता कम हो गई। डाॅक्टरों की लाख कोशिश के बाद भी बच्चे को नहीं बचाया जा सका। उसने 25 तारीख को देर शाम अंतिम सांस ली। शुक्रवार सुबह परिजन शव लेकर झाबुआ के लिए रवाना हो गए।

डॉक्टरों ने डेंगू के लक्षण बताए
मासूम के पिता ने बताया कि 16 तारीख को बेटे की तबीयत खराब हुई थी। उसे झाबुआ में ही बच्चों के डॉक्टर को दिखाया। 18 तारीख तक उनका उपचार चला, लेकिन सुधार नहीं हुआ। उसे उल्टी-दस्त भी होने लगे। डॉक्टर से कहा तो भरोसा दिलाया, ठीक हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 19 तारीख को रात तबीयत ज्यादा बिगड़ गई तो 20 को झाबुआ में ही निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में ब्लड में संक्रमण काफी ज्यादा मिला, प्लेटलेट्स लगातार कम हो रहे थे, लीवर में सूजन थी और फेफड़ों में पानी भर रहा था। डॉक्टरों ने डेंगू के लक्षण बताए। उनसे कहा कि कोरोना सैंपल ले लीजिए तो तैयार हो गए। लेकिन तबीयत लगातार बिगड़ने से हम बेटे को इंदौर लेकर आए।

23 तारीख को रिपोर्ट पॉजिटिव आई

इंदौर में एक निजी अस्पताल में भर्ती किया। तब तक संक्रमण और बढ़ गया था। ब्लड प्रेशर गिर रहा था, हार्ट ठीक से पम्प नहीं कर पा रहा था। उसके कोरोना सैंपल लिए गए। जबसे यहां आया, ऑक्सीजन पर ही था। 23 तारीखी की रात तबीयत ज्यादा खराब हुई तो डॉक्टरों ने फोन कर कोरोना की रिपोर्ट पूछी। ये पॉजिटिव निकली। इसके बाद हमें सलाह दी गई कि दूसरे अस्पताल ले जाएं। दो अस्पताल वालों ने बेड नहीं होने का कहकर लेने से इंकार कर दिया। टी चोइथराम में मुश्किल से एडमिट कराया। यहां भर्ती करने के बाद से स्टेबल था। अचानक गुरुवार दोपहर में डाॅक्टरों ने बताया, वेंटिलेटर पर डालना पड़ेगा। शाम तक बेटे के शरीर में जान नहीं बची। सब कुछ खत्म हो गया।

पिता बोले – बच्चे हों या बड़े बुखार आए तो तत्काल अच्छे डॉक्टर को दिखाएं
ये खबर परेशान करने वाली है। एक साल के कोरोना काल में अब तक आई खबरों में सबसे ज्यादा दुखी करने वाली और चिंता पैदा करने वाली घटना है। ये एक चेतावनी भी है कोरोना को हल्के में लेने वालों के लिए। कोरोना से जंग हारने वाले बालक के पिता भी कहते हैं, बच्चों या बड़ों को बुखार आए या किसी तरह का लक्षण दिखे तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं। कोरोना टेस्ट के लिए जरूर कहें। डॉक्टर भी सबसे पहले कोरोना टेस्ट कराएं। अगर मेरे बेटे के मामले में ऐसा हुआ होता तो संभवत: संक्रमण का पता पहले चल जाता और उसकी जान बच जाती। और किसी को अपना बेटा या बेटी नहीं खोना पड़ जाए, इसलिए टेस्ट जरूर कराएं।

डॉक्टर बोले – बच्चे की हालत बहुत सीरियस थी
चोइथराम अस्पताल के डेप्युटी डायरेक्टर डॉ. अमित भट्‌ट से बात की तो उन्होंने बताया कि बुधवार को बच्चे को निजी अस्पताल से हमारे यहां रैफर किया गया था। बच्चा जब तक हमारे यहां पर आया उसकी हालत काफी गंभीर हो चुकी थी। उसे बचाने की बहुत कोशिश की गई, लेकिन गुरुवार शाम को उसका निधन हो गया।

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