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सागर/दमोह3 मिनट पहले
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प्रतीकात्मक फोटो
- दमोह जिले के मड़ियादो थाना क्षेत्र के मामले में न्यायालय ने सुनाया फैसला
बलात्कार के मामले में अदालत ने अनोखा फैसला दिया है। अपचारी किशोर ने गांव की नाबालिग बालिका को अपने साथ ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। अपचारी किशोर की उम्र को देखते हुए न्यायालय द्वारा आदेश दिया गया कि उसे 6 माह तक वृद्धाश्रम में सेवा करना पड़ेगी। साथ ही तीन हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
अभियोजन मीडिया सेल प्रभारी सतीश कपस्या ने बताया मड़ियादो थाना क्षेत्र में 23 जुलाई 2018 को नाबालिग अपनी चाची के साथ बाजार आई थी। तभी बालिका की चाची बाजार में सौदा लेने लगी और बालिका बस स्टैंड पर खड़ी थी। सौदा लेकर लौटी चाची ने आसपास देखा तो उसे बालिका नहीं मिली। फिर वह घर पहुंची तो बालिका की मां ने पूछा कि बेटी नहीं आई। चाची ने बोला कि लगता है वह 3 बजे की बस में बैठकर कहीं चली गई है।
बालिका की मां को संदेह हुआ कि बालिका गांव के ही बालक के साथ कहीं चली गई है। बालिका कहां गई है इसकी कोई जानकारी नहीं है। इस घटना की रिपोर्ट उसकी मां ने थाना मडियादो में 26 जुलाई 2018 को दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में जांच कर किशोर को गिरफ्तार किया। मामला न्यायालय में पेश किया गया। जांच अधिकारी ने मामले में जांच प्रस्तुत की है। जिसमें पाया गया है कि बालक के पिता एवं बालक वर्तमान में मजदूरी करके घर चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है घर में शिक्षा के माहौल का अभाव है।
वहीं किशोर एवं बालिका एक ही गांव के निवासी हैं तथा पूर्व में परिचित थे और उनमें आपस में बोलचाल था। बढ़ती उम्र के प्रभाव एवं उचित देखरेख एवं नियंत्रण की कमी के कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया।मामले में विचार करते हुए और जांच अधिकारी द्वारा पेश की गई रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए व किशोर न्याय (बालको की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम का अपराध किया गया है। अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए मामले की धारा 376 (3) एवं 366 के लिए किशोर को दोषी पाया है। जिसे 3 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई। साथ ही आदेश दिया कि बाल अपचारी (किशोर) को वृद्धाश्रम में छह माह तक सेवा करना होगी। शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक बीएम शर्मा द्वारा की गई।
मीडिया प्रभारी कपस्या ने बताया कि ऐसे बालक जिनकी उम्र 16 वर्ष के आसपास है और वह मानसिक स्थिति को समझ सकता है, जिससे उसका मामला सेशल कोर्ट में पहुंचाया गया था। जहां पर बालक की किशोरावस्था को देखते हुए न्यायालय ने उसे अन्य सजा न देते हुए जुर्माना एवं वृद्धाश्रम में सेवा करने की सजा से दंडित किया है।