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- Corona Infected Patient Out Of Rewa Medical College, Admitted Again After Intervention Of Minister In Charge, Still Not Started Treatment
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रीवा20 मिनट पहले
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संजय गांधी अस्पताल रीवा
- विंध्य के अस्पतालों में मची चीख पुकार, रो-रोकर परिजन व्यक्त कर रहे पीड़ा फिर भी कोई सुनने वाला नहीं
- कोरोना संक्रमित बस में बैठकर आए रामनगर, जिनको एक स्वास्थ्य कर्मी ने बाइक में बैठाकर कराया देवराज नगर अस्पताल में भर्ती
- रीवा मेडिकल कॉलेज ने मानवता को किया शर्मसार
विंध्य क्षेत्र के अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों से दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। पॉजिटिव मरीजों की मानें तो उनको रामनगर से रीवा मेडिकल कॉजेल रेफर किया था। लेकिन वहां इलाज तो मिला नहीं उपर से दुर्व्यवहार कर भगा दिया। रात भर भूंख से तड़पते कोरोना पीड़ित बस में सवार होकर पुन: रामनगर पहुंचे और गस खाकर रोड़ में गिर गए। जिनको एक स्वास्थ्यकर्मी ने खुद की जान दांव पर लगाते हुए बाइक में बैठाकर पुन: भर्ती कराया गया। जैसे ही पूरे मामले की जानकारी बीएमओ रामनगर को मिली तो उन्होंने कलेक्टर और प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल को मामले की जानकारी दी। उन्होंने एसएस मेडिकिल कॉलेज के डीन डॉ. मनोज इंदुलकर को अवगत कराया। जहां से पुन: रेफर करने की बात कही गई। ऐसे में कलेक्टर के निर्देश पर दोबारा कोरोना संक्रमितों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया। लेकिन फिर भी कोई इलाज नहीं कर रहा है।
ये है मामला
बता दें कि सतना जिले के रामनगर ब्लॉक अंतर्गत एक घर के चार लोग कोरोना संक्रमित थे। ऐसे में घर के सभी सदस्य होम क्वारंटाइन थे। मंगलवार की दोपहर दो सगे भाइयों की तबियत ज्यादा शीरियस हो गई। जिनको रामनगर के कोविड सेंटर में भर्ती कराया गया। मंगलवार की शाम होते होते दोनों की तबियत और खराब होने लगी। ऐसे में बीएमओ के निर्देश पर रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां पर एंबुलेंस के चालक ने ओपीडी पर्ची आदि खटाकर भर्ती की प्रक्रिया कराई। लेकिन पूरी रात गुजर गई। किसी भी स्वास्थ्यकर्मी और अधिकारियों ने कोरोना संक्रमित मरीज की बात नहीं सुनी। वे भूखे प्यासे पूरी रात तड़पते रहे। उपर से मेडिकल स्टाप ने दुर्व्यवहार करते हुए कहा कि सड़क पर पड़े मिले थे। वापस भगाओं इनको।
अस्पताल से बस स्टैंड पैदल, फिर यात्री बस में लिफ्ट लेकर पहुंच रामनगर
कोरोना संक्रमितों ने आरोप लगाते हुए मीडिया को बताया है कि करीब 14 घंटे तड़पने के बाद जब अपने रामनगर के अस्पताल में पहुंचे तो जान वापस लौटी है। हमको अब यहीं भर्ती रहना है। चाहे मर भी जाए अब रीवा नहीं जाएंगे। क्योंकि पूरी रात न भोजन मिला न पानी। इलाज के नाम पर हम लोगों को जलील कर भगा दिया गया। मेडिकल कॉलेज से बस स्टैंड तक पैदल और फिर यात्री बस में लिफ्ट लेकर रीवा से गोविंदगढ बाया जिगना होकर पुन: रामनगर पहुंचे। जहां पर भगवान के रूप में एक स्वास्थ्यकर्मी मिला। उसने अपने जीवन की परवाह किए बगैर हम तड़पते भाईयों को सड़क से उठाकर बाइक में बैठाया। फिर पुन: रामनगर में भर्ती कराया है।
प्रशासन के दावों की खुद चिकित्सकों ने खोली पोल
दावा किया जा रहा है कि रामनगर बीएमओ को जब पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होने पूरी बात सीएमएचओ, कलेक्टर सहित प्रभारी मंत्री रामखेलावन पटेल को पूरे मामले से अवगत कराया। कहा कि मेडिकल कॉलेज अकेले रीवा के लिए नहीं है। बल्कि सतना के लिए आईसीयू से लेकर वेंटीलेटर तक आरक्षित है। बावजूद रीवा के चिकित्सकों ने चिकित्सा जगत को शर्मसार करते हुए रेफर मरीज का इलाज नहीं किए। उपर से दुर्व्यवहार कर भगा दिए। जबकि उनकी यह डियूटी है। उनको जनता के इलाज के लिए ही रखा गया है। ऐसे में प्रभारी मंत्री और कलेक्टर ने डीन से बात कर पुन: रेफर कराया है।
इलाज नहीं मिला तो और सीरियस
कोरोना संक्रमित मरीज जब रामनगर से रेफर हुए थे तो 88 ऑक्सीजन लेवल था। लेकिन रीवा से वापस लौटने पर 70-75 SPO2 हो गया था। जानकार चिकित्सकों का कहना है कि अगर कुछ देर और आक्सीजन न मिलता तो इनकी जान भी जा सकती थी। ऐसे में संक्रमित मरीजों को देवराजनगर अस्पताल का एक कर्मचारी सड़क पर पड़े देखा और अस्पताल में भर्ती कराकर आक्सीजन दिया तो उनकी जान वापस लौटी।
दो बार रेफर फिर भी नहीं मिला इलाज
कोरोना संक्रमित मरीजों ने मीडिया को बताया है कि शायद इतिहास के हम लोग पहले ऐसे संक्रमित है। जिनको एक अस्पताल में दो बार रेफर किया गया है। इसके बावजूद चिकित्सकों का वही रवैया है। दोबारा फिर वे लोग इलाज नहीं कर रहे है। ऐसे में रामनगर अस्पताल में ही मर जाते तो ज्यादा अच्छा था। वहां आक्सीजन से लेकर अन्य सभी सुविधाएं मिल रही थी। यहां तो हम भाईयों को चिकित्सक मार डालेंगे।
सतना के हिस्से के 70 बेड रिजर्व
बता दें कि ये स्थिति तब है जब रीवा मेडिकल कॉलेज में सतना के हिस्से के 70 बेड रिजर्व है। सतना के हिस्से के वेंटिलेटर, हाई फ्लो आदि रीवा मेडिकल कॉलेज ने तो ले ली लेकिन इलाज करने से इनकार कर रहे है।
सतना जिला अस्पताल में मची चींख पुकार
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आमल है कि दोपहर के समय सतना जिला अस्पताल में मरीज के परिजन चीख पुकार रहे है। कई लोग रो रोकर अपनी बात रख रहे थे। फिर भी अस्पताल के जिम्मेदार उपचार नहीं कर रहे थे।