मध्य प्रदेश के कॉलोनाइजर अब कस्टमर की आंखों में धूल नहीं झोंक पाएंगे. (सांकेतिक तस्वीर)
Good News: सरकार ने वैध-अवैध कॉलोनियों से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. अब कोई भी कॉलोनाइजर धोखाधड़ी या मंजूर हुए ले-आउट में गड़बड़ नहीं कर सकेगा. ऐसा करने पर उसे 7 साल की सजा हो जाएगी.
इस नए विधेयक में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को रोकने के साथ-साथ वैध कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षा दे दी गई है. इस विधेयक में वैध कॉलोनियों को लेकर 2 प्रावधान किए गए हैं.
सरकार ने ये किए हैं नए प्रावधान
2 प्रावधानों में से पहला है- यदि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में किसी तरह का विकास कार्य या सड़क अधूरी छोड़ी तो उस कॉलोनी में पड़े कॉलोनाइजर के खाली प्लॉट को मॉर्टगेज करके मिलने वाली राशि से वह कार्य पूरा होगा या राजस्व नियमों के तहत राशि की वसूली होगी. दूसरा है- कॉलोनाइजर ने मंजूर ले-आउट का यदि उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी, सात साल तक सजा और दस लाख रुपए जुर्माना होगा.इस तरह चलता रहा एक्ट, हाई कोर्ट ने रद्द की थी कानून की धारा
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 1998 में मप्र कॉलोनाइजर नियम 1998 में नियम-15(क) बनाया था. इससे 30 जून 1998 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध किया गया. इसके बाद 30 जून 2002 तक, 30 जून 2007 तक, 21 दिसंबर 2012 तक और आखिरी बार दिसंबर 2016 तक कट चुकी अवैध कॉलोनियों को वैध करने के फैसले लिए गए. अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए सावर्जनिक सूचना जारी हुई. नगरीय निकायों ने आपत्तियां सुनी.
हाई कोर्ट ने दिया अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश
इसके बाद 1788 कॉलोनियों के ले-आइट, विकास शुल्क तय किए गए. इन कॉलोनियों से विकास शुल्क लेकर और राशि जमा कराने के बाद नियमितीकरण शुरू किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 3 जून 2019 को राज्य शासन की धारा 15 (क) को रद्द कर दिया. हाई कोर्ट ने नगर पालिक अधिनियम 1956 की धारा 292-ई के प्रावधान के पालन में धारा 15(ए) को अवैध करार दिया. इसके साथ ही अवैध कॉलोनियों के विरूद्ध कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए. पूरी प्रक्रिया ठप पड़ गई. अब बताया जा रहा है कि नए रूल बनते समय कट ऑफ डेट को नवंबर 2028 किया जा सकता है.