- Hindi News
- Local
- Mp
- Bhopal
- 4 Days Ago Kovid Center Announced; Board Outside The Hospital Bed Is Full, Sorry For Inconvenience
Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप
भोपालएक घंटा पहले
एम्स के बाहर ये नोटिस चस्पा कर दिया गया है।
- गुरुवार को यहां कोविड मरीज ने दम तोड़ दिया था
कोरोना के कोहराम के बीच ऑक्सीजन की कमी के चलते अस्पतालों ने नए मरीजों को भर्ती करना लगभग बंद कर दिया है। इसी बीच, शुक्रवार को सबसे बड़े सरकारी अस्पताल भोपाल के एम्स की भी सांसें फूल गईँ। यहां बाहर बोर्ड लग गया है- ‘बेड फुल हैं.. असुविधा के लिए खेद है।’ खास है, 4 दिन पहले ही एम्स को कोविड सेंटर घोषित किया गया था। यहां 550 बेड कोरोना मरीजों के लिए तैयार किए गए। अन्य मरीजों को या तो डिस्चार्ज कर दिया गया या फिर दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
एम्स प्रबंधन ने बेड खाली नहीं होने का हवाला देकर नए मरीजों की एंट्री बंद कर दी है। दरअसल, बेड उपलब्ध नहीं होने पर यहां कोविड इमरजेंसी के सामने एक मरीज की गुरुवार रात मौत भी हो गई थी। इसके बाद प्रबंधन ने नोटिस चस्पा किया है, जिससे यहां मरीजों की भीड़ ना लगे। बता दें कि एम्स में इसी हफ्ते 130 बेड़ से बढ़ा कर कुल 550 बेड कोरोना मरीजों के लिए किए गए हैं।
ऑक्सीजन की कमी बड़ा मुद्दा
ऐसा नहीं है, एम्स ने नए मरीजों को भर्ती करने पर फिलहाल रोक है। असल में, ऑक्सीजन की कमी के चलते जाटखेडी स्थित आरकेडीएफ में 95 बेड पर नए मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा। यहां 225 बेड की व्यवस्था है। इनमें 120 मरीज भर्ती और 95 खाली हैं। दरअसल, भोपाल के अस्पतालों को प्रतिदिन न्यूनतम 100 टन ऑक्सीजन की जरुरत है, जबकि आपूर्ति 80 टन से ज्यादा नहीं हाे पा रही है।
बता दें कि ऑक्सीजन की कमी के चलते भोपाल के आयुष्मान अस्पताल में गुुरुवार देर शाम हड़कंप की स्थिति बन गई थी। अस्पताल प्रशासन ने यह कहते हुए हाथ खड़े कर दिए थे कि सिर्फ 5 घंटे की ऑक्सीजन बची है। इसकी जानकारी प्रशासन को दे दी गई है। हालांकि समय रहते यहां सिलेंडरों से आपूर्ति की गई। मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहाेर के जिला अस्पताल में नो-एंट्री का बोर्ड लगाने के साथ-साथ पुलिस को बैठा दिया गया है। ऐसे ही इंदौर के बड़े अस्पताल ने भी नो-एंट्री का बोर्ड लगा दिया था।
हमीदिया और JP अस्पताल भी फुल
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर लोकेंद्र दवे ने बताया, अभी कुल 600 बेड कोरोना मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। कुछ साधारण बेड छोड़कर एचडीयू/आईसीयू और ऑक्सीजन बेड पूरे भरे हैं। उन्होंने कहा कि बिस्तर बढ़ाने के लिए जगह तो अस्पताल में पर्याप्त है, लेकिन संसाधन उतने नहीं है। डॉक्टर और वार्ड बॉय की कमी है। इसके अलावा, आईसीयू और एचडीयू में बिस्तर बढ़ने के लिए मल्टीपैरामीटर और वेंटिलेटर भी नहीं है।
यही हाल जेपी अस्पताल का भी है। यहां कोरोना मरीजों के लिए कुल 120 बेड हैं। इनमें आईसीयू सिर्फ 16 बेड का है। ऐसे में गंभीर मरीजों को यहां भर्ती करने की जगह हमीदिया रेफर किया जाता है।