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- The Deal To Sell Remedesivir Injection For 18 Thousand Rupees, The Name Of The Shop Operator And Another In The Case Was Also Extended.
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जबलपुर5 मिनट पहले
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न्यू मुनीष मेडिकल स्टोर्स के दो कर्मी संचालक से बात कर 18 हजार रुपए में 5400 एमआरपी पर बिकने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने का सौदा करते हुए पकड़े गए थे।
- मढ़ाताल स्थित न्यू मुनीष दवा स्टोर का मामला, मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने से बच रही पुलिस
मढ़ाताल स्थित न्यू मुनीष मेडिकल स्टोर्स के दोनों कर्मियों की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण गंभीर है और इसमें सात वर्ष तक की सजा करने वाली धाराएं शामिल हैं। वहीं ओमती पुलिस ने मामले में स्टोर्स संचालक कामेश राजानी और एक अस्पताल से जुड़े कांचघर निवासी गौरव शर्मा को भी आरोपी बनाया है। हालांकि दोनों को गिरफ्तार करने से पुलिस बच रही है।
जानकारी के अनुसार न्यू मुनीष मेडिकल स्टोर्स में कार्यरत सुदामा व नितिन 18 हजार रुपए में एक रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध कराने का सौदा कर रहे थे। इस मामले का वीडियो वायरल होने के बाद मौके पर एसडीएम आशीष पांडे ने ड्रग विभाग के साथ दबिश दी थी। मामले में ड्रग इंस्पेक्टर रामलखन पटेल की भी भूमिका संदिग्ध मिली थी। उन्होंने प्रतिवेदन में सिर्फ दोनों कर्मियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करने के लिए ओमती थाने में नाम भेजा। जबकि वीडियाें में दोनों कर्मी साफ संचालक से बात कर कीमत बताते हुए कैद हैं।
ओमती पुलिस ने दोनों कर्मियों के खिलाफ दर्ज किया प्रकरण
इस मामले में दोनों कर्मी को पहले थाने से छोड़ दिया गया था। 24 घंटे बाद थाने में ड्रग विभाग का प्रतिवेदन पहुंचा, तो फिर दोनों गिरफ्तार किए गए थे। दोनों के खिलाफ ओमती पुलिस ने धारा 269, 270 भादवि, 53, 57 आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, 3 महामारी अधिनियम 1897, तथा 3-7 आवश्यक वस्तु अधिनियम 1995, एवं 5, 13 म.प्र.ड्रग कंट्रोल एक्ट 1949 का प्रकरण दर्ज करते हुए जेल भेज दिया था। इसी मामले में गुरुवार को दोनों की कोर्ट में जमानत अर्जी लगी थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
संचालक सहित दो और नाम जोड़े गए
ड्रग विभाग की ओर से गुरुवार को दवा स्टोर्स संचालक कामेश राजानी और इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाले एक निजी अस्पताल से जुड़े कांचघर निवासी गौरव शर्मा का नाम भी एफआईआर में बढ़ा दिया है। हालांकि राजनीतिक प्रभाव के चलते ओमती पुलिस आरोपियों को बचने से बच रही है।
एनएसए की तरह कलेक्टर कर सकते हैं कार्रवाई
जीवन रक्षक दवाओं में शामिल रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले में कलेक्टर चाहे तो सख्त कार्रवाई कर नजीर पेश कर सकते हैं। प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की किल्लत के चलते ही सीएम ने राजकीय विमान से इंजेक्शन जलपुर में भिजवाया है। कलेक्टर चोर बाजारी अधिनियम और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा (3) (1) (2) के तहत आरोपियों के खिलाफ एनएसए की तरह वारंट जारी कर छह महीने या इससे अधिक समय तक जेल में निरूद्ध करने का आदेश जारी कर सकते हैं।