जल्दबाजी: तिघरा से जलालपुर तक लाइन डालने का काम अधूरा, मोतीझील से पहुंचाएंगे नए प्लांट पर पानी

जल्दबाजी: तिघरा से जलालपुर तक लाइन डालने का काम अधूरा, मोतीझील से पहुंचाएंगे नए प्लांट पर पानी


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ग्वालियर3 घंटे पहले

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  • आपात स्थिति में शहर की पेयजल सप्लाई पर पड़ सकता है असर

जलालपुर में बन रहे वाटर ट्रीटमेंट से 20 से पानी की सप्लाई शुरू करने का दावा करने के बाद फंसे नगर निगम के अफसर अब मोतीझील प्लांट के रिजर्वायर से नए प्लांट तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था कर रहे हैं। कारण, तिघरा बांध से नए प्लांट तक बिछाई जा रही रॉ वाटर लाइन का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है।

ऐसे में अफसरों ने प्लांट को चालू करने के लिए बीच का रास्ता निकाल लिया है। इसके लिए पीएचई के अधिकारियों के निर्देश के बाद मोतीझील के रिजर्वायर पर काम शुरू हो गया है। इन दिनों जलालपुर से मोतीझील प्लांट तक डल चुकी 1600 एमएम ग्रेविटी लाइन को रिजर्वायर की रॉ वाटर पंपिंग लाइन से जोड़ा जा रहा है। यह काम पूरा होते ही रिजर्वायर में लगे 10 एमजीडी के पंप से पानी नई ग्रेविटी लाइन में डाला जाएगा। हालांकि अफसरों द्वारा निकाले गए बीच के रास्ते से आपात स्थिति में शहर की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। किसी दिन तिघरा से प्लांट तक आने वाले पानी की लाइन में गड़बड़ी हुई तो रिजर्वायर में सप्लाई के लायक पानी नहीं बचेगा। गौरतलब है कि अमृत योजना का प्रोजेक्ट 17 महीने लेट हो चुका है। अब आयुक्त शिवम वर्मा के निर्देश पर 20 अप्रैल से नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से टंकियों को भरने का काम शुरू करने के लिए तैयारियां तेजी से चल रही है।

डेढ़ दिन का पानी रहता है रिजर्वायर में
मोतीझील के पुराने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पर बने रिजर्वायर में डेढ़ दिन का पानी सुरक्षित रहता है। इसमें 13 एमसीएफटी पानी रखा जाता है। जब कभी तिघरा से प्लांट के बीच की सप्लाई बाधित होती है तो इस पानी से सप्लाई शुरू कर दी जाती है। अब जलालपुर के ट्रीटमेंट प्लांट के लिए रिजर्वायर का उपयोग करने से शहर में सप्लाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि पीएचई के अफसर नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को भरने के लिए तिघरा जलाशय से ज्यादा पानी की डिमांड करेंगे। पानी की डिमांड को लेकर अधिकारी मंथन करने में लगे हुए हैं। उक्त पानी 1200 एमएम के ग्रेविटी लाइन के माध्यम से रिजर्वायर में पहुंचाया जाएगा।

21.5 किमी लंबी है ग्रेविटी लाइन
अमृत प्रोजेक्ट के तहत यह काम झांसी की क्रांकीट उद्योग कंपनी को मिला है। उक्त कंपनी से सात अक्टूबर 2017 को अनुबंध हुआ था। इसे 1600 एमएम व्यास वाली मेन पंपिंग लाइन डालने का काम 31 अक्टूबर 2019 तक पूरा करना था। इस पर 42.30 करोड़ रुपए की राशि खर्च हो रही है। अभी कुलैथ क्षेत्र में 800 मीटर लाइन डालने का काम शेष है।

रिजर्वायर से भरेंगे नया प्लांट

  • कुलैथ क्षेत्र में लाइन डालने का काम बचा है। हमें 20 अप्रैल तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को भरकर नई टंकियों को भरना है। इसे ध्यान में रखकर मोतीझील रिजर्वायर से पानी लेकर नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को भरेंगे। इस दौरान लाइन और टैंक की टेस्टिंग का काम किया जाएगा। – जागेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री पीएचई

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