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जबलपुर4 घंटे पहले
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- 24 घण्टों में 789 आए पॉजिटिव 9 ने तोड़ा दम एक्टिव केस 6163
मंगलवार को पूरे दिन शासकीय हो या फिर निजी किसी अस्पताल में कोरोना पीड़ित के लिए किसी भी तरह का कोई बेड खाली नहीं रहा। कोविड सेंटर जो बनाये गये उनमें बिस्तर हैं पर उनमें हाई फ्लो ऑक्सीजन ही नहीं है जिससे किसी तरह से भर्ती होने का कोई लाभ मिल सके। ऑक्सीजन की सप्लाई अभी जैसे-तैसे चल रही है, लेकिन इसके हालात ठीक नहीं हैं। रेमडेसिविर मिल पाना टेढ़ी खीर जैसा है और स्टाफ को लेकर अब यह हाल है कि कोविड मरीज की देखभाल स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी न कर परिजन फॉलोअप ले रहे हैं।
विक्टोरिया जिला अस्पताल में तो यह आलम है कि हर बेड के पास एक फैमिली मेम्बर देखभाल करने लगा है। कुछ निजी अस्पतालों में भी यही हो रहा है। बीते पन्द्रह दिनों में शहर में इलाज का पूरा तंत्र चौपट हो चुका है। अस्पतालों में इलाज के लिए बेड पाने की जंग और ज्यादा बढ़ गई है। कई तरह के जतन करने के बाद किसी तरह की राहत नहीं है। इधर मंगलवार को कोरोना के हेल्थ बुलेटिन में संक्रमण के बाद 9 मौतें होना बताया जा रहा है। 789 व्यक्तियों को इस वायरस ने अपनी गिरफ्त में लिया और इसके बाद अब तक इस संक्रमण से पूरे जिले में 29 हजार से अधिक लोग पीड़ित हो चुके हैं। शहर में फिलहाल एक्टिव केस 6163 हैं।
राहत की उम्मीद से लम्बा सफर, यहाँ आकर और मोल ले रहे मुसीबत
शहर में आसपास के जिलों से पीड़ित बड़ी उम्मीदों के साथ आ रहे हैं। वे यहाँ आकर और ज्यादा मुसीबत में फँस रहे हैं। 100 से 200 किलोमीटर के दायरे से ऑक्सीजन बेड, आईसीयू की उम्मीदों के साथ कोविड पाॅजिटिव की रपट के साथ यहाँ पहुँचते जरूर हैं पर ज्यादातर लोगों को निराशा हाथ लग रही है। अब तक जिलों में ही बिस्तर संख्या बढ़ाई जा सकती थी पर यह इंतजाम वहाँ भी नहीं हो सका। न मुख्यालय में राहत है न जिलों में किसी तरह की उम्मीद है।
प्रोटोकाॅल से हुए 75 अंतिम संस्कार
इधर कोविड गाइडलाइन के तहत चिन्हित श्मशानघाटों में मंगलवार की रात 8 बजे तक 75 अंतिम संस्कार किए गए। दो लोगों की लक्षण आने के बाद मौत रात में हुई जिनका अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। इन शवों का अंतिम संस्कार बुधवार को होगा। हर दिन कोविड गाइडलाइन के तहत होने वाले फ्यूनरल की संख्या बढ़ती जा रही है।
मृतक के जिंदा होने का संदेह
शवों का अंतिम संस्कार करने वाली टीम के सदस्यों को संजीवनी नगर में एक मौत होने की सूचना प्राप्त हुई। जब सदस्य वहाँ एम्बुलेंस लेकर पहुँचे और शव उठाने की कोशिश की तो महसूस हुआ कि अभी साँस चल रही है। इसके बाद परिवारजनों से चर्चा कर तुरंत मेडिकल लेकर गए जहाँ ओपीडी में उन्हें जाँच के बाद मृत घोषित कर दिया गया।