Opinion : मध्य प्रदेश में मुर्दे उगल रहे हैं कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों का सच

Opinion : मध्य प्रदेश में मुर्दे उगल रहे हैं कोरोना से हो रही मौत के आंकड़ों का सच


भोपाल.मध्य प्रदेश (MP) में रोज कोरोना संक्रमण (Corona) के नए मरीजों से लेकर मरने वालों तक के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं. अस्पताल की ओर भाग रही मरीजों की भीड़ और श्मशानों में अंतिम संस्कार के लिए पहुंच रही लाशें सरकारी आंकड़ों की पोल खोल रही हैं.

भोपाल. सरकारें, उनका सिस्टम और उसके कारिंदों के दिए आंकड़े झूठ हो सकते हैं. लेकिन श्मशान, कब्रिस्तान और मुर्दे झूठ नहीं बोलते. सच और झूठ के बीच यह द्वंद्व इसलिए छिड़ा है, क्योंकि मध्यप्रदेश में रोज नए कोरोना पॉजिटिव मरीजों से लेकर मरने वालों तक के आंकड़े छिपाए जा रहे हैं. अस्पताल की ओर भाग रही मरीजों की भीड़ और श्मशानों में अंतिम संस्कार के लिए मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़ों की पोल खोल रही हैं. 27 मार्च से मंगलवार 13 अप्रैल तक सरकार की सुई 1-2-3-4 की गिनती तक ही अटकी रही, जबकि अब तक सैकड़ों की तादाद में मृतकों के अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकाल के तहत किए जा चुके हैं और यह सिलसिला जारी है.

बेड, दवाएं, ऑक्सीजन, इंजेक्शन की कमी
सरकार अस्पतालों में बेड, दवाएं, ऑक्सीजन, इंजेक्शन जैसी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम नहीं कर पा रही है. इसी प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए आंकड़ों में गड़बड़ी का खेल खेला जा रहा है और बताने की कोशिश की जा रही है कि सब ठीक-ठाक है. इसका नतीजा यह हुआ है कि सही तथ्य सामने नहीं आने की वजह से जनता गुमराह और लापरवाह होती गई और अब हालत यह है कि भोपाल में कोरोना संक्रमण की दर 28 फीसदी से ऊपर जा पहुंची है. यानी जांच में लगभग हर चौथा व्यक्ति पॉजिटिव निकल रहा है. राज्य में कोरोना बेकाबू हो गया है.सरकारी आंकड़ों का झूठ

सोमवार को भोपाल में एक दिन में 44 फीसदी केस बढ़ गए और 1456 कोरोना के नए केस मिले. इंदौर में 1552 केस सामने आए, जबकि मप्र में एक दिन में कुल 6489 नए संक्रमित मिले. हेल्थ बुलेटिन में भोपाल में सोमवार को केवल 5 और इंदौर में 6 मौतें बताई गईं. इसके विपरीत भोपाल के विश्रामघाटों में 62 और इंदौर के मुक्तिधाम में 23 मृतकों का अंतिम संस्कार हुआ. बीते शनिवार को भोपाल में कोरोना से मरे 57 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ. इंदौर में सरकारी आंकड़ा 11 दिन में 42 मौतों का बता रहा है, जबकि इस अवधि में वहां सैकड़ों मौतें हुई हैं. छिंदवाड़ा में सोमवार को मौतों का आंकड़ा शून्य दर्शाया गया, जबकि वहां 34 मौतें हुईं, जिनका कोविड प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार किया गया. सरकारी आंकड़ों की नजर से मौतों को देखा जाए, तो सरकार लोगों की जान बचाने और कोरोना पर काबू पाने में सफल हो रही है. मसलन सोमवार को जबलपुर में 4, राजगढ़ में 2, विदिशा में 4, कटनी में 1 और शहडोल में 1 मौत होने की बात कही गई, बाकी जिलों में मौतों का आंकड़ा शून्य बताया गया है, जबकि तस्वीर इसके उलट है. वास्तव में कोरोना से मौतों की संख्या हर जगह दर्जनों में है.

भोपाल में रोजाना बड़ी संख्या में मौत
जानकारी के मुताबिक 27 मार्च से 1 अप्रैल के बीच कुल 102 शवों का अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकाल के तहत किया गया. इनमें से 55 शव केवल भोपाल के थे. एक से 5 अप्रैल तक भी सरकार की सुई 1-2 मौतों पर अटकी रही, जबकि 4 अप्रैल को ईस्टर के दिन भोपाल में 13 लोगों का अंतिम संस्कार हुआ. 9 अप्रैल को एक ही दिन में भोपाल में सबसे ज्यादा 41 मौतें हुईं, लेकिन सरकार बोली-केवल 2 मरे. उसके बाद 9 से 12 अप्रैल तक भोपाल में कुल 208 कोरोना मरीजों की मौतें हुईं.

