राजधानी में एक और गैस त्रासदी जैसे हालात: रात के तीन बज रहे हैं, हम ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं….! हर तरफ भागदौड़, हर दिशा में अफरा-तफरी, हर इंसान जरूरत के लिए आंखों में सवाल लिए हुए…!

राजधानी में एक और गैस त्रासदी जैसे हालात: रात के तीन बज रहे हैं, हम ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए भटक रहे हैं….! हर तरफ भागदौड़, हर दिशा में अफरा-तफरी, हर इंसान जरूरत के लिए आंखों में सवाल लिए हुए…!


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भोपाल22 मिनट पहले

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रात में ऑक्सीजन सिलेंडर भरवाने के लिए लगी भीड़।

मरीज अस्पताल में तड़प रहा है, हम ऑक्सीजन के लिए यहां से वहां तक दौड़ लगा रहे हैं… अस्पताल वालों का कहना है कि जल्दी इंतजाम नहीं कर पाए तो कुछ भी अनर्थ हो सकता है….। रात के तीन बज गए हैं लेकिन कहीं से उम्मीद नजर नहीं आ रही। जान-पहचान वालों से लेकर हर उस जगह दस्तक दे चुके, जहां से किसी तरह मदद मिलने की संभावना थी। सिलेंडर भरने वालों के यहां जैसी भीड़ लगी है, उसको देखकर गैस त्रासदी वाली रात का मंजर आंखों के सामने घूमता नजर आ रहा है। हर तरफ भागदौड़, हर दिशा में अफरा-तफरी, हर इंसान जरूरत के लिए आंखों में सवाल लिए हुए…!

बुधवार की रात लोगों के मुंह से निकले इन शब्दों ने हर किसी को झकझोर दिया। शहर के अस्पतालों से रुदन ने शहर को मुश्किलों में लाकर खड़ा कर दिया। अधिकांश निजी अस्पतालों का एलान था कि ऑक्सीजन का स्टाक खत्म होने की तरफ बढ़ रहा है। अपने मरीजों के लिए किसी भी तरह से इंतजाम करके लाईए या किसी अनहोनी खबर के लिए तैयार रहिए। इसके बाद शहर में अफरातफरी का माहौल बनता नजर आने लगा। टेलिफोनिक और सोशल मीडिया के जरिये लोग ऑक्सीजन व्यवस्था की गुहार लगाते दिखाई देने लगे। जिसको जिस तरफ उम्मीद की कोई किरण नजर आती, वहां दौड़ लगाता दिखाई देने लगा।

पुराने शहर में रहने वाले फरहान खान बताते हैं कि लोगों की दर्द भरी गुहार और उसके बदले में किसी तरह की व्यवस्था न कर पाने के मलाल ने पूरी रात सोने नहीं दिया। वे कहते हैं कि उम्मीद के साथ भार्गव इंटरप्राइजेस की तरफ दौड़ लगाते तो उन्हें भारतीय गैस के पास जाने की ताकीद कर दी जाती थी। भारतीय पर पहुंचने पर आलम यह कि अमृत की बूंदों के लिए मारामारी चल रही हो। नगर निगम में फायर ब्रिगेड ऑफिसर साजिद खान ने देर रात करीब साढ़े दस बजे सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल किया, पूनम परिहार नामक पेशेंट को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत है, प्लीज हेल्प कीजिए। डॉक्टर ने सिर्फ तीन घंटे की मोहलत दी है।

शहर में बढ़ रही कोविड सेंटर्स की संख्या

प्रदेश में कोरोना तेजी से फैल रहा है। इससे निपटने के लिए सरकार ने कोविड सेंटर की संख्या बढ़ाई है। राजधानी भोपाल में हालात चिंताजनक हैं। सरकार ने भोपाल में चार निजी अस्पतालों को कोविड सेंटर बनाया है। इन अस्पतालों में अब 775 मरीजों का इलाज हो सकेगा। अभी तक कोविड सेंटर की संख्या कम थी। लेकिन अब राजधानी भोपाल में कोविड सेंटर संख्या बढऩे से बेड की संख्या 1617 से बढ़कर 2392 हो गई है। सरकार ने जिन चार अस्पतालों को कोविड सेंटर घोषित किया है, उनमें एलएन मेडिकल कॉलेज, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज, बंसल हॉस्पिटल, आरकेडीएफ कॉलेज के अस्पताल शामिल हैं। इनमें दो कोविड सेंटर में सरकार के खर्चे पर लोगों को इलाज मिल सकेगा। जबकि बंसल और आरकेडीएफ कोविड सेंटर में लोगों को निजी खर्चे से अपना इलाज कराना होगा।

पेड कोविड सेंटर

एलएन कोविड सेंटर में 200 बेड हैं, जबकि पीपुल्स कोविड सेंटर में 300, बंसल में 50 और आरकेडीएफ में 225 बेड हैं। सरकार ने इलाज का खर्च भी तय कर दिया है। बंसल में 4000 से लेकर 10000 तक इलाज का खर्च आएगा। जबकि आरकेडीएफ सेंटर में 3000 से 15000 तक का खर्च आएगा। इसके अलावा दूसरे खर्च अलग से होंगे। नाश्ता और खाने का खर्चा अलग होगा। जो जांच कराई जाएगी वह भी अलग होगी। इन प्राइवेट सेंटर में कोई भी मरीज सीधे भर्ती हो सकेगा। उसे इसके लिए जिला प्रशासन को सूचना देनी होगी। इसके बाद अस्पताल में जाकर अपना इलाज करा सकेगा।

रिपोर्ट: खान आशु

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