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सागरएक मिनट पहले
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बीएमसी की सर्जरी करने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री
कोरोनाकाल में एक दिन के भीतर सबसे अधिक संक्रमित मिलने का रिकॉर्ड फिर टूट गया है। मंगलवार को जिले में कोरोना संक्रमितों का दोहरा शतक लगा, जिसमें 24 घंटे के भीतर 218 नए संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। इससे एक दिन पहले जिले में 188 नए संक्रमित मिले थे। तीन दिन के भीतर 571 कोरोना संक्रमित मिले हैं, यह भी कोरोनाकाल के इतिहास में अब तक नहीं हुआ। 218 नए मरीजों को मिलाकर सागर में संक्रमितों का आंकड़ा 7 हजार के पार यानी 7159 पर पहुंच गया है। अप्रैल माह के 13 दिनों में 1065 नए पॉजिटिव सामने आए हैं।
अप्रैल के 13 दिनों में 1065 नए संक्रमित मिल चुके हैं। जिसके बाद नवंबर में 956 और अक्टूबर में मिले 905 मरीजों का रिकॉर्ड भी टूट गया है। वहीं अब सिर्फ सितंबर माह का सबसे अधिक 1354 संक्रमित मरीजों का रिकॉर्ड टूटना शेष है। यदि यही स्थिति रही तो कोरोनाकाल का सबसे संक्रमित महीना अप्रैल 2021 ही माना जाएगा। मंगलवार को पॉजिटिव मिले 218 मरीजों में बीएमसी की वायरोलॉजी लैब से 141, अहमदाबाद की निजी लैब से 72 और रैपिड एंटीजन टेस्ट से 5 संक्रमितों की पुष्टि हुई है। इनमें 4 बीएमसी के चिकित्सक और 3 कर्मचारी भी शामिल हैं।
मरने वालों में सागर के 4 और पन्ना के 2 मरीज
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को 6 मरीजों की मौत हुई। इनमें 5 मरीजों की रिपोर्ट नेगेटिव मिली है और पन्ना निवासी एक मृतक की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। बीएमसी में सागर के चार मरीजों ने भी दम तोड़ा है। इनमें बाहुबली कॉलोनी निवासी 63 वर्षीय महिला, बड़ा बाजार निवासी 63 वर्षीय महिला, तिली निवासी 53 वर्षीय पुरुष और भगवानगंज निवासी 36 वर्षीय युवक की भी मौत हुई है। इनकी रिपोर्ट निगेटिव है। वहीं नेगेटिव मृतकों में पन्ना निवासी 40 वर्षीय युवक भी शामिल है। इनके अलावा पन्ना निवासी 40 वर्षीय एक और व्यक्ति ने बीएमसी में इलाज के दौरान दम तोड़ा है। इनकी रिपोर्ट पॉजिटिव थी।
सागर में भी ऑक्सीजन संकट, पन्ना में खड़ीं गाड़ियां, स्वास्थ्य मंत्री बोले- ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं
भोपाल के बाद अब सागर में भी ऑक्सीजन का संकट हो सकता है। भोपाल से लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई पिछले दो दिन से बंद है, वहीं सिलेंडर की पूर्ति करने वाला जबलपुर प्लांट भी ठप पड़ गया है। ऐसे में अब सागर की उम्मीदें पन्ना के प्लांट से जुड़ीं हैं। लेकिन वहां भी सागर के अलावा पन्ना, छतरपुर, कटनी और जबलपुर जिले में सप्लाई का दबाव है।
ऐसे में मंगलवार को दिनभर पन्ना में सागर की गाड़ियां सिलेंडर लेकर खड़ीं रहीं। इन सब बातों से साफ तौर पर जाहिर है कि आने वाले दिनों में सागर जिले में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी इस बात से साफ इंकार कर रहे हैं। मंगलवार देर शाम उन्होंने बीएमसी का दौरा करते हुए कहा कि सागर में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। हमने पर्याप्त व्यवस्थाएं कर दीं हैं।
हर दिन 8 हजार लीटर ऑक्सीजन की खपत
सागर में बीएमसी और सभी निजी अस्पतालों को मिलाकर 8 हजार लीटर लिक्विड ऑक्सीजन की हर दिन खपत हो रही है। बीएमसी के पास 13 हजार लीटर का स्टोर टैंकर है, इसमें 4 हजार लीटर ऑक्सीजन प्रतिदिन खर्च होती है। यानी सिर्फ 4 दिन के भीतर टैंक खत्म हो जाता है। वहीं निजी अस्पतालों में 1600 से 2000 लीटर के टैंक हैं, ये भी दो से तीन दिन में खत्म हो रहे हैं। सभी जगह लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई भोपाल की आइनॉक्स कंपनी से की जा रही है।
लेकिन अब कंपनी ने भी लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई 4 से 5 दिन में एक बार ही करने को कहा है। वहीं दूसरी तरफ सागर ऑक्सीजन सिलेंडर जबलपुर स्थित प्लांट से सप्लाई होते थे। लेकिन यहां भी सोमवार रात से प्लांट बंद है। ऐसे में सागर में ऑक्सीजन सिलेंडर सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है।
