अस्पताल में 80 पेशेंट एडमिट थे. सभी को बचा लिया गया.लेकिन इनमें से 4 मरीज झुलस गए.
Ujjain. अस्पताल (Hospital) में इमरजेंसी लाइट नहीं थी. इसके आलावा धुआं निकला होगा तो क्या अस्पताल में स्मोक अलार्म नहीं था, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सकता था. फायर एस्टुंगिशर ने भी काम नहीं किया.
रविवार को उज्जैन के प्राइवेट पाटीदार अस्पताल में भीषण आग लग गयी थी. अस्पताल में उस वक्त करीब 80 मरीज एडमिट थे जिनमें से 24 कोविड पेशेंट्स थे. गनीमत रही कि किसी की जान नहीं गयी लेकिन 4 मरीज़ बुरी तरह झुलस गए.
अंधेरे में ज़िंदगी बचाने का प्रयास
आग लगने के ठीक बाद का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. आग लगने के कारण अस्पताल में भयानक अफरा तफरी और चीख पुकार मच गयी थी. स्टाफ अपनी और मरीज़ों की जान बचाने के प्रयास में जुटा हुआ था. कोविड वॉर्ड जहां आग लगी थी वहां पर अस्पताल प्रबंधन के लोग मोबाइल टॉर्च की रौशनी में मरीजों की तलाश कर रहे हैं. पूरा वॉर्ड धुएं से भरा हुआ था. एक जगह आग भी दिखाई दे रही है. उसके बीच करीब एक दर्जन से अधिक लोग मरीजों की तलाश कर रहे हैं.

न अलार्म, न इमरजेंसी लाइट और आग बुझाने के इंतज़ाम
मरीज के रिश्तेदारों ने बताया कि आग लगने से दो घंटे पहले पंखा सुधारने के लिए एक इलेक्ट्रिशियन वॉर्ड में आया था. उसके काम करने के दौरान ही आग लगी है. अब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में खामी पर सवाल खड़े हो रहे हैं. अस्पताल में इमरजेंसी लाइट की व्यवस्था नहीं थी. इसके आलावा धुआं निकला होगा तो क्या अस्पताल में स्मोक अलार्म नहीं था, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सकता था. फायर एस्टुंगिशर ने भी काम नहीं किया. वरना आग इतनी नहीं फैलती. दूसरा ये भी कि मरीजों को उसी रास्ते से अस्पताल के बाहर लाया गया जहां धुआं भरा हुआ था. क्या अस्पताल में कोई आपातकालीन द्वार नहीं था. ये सब जांच का विषय है.