मध्य प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर खतरनाक होती जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
MP Corona Infection: मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण पहले से ज्यादा ताकतवर होकर हमला बोल रहा है. इस कारण लोगों का सब्र टूट रहा है, अस्पतालों में डॉक्टर-परिजन भिड़ रहे हैं, कहीं पुलिस से तनातनी हो रही तो कहीं लॉकडाउन में पत्थरबाजी हो रही है. प्रवासी मजदूर फिर घर-वापसी करने लगे हैं.
भोपाल. कोरोना महामारी की दूसरी लहर पहले से ज्यादा खतरनाक बनकर दर्द का वो सैलाब लेकर आई है, जिसमें मध्य प्रदेश में बदहवासी, बदइंतजामी और अराजकता के वैसे ही खौफनाक मंजर दिख रहे हैं, जो हमने पिछले साल 24 मार्च को अचानक देशव्यापी लॉकडाउन के बाद अप्रैल-मई के महीनों में देखे थे. कोरोना संक्रमण फिर पहले से ज्यादा ताकतवर होकर, रूप बदल-बदल जानलेवा हमला बोल रहा है. लाशों के ढेर लग रहे हैं. श्मशानों, कब्रिस्तानों में वेटिंग चल रही है. इलाज के लिए लोगों को न ऑक्सीजन मिल रही है, न दवाएं. लोगों का सब्र और हौसला टूट रहा है. अस्पतालों में डॉक्टर-परिजन भिड़ रहे हैं. कहीं संयम खोकर पुलिसवाले बर्बरतापूर्वक संक्रमितों को पीट रहे हैं. कहीं लॉकडाउन के दौरान पत्थरबाजी हो रही है. आलम यह है कि रोजगार की तलाश में बाहर गए लोग लंबे लॉकडाउन के डर से वापस लौट रहे हैं. जिसे जो साधन मिल रहा है, घर वापसी कर रहा है. ट्रक-ट्राले,ट्रेन, बसें सब फुल हैं. मध्यप्रदेश के अधिकांश शहर लॉकडाउन की गिरफ्त में है. भोपाल में भी 19 अप्रैल तक कोरोना कर्फ्यू लगा दिया गया है.
बता दें कि मध्यप्रदेश में सोमवार को 6489 संक्रमित मिले, जिसमें अकेले भोपाल में 1456 और इंदौर में तो 1500 से ऊपर नए संक्रमित मिले. अस्पतालों में दवाएं नहीं, तो श्मशान में मुर्दों को जलाने के लिए जगह और लकड़ी का टोटा पड़ गया. भोपाल शहर को ही लें तो अस्पतालों में 900 वेंटिलेटर हैं, लेकिन चार दर्जन से ज्यादा कोविड अस्पतालों में वेंटिलेटर बेड फुल है, बाकी 50 के करीब निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर हैं, जिन्हें रिजर्व में रखा गया है. लोग खैर मना सकते हैं कि लगभग एक पखवाड़े से भी अधिक समय से जिस रेमडेसिवर इंजेक्शन के लिए मारामारी और कालाबाजारी चल रही थी, उसके फिलहाल 47000 इंजेक्शन मध्यप्रदेश को मिल चुके हैं. ऑक्सीजन की सप्लाई कुछ तो बढ़ी है, लेकिन अभी भी दिक्कत बरकरार है.
अराजकता की घटनाएं बढ़ीं
यह सारी खबरें वो हकीकत है, जिनसे मध्यप्रदेश इन दिनों रूबरू है. कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकारें अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर ही रही है, लेकिन महामारी से लोगों के संयम और हौसले पस्त हो रहे हैं. इसका नतीजा है कि अराजकता के कई दृश्य पिछले कुछ दिनों से लगातार देखने को मिल रहे. इसका अंदाजा चंद उदाहरणों से लगा सकते हैं. तीन दिन पहले उज्जैन में ऑक्सीजन की कमी से 5 लोगों की मौत के बाद परिजनों ने माधव नगर अस्पताल में भारी तोड़फोड़ की. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में कांग्रेस नेता व विधायक पीसी शर्मा और उनके समर्थक की बदसलूकी के बाद एक डॉक्टर योगेन्द्र शर्मा ने इस्तीफा दे दिया. बाद में स्वास्थ्य मंत्री के मनाने पर डॉक्टर साहब ने तो इस्तीफा वापस ले लिया.
अराजकता की घटनाएं बढ़ीं
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खंडवा संक्रमित पर पुलिस की लाठी
सबसे बर्बर और अमानवीय घटना तो खंडवा जिले के बंजारी गांव में देखने को मिली, जहां कोरोना संक्रमित व्यक्ति और उसके परिवार की महिला, लड़की को पुलिस ने अमानवीय तरीके से पीटा और लाठियां बरसाईं. उस संक्रमित का कुसूर ये था कि जब मेडिकल टीम वाले उसे लेने पहुंचे, तो वह होम आइसोलेशन के लिए अड़ गया, क्योंकि उसे डर था कि वह अस्पताल गया तो मर जाएगा. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, पुलिस की किरकिरी हुई. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी घटना पर मुख्यमंत्री से तत्काल कार्रवाई की मांग की है. इसके अलावा चित्रकूट में लॉकडाउन का पालन कराने के लिए पहुंचे पुलिस दल पर लोगों ने हमला कर दिया और पथराव कर दिया.
खंडवा संक्रमित पर पुलिस की लाठी
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बदहवासी का पसर रहा आलम
पिछले कुछ महीनों में यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों से लाखों की तादाद में मजदूर महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में काम करने चले गए थे. लेकिन कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ने के कारण इन राज्यों की सरकारें शहरों में लॉकडाउन करते हुए इसकी अवधि लगातार बढ़ाती जा रही हैं. ऐसे में प्रवासी मजदूरों में डर समाया हुआ है कि अगर पूर्ण लॉकडाउन लग गया, तो फिर पिछले साल जैसी ही हालत होगी. कहां कमाएंगे, क्या खाएंगे, घरों का किराया कैसे चुकाएंगे. इन सवालों से जूझते श्रमिक घर वापसी कर रहे हैं. इस बार पहले जैसे सड़कों पर नहीं भाग रहे, बल्कि जिसे जो संसाधन मिल रहा है, वह अपने परिवारों के साथ लौट रहा है. इसलिए बसें और ट्रेनें खचाखच भरी हुई हैं. मध्यप्रदेश के रीवा, पन्ना जैसे शहरों में बसों पर ओवरलोडिंग करने पर जुर्माने लग रहे हैं. पन्ना के एक पत्रकार अजय कुमार के मुताबिक महाराष्ट्र, पुणे, नागपुर, सूरत से रोज 300 से 400 की संख्या में मजदूर लौट रहे हैं.
बदहवासी का पसर रहा आलम
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कसता जा रहा लॉकडाउन का शिकंजा
बता दें कि राज्य में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही दिन से कह रहे हैं, कि वह लॉकडाउन के पक्ष में नहीं है, उनका ताजा बयान भी यही है, लेकिन यह कहते-कहते प्रदेश के करीब तीन दर्जन शहर लॉकडाउन में जकड़ दिए गए. राज्य के इंदौर, बड़वानी, राजगढ़, विदिशा, देवास, छतरपुर, अनूपपुर सहित अधिकाशं शहरों में 19 अप्रैल तक तालाबंदी बढ़ा दी गई. सोमवार की शाम भोपाल में 19 अप्रैल तक कोरोना कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया. बालाघाट, जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी जिलों में 12 अप्रैल से 22 अप्रैल तक लॉकडाउन है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)
कसता जा रहा लॉकडाउन का शिकंजा
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