पन्ना के पुरैना स्थित ऑक्सीजन प्लांट में 24 घंटे के भीतर 240 सिलेंडर भरे जाते हैं। जबकि सागर में एक दिन के भीतर 200 सिलेंडर की खपत हो रही है। जबलपुर प्लांट बंद होने के बाद अब सागर पूरी तरह पन्ना प्लांट पर निर्भर है। लेकिन यहां छतरपुर, पन्ना, कटनी और जबलपुर को भी सिलेंडर देने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। हालांकि इस मामले संभागायुक्त मुकेश शुक्ला ने बताया कि उन्होंने पन्ना प्लांट में बात की है और बुधवार सुबह तक सागर की गाड़ियां रवाना हो जाएंगी।
ऑक्सीजन की कमी को लेकर कांग्रेस ने स्वास्थ्य मंंत्री को घेरा कोरोना के बढ़ते संक्रमण और अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर गुस्साए कांग्रेसियों ने मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी को सागर प्रवास के दौरान जमकर घेरा। युवा कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष अशरफ खान ने बीएमसी में हो रही मौतों, रेमडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई को लेकर सवाल उठाए। वहीं शासन से कमी को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इस दौरान संदीप चौधरी, पवन केशरवानी, जयदीप तिवारी, आदि मौजूद थे।
भोपाल में 84 मौतें
भोपाल| भोपाल में कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। मंगलवार को भदभदा, सुभाषनगर विश्राम घाट और झदा कब्रिस्तान पर 84 शवों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया गया। भदभदा पर हालात ऐसे हैं कि जगह कम पड़ गई तो 30 नए चिता स्थल बनाना शुरू कर दिए हैं, जबकि 30 चिता स्थल चार दिन पहले ही बने हैं। वन विभाग लकड़ियां देने से इंकार कर चुका है। यही वजह है कि अब श्मशान लकड़ियों के लिए प्राइवेट वेंडर के भरोसे है।
एक दिन पहले नगर निगम ने कुछ ट्रक लड़कियां पहुंचाई थीं। जो लोग लकड़ियां जमाने और अंतिम संस्कार का काम करते हैं उनके हाथों पर छाले पड़ गए हैं। वो कहते हैं पहले बमुश्किल 3-4 घंटे काम करना पड़ता था, अब सुबह 7 से रात 9 और कुछ दिन तो 11 बजे तक शवों का अंतिम संस्कार किया है।
कोरोना का कहर ऐसा कि पिछले पांच दिनों से 50 से ज्यादा शव शहर के श्मशानों और कब्रिस्तानों में पहुंच रहे हैं। लेकिन सरकारी आंकड़ों में पिछले 5 दिनों में बस 10 मौतें दर्ज हुई हैं। आज जब शहर में 85 अंतिम संस्कार हुए तो सरकारी आंकड़ों में भोपाल में सिर्फ 4 मौतें लिखी गईं।
ऑक्सीजन की कमी से हड़कंप
राजधानी के 100 से ज्यादा अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों की जान पर बन आई है, क्योंकि ये अस्पताल सोमवार रात से ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। इससे मंगलवार को अस्पताल संचालक, मरीजों के परिजन और जिला प्रशासन के अफसर हैरान-परेशान रहे। ज्यादातर अस्पतालों ने नए मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है। इन अस्पतालों से जिला प्रशासन के अफसरों के पास 500 से ज्यादा फोन कॉल्स गए।
सभी का एह ही सवाल था- ऑक्सीजन कब तक मिलेगी। भास्कर ने 25 से ज्यादा अस्पतालों की हालत जांची, तो यहां दिनभर अफरातफरी मिली। अस्पतालों का मरीजों के परिजनों को एक ही जवाब है- या तो खुद अपना ऑक्सीजन सिलेंडर लाओ, या फिर मरीज को कहीं और ले जाओ। आनन-फानन में कई परिजन अपने मरीजों को एंबुलेंस से लेकर इधर-उधर भटकते रहे।
मजबूरी में उन्हें हमीदिया, एलबीएस, पीपुल्स अस्पताल में भर्ती कराया। इधर, कोरोना संकट में 24 घंटे ऑक्सीजन सप्लाई का काम कर रहे गोविंदपुरा स्थित भारती एयर प्रोडक्ट प्लांट पर दिनभर अस्पतालों की एंबुलेंस फेरे लेती रहीं। इनमें ऑक्सीजन के जंबो सिलेंडर रखे थे, जिन्हें प्लांट पर भरकर अस्पताल भेजा जा रहा था। किसी अस्पताल को 25 सिलेंडर चाहिए तो किसी को 10 से 12 सिलेंडर। बता दें कि मार्च में भोपाल में हर दिन 30 मीट्रिक टन ऑक्सीन लग रही थी, जो बढ़कर 60 मीट्रिक टन हो गई है।