फर्जी आंकड़ों को देख बिफरे भाजपा विधायक
आंकड़ों के इसी फर्जीवाड़े को लेकर बीते शुक्रवार को क्राइसिस मैनेजमेंट की मीटिंग के दौरान शिवराज सिंह सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके और वर्तमान में जबलपुर पाटन से विधायक अजय विश्नोई बिफर पड़े थे. दरअसल सरकार ने कोरोना के आंकड़ों और बीमारी से निपटने के लिए की जा रही तैयारियों को बताने के मकसद से यह बैठक बुलाई थी. लेकिन बैठक में जब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने संक्रमितों और मौतों के आंकड़े रखे, तो भाजपा विधायक विश्नोई बोले- “जो आंकड़े आप बता रहे हैं, फिर तो सब बहुत अच्छा चल रहा है, परेशानी की बात ही नहीं है. फिर आप ये बताइए कि जनता क्यों परेशान हो रही है? अस्पतालों में बेड क्यों नहीं मिल पा रहे? दवा क्यों नहीं मिल पा रही? ऑक्सीजन का इंतजाम क्यों नहीं हो पा रहा? आप अखबारों में छपवाते हैं एक, दो, तीन, चार, जबकि केवल जबलपुर के चौहानी श्मशान घाट में रोज 14 से 20 शव अंतिम संस्कार के लिए आ रहे हैं.”

फिर बुलाया क्यों था
बैठक में हस्तक्षेप करने पर भड़के विश्नोई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से यह तक बोल गए जब सुनना ही नहीं था, तो बैठक में बुलाया क्यों? भोपाल से कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा की भी यही शिकायत है. उनका कहना है कि सरकार अगर सच्चाई सामने रखती, तो लोग सचेत होते. सरकार को चाहिए कि वह अस्पतालों में मरीजों के लिए बेहतर बेड, दवा, ऑक्सीजन का बेहतर इंतजाम करे, न कि आंकड़े छिपाए.

स्वास्थ्य सुविधाएं खुद वेटिंलेटर पर
सरकार बार-बार अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर और सभी सुविधाएं देने का दावा कर रही है. ये दावे कितने सही हैं इसका उदाहरण भोपाल का सिटी अस्पताल है, जहां ऑक्सीजन की कमी से 6 कोरोना मरीजों की मौत हो गई. इसे लेकर अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा कि अस्पतालों को ऑक्सीजन मिल ही नहीं रही. जिसके चलते मरीजों की मौत हो रही है. इसी तरह राजधानी के वैष्णो अस्पताल के डॉ. परिहार ने हाथ जोड़कर प्रशासन से ऑक्सीजन की सप्लाई करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि खुद देखें कि मरीजों को ऑक्सीजन के सिंलेंडर मिल रहे हैं या नहीं. हॉस्पिटल की वैन को एक सिलेंडर के लिए 8-8, 9-9 घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है.

हर दिन 12 से 15 मौत
भोपाल में कोरोना के पहले दिन से ही मरीजों को भर्ती कर इलाज कर रहे चिरायु हॉस्पिटल के एमडी डॉ. अजय गोयनका का कहना है कि हर कोविड अस्पताल में रोजाना करीब 12 से 15 मौतें हो रही हैं. राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 30 प्रतिशत और अस्पतालों में 50 फीसदी तक डॉक्टर, नर्स से लेकर दीगर स्टाफ की कमी है. ऐसे में कोरोना मरीजों को बेहतर इलाज और देखभाल कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है.

पीएम ने भी किया था आगाह
बीते हफ्ते राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना संकट के मुद्दे पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश का नाम लिए बगैर इशारा किया था कि कुछ राज्यों में जांच और वैक्सीनेशन के नाम पर फर्जीवाड़ा हो रहा है. एक ही फोन नंबर पर हजारों मरीजों की जांच दिखा दी गई और नो निगेटिव रिपोर्ट भी दे दी गई. दो राज्यों में तो हजारों सैंपल निगेटिव करार दिए गए. यह आपराधिक कृत्य रोका जाना चाहिए. लॉकडाउन से महामारी की रफ्तार तो कम की जा सकती है, उससे सरकार को अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं जुटाने के लिए भी समय मिलता है. ये काम सरकारों को करना चाहिए. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.)





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