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सागर2 मिनट पहलेलेखक: राजकुमार प्रजापति
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- अभयारण्य और दोनों वन मंडलों में 25 के आसपास हैं तेंदुए
- 2010 के आसपास 10-12 तेंदुए ही देखे गए थे
मप्र में तेंदुओं की बढ़ती तादाद के कारण इसे लैपर्ड स्टेट का दर्जा मिल गया है। सागर के तीन जिलों की सीमा में फैले नौरादेही अभयारण्य, उत्तर व दक्षिण वन मंडल के जंगलों में तेंदुए की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले एक दशक में इनकी संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। जहां 2010-11 में 10-12 तेंदुए ही दिखाई देते थे अब वे बढ़कर 25 के आसपास पहुंच गए हैं। अकेले नौरादेही अभयारण्य में ही इनकी स़ंख्या 18-20 बताई जा रही है। हाल ही में दक्षिण वन मंडल के रतौना से सटे गांव में तेंदुए का पूरा परिवार देखा गया है। उत्तर वन मंडल के हीरापुर व शाहगढ़ के जंगल में तेंदुओं का बसेरा है।
नौरादेही अभयारण्य में बाघ-बाघिन और उनके शावकों की निगरानी के लिए ट्रैकर कैमरे लगाए गए हैं। हर 15 दिन में इनके फुटेज देखे जाते हैं। अभयारण्य में तेंदुए अलग-अलग जगह कई बार देखे गए। इनके पगमार्क भी मिले हैं। नौरादेही एसडीओ एसआर मलिक ने बताया कि कैमरों से मिले फुटेज और पगमार्क के आधार पर देखा जाए तो इस अभयारण्य में करीब 20 तेंदुए हैं । 2018 में अलग से तेंदुओं की गणना नहीं हुई थी। अब अगले साल इनकी गणना होगी।
तेंदुआ कुएं में गिरा था, मादा शावकों के साथ कर रही मूवमेंट
रतौना से सटे घने जंगल के आसपास खेती किसानी हो रही है। पिछले महीने यहां एक बिना मुंडेर के कुएं में नर तेंदुआ गिरने से जख्मीं हो गया थ। रेस्क्यू कर उसे इलाज के लिए वन विहार भोपाल ले जाया गया है। रतौना की लाल पहाड़ी इलाके में पिछले कुछ दिनों से शावकों के साथ एक मादा तेंदुए का मूवमेंट हो रहा है। माना जा रहा है कि यह उसी तेंदुए का परिवार है जो कि कुएं में गिर गया था। इस गांव के लोगों के अनुसार 10 साल पहले भी यहां तेंदुआ दिखा था।
सड़क पर मृत मिले थे दो तेंदुआ, पन्ना से आते-जाते रहे हैं
शाहगढ़ में दो साल पहले सड़क पर दो तेंदुओं के शव मिले थे। हीरापुर संठिया घाटी में मृत मिले तेंदुए के पन्ना से आने की जानकारी मिली थी। पन्ना नेशनल पार्क से बड़ामलहरा के रास्ते शाहगढ़ परिक्षेत्र में तेंदुए आते जाते रहे हैं। दक्षिण डीएफओ नवीन गर्ग ने बताया कि रतौना में तेंदुओं का मूवमेंट देखा जा रहा है। नौरादेही और दोनों वन मंडल ें इनकी अच्छी खासी संख्या दिख रही है। 2022 में तेंदुओं की गणना होगी।
नौरादेही अभयारण्य में 20 तेंदुए, सागर के उत्तर वन मंडल के जंगल के बाद दक्षिण वन मंडल के रतौना में मिला तेंदुए का परिवार
एक्सपर्ट: जहां बाघ कम वहां तेंदुओं को अनुकूल माहौल
नौरादेही अभयारण्य में वन्य जीवों खासकर बाघ-चीते व तेंदुए के लिए अनुकूल माहौल और पर्याप्त आहार-पानी है। इस अभयारण्य में तेंदुओं की बसाहट बाघ के पहले की है। इसकी वजह यह है कि जहां बाघ नहीं होते या फिर कम हैं वह स्थान तेंदुओं के लिए सुरक्षित है। अभयारण्य में अच्छी खासी संख्या में तेंदुआ हैं। तेंदुआ जंगल में रहकर जहां जंगली सुअर, सांभर, बंदर, चीतल का शिकार करता है तो वहीं शहर से लगे जंगलों में आकर यह कुत्तों का शिकार करने लगता है। कुत्ता इसका पसंदीदा आहार है।
डॉ. बसंत मिश्रा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट
सागर के जंगलों में तेंदुए की वंशवृद्धि के लिए बेहतर माहौल
नौरादेही के अलावा सागर के उत्तर व दक्षिण वन मंडल के जंगलों में तेंदुओं की संख्या पिछले 10-12 सालों में दोगुना होना स्वभाविक है। यहां के जंगलों में तेंदुओं के लिए वह सबकुछ उपलब्ध है जो कि उन्हें वंशवृद्धि के लिए जरूरी है। बाघ, तेंदुओं की बसाहट के बाद नौरादेही में अफ्रीकन चीते लाने की तैयारी चल रही है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यृट ऑफ इंडिया की टीम एक महीने के दौरे पर आई है।
अमित कुमार दुबे, सीसीएफ सागर