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- When The Government Asked For Fake Documents, It Gave A Rounding Answer, Questions Also Arose On The Certificate Issued By The Aegis Company
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भोपाल12 मिनट पहलेलेखक: राधेश्याम दांगी
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शुरु हुई डायल-100 के 642 करोड़ के मामले की जांच।
मप्र पुलिस द्वारा इमरजेंसी सर्विस के लिए इस्तेमाल डायल-100 गाडि़योंं के 642 करोड़ रुपए के टेंडर में शासन ने दूरसंचार पुलिस अधिकारियों से जवाब-तलब किया है। इस पर जिम्मेदारों ने ठोस जवाब देने के बजाय गोलमोल जवाब देकर खानापूर्ति कर दी।
शासन के पास दूरसंचार (पुलिस रेडियो) का जवाब पहुंचा तो टेंडर में अशोका बिल्डकॉन व मेसर्स एबीपी ट्रैवल्स एंड फेसिलिटी मैनेजमेंट प्रालि (ज्वाइंट वेंचर) ने उड़ीसा की एजिस लिमिटेड कंपनी द्वारा जारी अनुभव प्रमाण पत्र लगाया है, वह भी संदेह के घेरे में आ गया है।
इस अनुभव पत्र में जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, वे विरोधाभासी है। अब गृह विभाग ने पुलिस रेडियो द्वारा भेजे गए जवाब, जीवीके ईएमआरआई द्वारा की गई शिकायत और प्रस्तुत दस्तावेज और गृह मंत्री को की गई शिकायतों के बिंदुओं की अलग से छानबीन शुरु कर दी है।
जीवीके ईएमआरआई ने एजिस लिमिटेड कंपनी के अनुभव प्रमाण पत्र पर भी संदेह जताया, जिसे गृह विभाग ने गंभीरता से लिया है। वहीं, जीवीके ईएमआरआई कंपनी ने आरोप लगाया है कि अशोका बिल्डकॉन कंपनी ने आईबीएम कंपनी का फर्जी दस्तावेज उपयोग कर टेंडर में एल-1 स्थान हासिल किया है।
इन बिंदुओं के कारण उठ रहे दस्तावेजों पर सवाल
- अशोका बिल्डकॉन कंपनी ने एजिस लिमिटेड कंपनी का अनुभव प्रमाण पत्र टेंडर में लगाया। इसमें बताया गया कि 750 से अधिक एजेंट और देहरादून, अजमेर, पूणे, भूवनेश्वर, गुहावटी और बैंगलुरु के 6 लोकेशन पर 500 सीटर सेंटर में लोग काम कर रहे हैं। जबकि इसी पत्र में शहरवार 1265 सीटें और 1597 एजेंट की संख्या दर्शाई गई है। पत्र में एक जगह 750 एजेंट और 500 सीटों का हवाला दिया गया, वहीं इन शहरों में कार्यरत 1265 सीटें और 1597 एजेंट दर्शाए गए हैं, जो विरोधाभासी है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि एजिस लि. कंपनी के लेटरहेड पर लिखे गए फोन नंबर व पता गलत है। यह लेटर हेड भी जाली है।
- अशोका बिल्डकॉन द्वारा पेश आईबीएम इंडिया प्रालि के लेटर पर एडीजी संजय कुमार झा (रेडियो) ने आईबीएम प्रबंधन से यह तो पूछा कि लेटर जारी करने वाला क्या आईबीएम का कर्मचारी है, लेकिन यह नहीं पूछा क्या यह लेटर आईबीएम प्रबंधन ने जारी किया है। आज तक इस पत्र की पुष्ठी नहीं हो पाई। इस पत्र की पुष्टि जीवीके ईएमआरआई कंपनी ने की तो आईबीएम कंपनी ने इसे फर्जी बताया, वहीं पुलिस इसे सही ठहरा रही।
- तत्कालीन एसएसपी (रेडियो) साकेत कुमार पांडेय ने आईबीएम से इस पत्र की पुष्ठि करने के लिए पत्राचार किया तो दूसरे ही दिन पांडे को पद से हटा दिया।
अधिकारियों को भी है आशंका
मार्च, 20२0 और सितंबर, 2020 में भी टेंडर निकाला था, लेकिन कोई भी कंपनी नहीं आई। यह तीसरा टेंडर कॉल है, जिसमें अशोका बिल्डकॉन और जीवीके ईएमआरआई दो ही कंपनियां शामिल हुई। इसमें भी जाली दस्तावेजों के की शिकायतों के कारण मप्र पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इससे देशभर में मप्र पुलिस-रेडियो की छवि खराब हो रही। प्रतिक्रिया सामने आई है कि मप्र पुलिस तीन बार में भी सफल टेंडर नहीं कर पाई। गंभीर किस्म की शिकायतों के चलते यह टेंडर अधर में है। निरस्त होता है तो चौथे टेंडर कॉल में सफल होने की उम्मीद नहीं है। देशभर में मप्र पुलिस की साख पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। अधिकारियों को भी आशंका है कि चौथी बार भी सफलता नहीं मिलेगी।
- शासन को हमने हर बिंदु पर प्रेजेंटेशन दे दिया है। आईबीएम ने आज तक हमारे ई-मेल का जवाब नहीं दिया। इसके चलते पूर्व में दिए गए जवाब को ही सही माना जाएगा। – संजय कुमार झा, एडीजी, रेडियो
- जीवीके ईएमआरआई अपनी शिकायतें कर रहा है, हमारे सब कागज सही है, इसलिए हम शांत है। शिकायत के सारे बिंदु पर हम सही है। – जितेंद्र रमानी, सीईओ, एचआर, अशोका बिल्डकॉन