अब चंबल में उगेगा गुग्गल: चंबल की तस्वीर बदलने बीहड़ों में गुग्गल के बीजों की तलाश

अब चंबल में उगेगा गुग्गल: चंबल की तस्वीर बदलने बीहड़ों में गुग्गल के बीजों की तलाश


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भिंड2 घंटे पहले

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  • भारत हर साल पाकिस्तान से खरीदता है करोड़ों रुपए का गुग्गल

लघु वन उपज का सबसे महंगा पौधा चंबल के बीहड़ से विलुप्त हो रहा है। जबकि यह औषद्यीय पौधा चंबल क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है। बल्कि भारत को भी आयुर्वेद औषधीय के मामले में आत्म निर्भर बना सकता है। इसी लिए पिछले एक सप्ताह से वन विभाग अनुसंधान की टीम चंबल के बीहड़ों की खाक छान रही है। जी हां हम बात कर रहे हैं गुग्गल की। वनस्पति विज्ञान में इसे कमिफोरा वाइटी के नाम से जाना जाता है। यह 60 प्रकार की बीमारियों में औषधि का कार्य करता है।

नेशनल मेडिसिन प्लांट बोर्ड दिल्ली और जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त सर्वे के अनुसार भारत में गुग्गल की प्रतिवर्ष पैदावार 10 टन है। जबकि भारत को जरूरत प्रति वर्ष 2200 टन की होती है। ऐसे में करोड़ों रुपए खर्च कर हर साल भारत सिंध के पाकिस्तान, अफगानिस्तान से गुग्गल खरीदता है।

वहीं चंबल के बीहड़ों में यह बहुतायत में पाया जाता था। लेकिन देख रेख के अभाव में अब यह विलुप्त होता जा रहा है। ऐसे में इसके सरंक्षण के लिए अब वन विभाग की टीम इसका बीज तलाश रही है। वन विभाग अनुसंधान के एसडीओ बीएस चौहान पिछले एक सप्ताह से अपनी टीम के साथ चंबल नदी किनारे कोषण, कनकूरा, बरही के बीहड़ों में इसका बीज तलाश कर रहे हैं।

10 हजार रुपए किलो बिकता है बीज
गुग्गल की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में बहुत मांग है। इसका गोंद दो हजार रुपए किलो और बीज 10 हजार रुपए किलो के हिसाब से बिकता है। ऐसे में वनस्पति माफिया इसके पेड़ से गोंद निकालने के लिए केमिकल का प्रयोग करता है, जिससे गोंद तो बड़ी मात्रा में निकलता है। लेकिन पौधा मर जाता है। वहीं इसका बीज भी 48 घंटे तक ही जीवित रहता है। बीज स्वादिष्ट होने की वजह से पक्षी उसे तत्काल खा जाते हैं, जिससे बीज मिलने में मुश्किल हो रही है।

रोगों को जड़ से खत्म कर देता गुग्गुल
गुग्गल एक औषधि पौधा है जिसका आयुर्वेद में विशेष महत्व है। गुग्गुल के पौधे से उपयोग आयुर्वेद हृदय रोग, डायबिटीज, रक्त चाप जैसे शरीर के 60 प्रकार की बीमारियों के उपचार की दवाएं बनाई जा सकती है। गुग्गुल की औषधि से शरीर के रोग जड़ सके खत्म हो जाते हैं। यह पौधा अति विलुप्त प्रजाति का होने की वजह से बाजार में आसानी ने नहीं मिलता है। बीहड़ की बंजर जमीन में गुग्गुल को बढ़ावा देकर रोजगार के नए साधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

चंबल में आएगी आर्थिक समृद्धि
सुजागृति संस्था के जाकिर हुसैन के अनुसार चंबल के एक लाख 5 हजार हेक्टेयर में बीहड़ है। इस क्षेत्र में यदि गुग्गल की पैदावार की जाए तो स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने बताया कि मुरैना जिले में उनके द्वारा करीब 500 पौधे गुग्गल के लगवाए गए हैं।

रोगों में इस तरह से फायदेमंद है गुग्गुल

  • हड्डी रोग निवारक ।
  • शरीर के तंत्रिका तंत्र मजबूत करता।
  • मुंह के छाले व घाव को आसन से ठीक करता।
  • गुग्गुल से बालों का गंजापन होता दूर।
  • पेट की पुराने से पुरानी बीमार को करता ठीक।

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